भाई दूज क्यों मनाई जाती है – भाई दूज की कहानी हिंदी में

भाई दूज क्यों मनाया जाता है? ये तो हम सभी को मानना ही होगा की भाई और बहन के बीच एक अनोखी समझ होती है. वे एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त हैं, एक-दूसरे के रक्षक हैं, एक-दूसरे के प्रशंसक हैं, एक-दूसरे के गुप्त हिस्सेदार भी होते हैं. वहीँ वो एक-दूसरे से बिना कोई शर्त के ही प्यार करते हैं.

सच में भाई-बहन के बीच के भावनाओं और प्यार को समझ पाना काफी मुश्किल है. वैसे तो बहुत से ऐसे विशेष दिन या अवसर हैं जो भाई और बहन के बीच प्यार को मजबूत करने के लिए समर्पित हैं. लेकिन इसमें भैया दूज सबसे अनोखा पर्व है. इस अद्भुत त्योहार पर जहां बहनें अपने प्यारे भाई की लंबी उम्र, कल्याण और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं, वहीँ भाई भी अपनी बहन की खुशहाली की प्रार्थना भगवान से जरुर करता है.

क्या आपको पता है भाई दूज क्यों मनाया जाता है ? भाई दूज मनाने के पीछे पौराणिक मान्यता और कथा है. शायद आप में हर कोई ये तो जानता ही होगा की भाई दूज भाई और बहन के बीच प्रेम बनाये रखने का त्यौहार है. यदि कोई न भी जानता हो भाई दूज के विषय में तब भी चिंता करने की कोई जरुरत नहीं क्यूंकि आज के इस article में हम भाई दूज क्यूँ मनाते है, इसे कैसे मनाते है इत्यादि के विषय में विस्तार में जानेंगे. तो फिर चलिए शुरू करते हैं.

भाई दूज क्या है – What is Bhai Dooj in Hindi

Bhai Dooj Kyu Manaya Jata Hai Hindi

भाई दूज हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा मनाया जाने वाला रक्षाबंधन की तरह एक खास पर्व है. बाकी भारतीय त्यौहारों की तरह भाई दूज भी एक प्रमुख त्यौहार है जो कि मुख्य रूप से हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा मनाया जाता है. यह पर्व हर वर्ष दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है. भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है. यह पर्व भाई बहनों का है.

इस दिन बहन के द्वारा अपने घर में भाई का तिलक सम्मान कर भोजन कराने की परंपरा है. इस दिन बहन अपने भाई की दीर्घायु और सर्व मनोकामना पूर्ति की कामना करती है. यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को व्यक्त करता है. माना जाता है इस दिन भाई यदि अपनी बहन के यहां भोजन करता है तो उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है.

भाई दूज की कहानी

यमुना तथा यमराज भाई बहन थे. इनका जन्म भगवान सोइरी नारायण की पत्नी छाया की कोख से हुआ था. यमुना यमराज से बहुत ज्यादा स्नेह करती थी. यमुना यमराज को बार बार अपने घर भोजन करने के लिए आमंत्रित करती है लेकिन यमराज अपने कार्य मे व्यस्त होने के कारण हर बार यमुना की बातों को टाल देते थे.

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को यमुना यमराज को अपने घर में भोजन करने के लिए वचनबद्ध कर लेती है. यमराज भी सोचते हैं कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूँ मुझे तो कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता लेकिन मेरी बहन मुझसे कितना स्नेह करती है जो इतनी सद्भावना से मुझे अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित कर रही है.

तिथि के दिन यमराज बहन यमुना के घर भोजन करने के लिए निकलते है और नरक के सभी जीवों को मुक्त कर देते हैं. यमराज के घर पहुंचते ही यमराज को अपने द्वार में देख यमुना की खुशी का ठिकाना नही रहता और वह सबसे पहले स्नान करके यमराज को तिलक करके भोजन कराती है.

बहन के अपने प्रति स्नेह, आदर और सम्मान को देखकर यमराज खुश हो जाते हैं और यमुना को वर मांगने का आदेश देते हैं. यमुना ने कहा भद्र! इस दिन जो बहन मेरी तरह अपने भाई का आदर, सत्कार और टीका करके भोजन कराये उसे तुम्हारा भय न रहे. यमराज तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्र और आभूषण देकर चले जाते हैं.

भाई दूज कब मनाया जाता है ?

भाई दूज का पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है. भाई दूज का त्यौहार हर वर्ष दीपावली के दो दिन बाद तीसरे दिन मनाया जाता है.

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को ही यमुना ने यमराज को तिलक भोजन कराया था और वर मांगा था जिसे यमराज ने स्वीकार कर लिया था इसीलिए भाई दूज का त्यौहार हर वर्ष इसी दिन मनाया जाता है. इस पर्व को यम द्वितीया भी कहते हैं.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भाई और बहन दोनों के लिए काफी शुभ दिन माना जाता है.

इस वर्ष 2019 में भाई दूज का पर्व कब है ?

चूंकि भाई दूज का पर्व दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है. इस वर्ष 2019 में दीपावली 27 अक्टूबर दिन रविवार को है और भाई दूज 29 अक्टूबर दिन मंगलवार को है.

भाई दूज का दूसरा नाम क्या है ?

भाई दूज का दूसरा नाम है भैय्या दूज.

भाई दूज कैसे मनाया जाता है ?

मान्यता है कि भाई दूज के दिन शादीशुदा बहनों के द्वारा भाई को अपने घर बुलाकर नहाकर आदर सत्कार और स्नेह के साथ भाई का तिलक कर पूजन करना चाहिए और भाई की दीर्घायु की कामना करना चाहिए. इस दिन भाई को बहन के यहां ही नहाना चाहिए. हो सके तो यमुना में स्नान करें.

भाई दूज का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है. हालांकि हर क्षेत्र में इस त्यौहार को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है. उत्तर भारत में बहनें अपने भाई को अक्षत एवं तिलक लगाकर नारियल भेंट करती हैं और पूर्वी भारत में बहने शंखनाद के बाद भाई को तिलक लगाकर भेंट के तौर पर कुछ उपहार देती हैं.

भाई दूज के दिन किस देवता की पूजा की जाती है ?

भाई दूज के दिन मृत्‍यु के देवता यम जी की पूजा की जाती है.

भाई दूज क्यों मनाया जाता है

मान्यता है कि इस दिन बहन अपने भाई का तिलक कर अपने घर सम्मान के साथ भोजन कराती है. जो भाई अपनी बहन के आतिथ्य को स्वीकार करता है और जो बहन पूरी श्रद्धा से अपने भाई को आदर सत्कार के साथ तिलक कर भोजन कराती हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

माना जाता है जो भाई इस दिन अपनी बहन के यहां भोजन करता है उसे अकाल मृत्यु और यम का भय नहीं रहता है. माना जाता है इस दिन जो भी भाई बहन विधि विधान से इस पर्व को मनाते हैं तो इस दिन भाई के साथ कोई भी घटना हो जाये यमराज उसके प्राण नही हरेंगे.

यह भी माना जाता है भाई दूज मनाने से भाई एवं बहन को धन धान्य, संपत्ति और असीमित सुख की प्राप्ति होती है.

भाई दूज व्रत कथा

चूंकि सभी हिन्दू त्यौहारों को लेकर कुछ न कुछ मान्यता या कथाएं रहती हैं. इसी प्रकार भाई दूज को लेकर एक कथा श्रीकृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी है.

मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करने के पश्चात अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे. सुभद्रा ने अपने भाई से मिलकर उनका तिलक कर आरती पूजन किया और पुष्पहारों से उनका आदर सत्कार के साथ स्वागत किया तब से ही हर वर्ष इसी तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है.

भाई दूज से जुड़ी पौराणिक कथा

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन यमुना ने यमराज को अपने यहां भोजन कराया था जिससे खुश होकर यमराज नें नरक के जीवों को मुक्त कर दिया था. नरक से मुक्ति पाकर सभी जीवों को नरक की यातनाओं से मुक्ति मिली और वे तृप्त हो गए. सभी जीव पापमुक्त होकर सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त हो गए और सभी जीवों ने मिलकर उत्सव मनाया और ये उत्सव यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था.

यह तिथि यम द्वितीया के नाम से प्रचिलित हुई और इसी तिथि को हर वर्ष भाई दूज पर्व मनाया जाता है. माना जाता है इस तिथि को जो भाई अपनी बहन के यहां भोजन करता है उसे सुख संपत्ति और धन कि प्राप्ति होती है साथ ही सारी मनोकामनाएं पूरी होती है.

हिन्दू धर्म में भाई बहन के प्रेम के प्रतीक स्वरूप कौन से त्यौहार मनाये जाते हैं ?

हिन्दू धर्म में भाई बहन के प्रेम के प्रतीक स्वरूप दो त्यौहार मनाये जाते हैं एक है रक्षाबंधन और दूसरा भाई दूज है. जहां एक तरफ रक्षाबंधन में भाई बहन की जीवन भर रक्षा करने की शपथ लेता है और बहन के अच्छे जीवन की कामना करता है वही दूसरी तरफ भाई दूज में बहन भी की लंबी आयु की प्रार्थना करती है.

भाई दूज पूजा विधि

हालांकि भाई दूज मनाने की सभी जगह अलग अलग परंपरा और रीति-रिवाज है लेकिन कथाओं और पुराणों के अनुसार जो विधि विधान है वो यहां पर बताएं जा रहे हैं.

इस दिन शादी-शुदा बहनों को अपने भाई को अपने घर आमंत्रित करना चाहिए. इसके बाद दोनों स्नान करें. भाई को भी इस दिन बहन के घर ही स्नान करना चाहिए. इसके बाद दोनों को नए वस्त्र धारण करना चाहिए.

नए वस्त्र धारण करने के बाद भाई को आसन में बिठाकर तिलक करना चाहिए इसके बाद भाई की आरती उतारकर हाथ में कलावा (लाल धागा) बांधकर मंत्रोपचार करते हुए नारियल भेंट करना चाहिए. और भाई के द्वारा बहन को भेंट स्वरूप कुछ उपहार देना चाहिए. और घर के बाहर यम के नाम से चहुंमुखी दिया जलाना चाहिये. इस दिन यमुना नदी में नहाना पवित्र माना जाता है.

भाईदूज मंत्र क्या है ?

‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को. सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें.’

भाई दूज पर्व 2019 की तिथि व मुहूर्त

चलिए इस वर्ष का तिथि और मुहूर्त के बारे में जानते हैं की कब भाई दूज का त्यौहार आप मना सकते हैं.

पर्व-भाईदूज
तिथि–29 अक्टूबर 2019
दिन-मंगलवार
तिलक मुहूर्त-13:11:34 से 15:25:13 बजे तक
अवधि-2 घंटे 13 मिनट

भाई दूज क्यों मानते है?

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