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SDLC (System Development Lifecycle)

SDLC का Full Form होता है “System Development Lifecycle.” SDLC एक structured approach होता है जिसके द्वारा एक System को बनाया और maintain किया जाता है वो भी information technology के इस्तमाल से. इसे networks और online services में आजमाया जा सकता है लेकिन इसे ज्यादातर Software Developement में इस्तमाल किया जाता है.

जब किसी Software पर इसे apply किया जाता है, तब SDLC को “application development life-cycle” भी कहा जाता है. कुछ SDLC models में कम से कम five stages होते हैं, वहीँ कुछ में ज्यादा से ज्यादा दस तक stages हो सकते हैं.

एक typical SDLC framework जिसका की इस्तमाल एक Software Application को बनाने के लिए होता है उसमें ये सात stages जरुर से शामिल होते हैं :

1. Planning – ये सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है SLDC का. इसमें कुछ steps जरुर से होने चाहिए जैसे की एक specific program की जरुरत क्यूँ होती है, इस software को इस्तमाल करने वाले end users कौन होंगे, इसे develop करने में कितनी कीमत लगेगी, और इसे बनने में कितना समय लगेगा इत्यादि.

2. Defining – इस stage में, general development plan को funnel किया जाता है एक specific criteria में. एक program की specific requirements को define की जाती है. इस stage में, development team ये निर्णय ले सकती है की किस programming language का इस्तमाल किया जाना चहिये उस program को बनाने के लिए.

3. Designing – इस प्रक्रिया में शामिल है User Interface को तैयार करना और ये निर्धारित करना की कैसे program function करने वाली है. बड़े applications के लिए, ये बहुत ही common है create करना एक design document specification (DDS), जिसे की review करना और साथ में approve करवाना भी जरुरी होता है असली development के शुरू होने से पहले.

4. Building – इस building stage में typically शामिल होता है बड़ी मात्रा में software development process. वहीँ इसमें शामिल होती है Source Code की programming, Graphics create करना, और वहीँ assets को compile करना एक executable program में.

छोटे projects में शामिल होते हैं एक single programmer, वहीँ बड़े projects में एक साथ कई सारे teams भी काम कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, एक टीम design करती है user interface को, वहीँ दूसरी team source code लिखती है.

वहीँ multiplatform applications के लिए, individual teams को assign किया जाता है अलग अलग platforms.

5. Testing – वहीँ इस testing phase में developer खोजने की कोशिश करता है सभी प्रकार के unknown issues और साथ में fix भी करते हैं किसी bugs को जो की program में उत्पन्न होते हैं. कुछ testing की जाती हैं internally, वहीँ एक software की एक beta version को प्रदान की जाती है एक group of users को वो भी Public Testing करने के लिए.

6. Deployment – एक बार एक program pass हो जाता है testing phase, ये तैयार हो जाता है deployment के लिए. इस stage में, software को public में release कर दिया जाता है. इसे प्रदान किया जाता है via एक electronic download या एक boxed software के, जो की आती है एक CD या DVD में.

7. Maintenance – अब जबकि एक software application को release किया जा चूका है, फिर भी उसमें कुछ additional bugs या feature requests मेह्जुद होने के उम्मीद है जिसे की Users के द्वारा submit किया जाता है. Development team ऐसे में maintain करनी चहिये उस software को वो भी bugs को fix कर और साथ में उनमें कुछ नए features add कर. Commercial software programs में अक्सर शामिल होते हैं कुछ level की technical support.

इन ऊपर बताई गयी stages को cycle इसलिए कहा जाता है क्यूंकि ये सभी stages को प्रत्येक बार repeat किया जाता है जब software की एक नए major version को release किया जाता है.

वैसे तो maintenance stage में बहुत से minor updates किये जाते हैं, लेकिन ज्यादातर software companies business में ही मेह्जुद होते हैं वो भी regularly release करते रहते हैं paid updates (version 2, version 3, etc).

ये भी जरुरी है की जब कोई नयी major version release किया जाना होता है, तब development team सबसे पहले create करती है एक plan (stage 1) और फिर आगे continue करती है दुसरे stages में SDLC की.

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