दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है?

सबसे बड़ा बम कहने या सुनने से हमारे मन में क्या आता है, जरा सोच के देखिये.

हमारे मन में “हिरोशिमा या नागासाकी” की तबाही वाले मंशुबे इरादों वाले कुछ Pictures याद जाते है, या फिर भारत पोकरण (राजस्थान) में परिक्षण किये हुवे कुछ अच्छे यादगार लम्हे.

sabse bada bomb kaun sa hai

आज हम बात करते हैं एक ऐशी तबाही के बारे में जिसे जानने के बाद शिर्फ़ आप आश्चर्य ही नही बल्कि अचम्भित भी हो जाएगे. तो चलिए जानते हैं की आखिर सबसे बड़ा बम कौन सा है और ये किस देश ने बनाया हुआ है.

सबसे बड़ा बम कौन सा है?

सबसे बड़ा बम का नाम है “जार”. जी हा आपने सही पढ़ा “जार” एक Atomic बम है जिससे पूरी दुनिया कुछ ही seconds में तबाह हो जाती .

तो चलिए जानते है की आखिर “जार” किस बला का नाम है.

दरशल रुस ने एक परमाणु बम बना डाला था जिसके पुरे असर से पूरी पृथ्वी का खात्मा होना तय था, करीब 60 साल पहले तक यह परिक्षण पूरी तरह गोपनीय रखा गया था.

सबसे बड़े बम का नाम जार क्यों रखा गया?

इस atomic bomb के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प बात है जिसे हर कोई नहीं समझ सकता, रुस ने ये नाम बड़े ही सोच-समझ कर रखा था.

जार का अर्थ होता है ‘king’ याने राजा, अब आप इसी से ही उनके मंसूबे इरादों को समझ सकते है की उनका इरादा आखिर था क्या. जार जिसे रुस की भाषा में king कहा जाता है, और king सबका राजा होता है. वो भी अपने बम को दुनिया का सबसे बड़ा बताना चाहते थे इसलिए उन्होंने बम का नाम जार रखा था.

“जार” आखिर इतनी बड़ी तबाही कैसे मचा सकता था?

बात है उन दिनों की जब वर्ष 1961 में रुस और सोवियत संघ ने मिलकर इस ‘जार’ बम का full secret mission रखने का सोचा और इसी से ही इस mission में हाइड्रोजन के जरिये विस्फोट की तैयारी करने लगे थे पर अगर इस mission में थोड़ी सी भी चुक हो जाती तो पूरी दुनिया तबाह होने के कगार में था.

इसका अर्थ ये है की इस ‘जार बम mission’ में जितना विस्फोटक डालना था उससे उसके मात्रा में कमी कि गई थी. और इसका video रूस ने 60 साल बाद दिखा के ये prove किया की रूस, अमेरिका से बम और विस्फोटको तथा एटॉमिक बम के मामले में काफी आगे है.

बस रुस यही सिद्ध करना चाहता था, नही तो रुस ने ये विडियो अभी क्यों दिखया होता. आप इनकी विडियो को news chennels में आसानी से देख सकते है.

सबसे बड़ा बम किस देश का है?

सबसे बड़ा बम रुस देश का है. ये असल में कोई साधारण बम नहीं है बल्कि ये एक एटॉमिक बम है, यानि की एक परमाणु बम. ये इतना ज्यादा घातक है की अगर ये अपनी पूरी क्षमता से फटे तब ये पूरी दुनिया से मानवता को जड़ से मिटाने के काबिल है.

सबसे बड़ा बम का वजन कितना था?

सबसे बड़े बम का वजन 27 टन से भी ज्यादा का था. इतने ज्यादा बड़े और वजनदार होने के कारण इसके लिए ख़ास विमानों का प्रबंध किया गया था इसके परिक्षण के लिए.

किन तकनीको से बना था यह “जार विस्फोटक बम”

जार बम को बनाने में रूस का यह मन्ना है कि, रूस अपने शक्तियो का प्रर्शन अपने विस्फोटक बमों के जरिये कर सकता है, जार बम में atom बम और hydrogen का अत्याधुनिक तकनीक के मिश्रण से ये ‘जार विस्फोटक बम’ तैयार किया था.

अगर इस विस्फोटक को सही तरीके से इस्तमाल किया जाता तो शायद पूरी दुनिया में मानवता का कोई अश्तित्व ही नहीं होता और इसी के कारण ही इसके विस्फोटको के मिश्रण में कमी की गई ताकि इसे शिर्फ़ एक example के रूप में तैयार किया जाए.

इन खास विमानों से गिराया गया जार बम को आपको सुनने में बड़ा ही आश्चर्य होगा की जार बम को गिराने के लिए बड़े ही खासतौर और विमान के design में फेर बदल की गई थी क्योकि यह बम करीब 27 टन वजनीय था जिसमे ‘जार बम’ की लम्बाई 8 मीटर तथा 2.7 मीटर इसकी चौड़ाई थी.

आमतौर से कभी भी किसी बम को या मिसाइल को आशमानो से विमानों के जरिये गिराया जाता है तो उस मिसाइल को विमानों के अन्दर ही रखा जाता है पर इसमें जार बम की लम्बाई बाकि बम से काफी हद तक ज्यादा थी इस वजह से जार बम के लिए लड़ाकू विमान में अलग से फेर बदल की गई ताकि वह बिना किसी रुकावट के गिर सके. तथा इस विमान का नाम tupolov-95 या Tu-95 रखा गया था.

Tupolov-95 (Tu-95) लड़ाकू विमानो में आखिर खास पेंट क्यों?

तुपोलोव-95 लड़ाकू विमान में खास तरह का पेंट किया गया था क्योकि ‘जार बम’ में इतनी तगड़ी और खतरनाक radiation होने के कारण लड़ाकू विमान को कम छती पहुचे इसके वजह से उनकी सुरक्षा बड़ाई गई थी ताकि जार बम के विस्फोट से विमानों को छती ना हो.

इसमें मुख्य रूप से 2 लड़ाकू विमानों को भेजा गया था एक तो वो विमान जिसमे ‘जार बम’ था और एक और विमान था जिसके जरिये video की recording होनी थी.

वीडियो करीब 30 से 40 मिनट की recording हुई थी क्यों की विस्फोट तो कुछ महज seconds की थी पर उसके द्वारा फैली mushroom cloud बनने से काफी टाइम लगा, पर ये विस्फोट काफी बड़ा था.

बम गिराते ही क्यों भागे दोनों विमान

बम गिराते ही दोनों विमान तुरंत ही वंहा से भागने लगे, करीब 10 किलोमीटर की अधिक ऊंचाइयों से विमानों द्वारा पैराशूट के जरिये ‘जार बम’ को इतनी ऊंचाइयों से गिराया जाना था ताकि उनको वंहा से दोनों विमानों को बम विस्फोट होने से पहले सही स्थान मिल सके जिससे विमान को कोई नुकसान ना पहुचे.

दोनों विमान करीब 50 किलोमीटर की अधिक दुरी तक पहुच सके पर फिर भी उनमे से एक विमान विस्फोट के चपेट में आने की वजह से कुछ किलोमीटर तक गोते खाते हुवे निचे आने लगा पर समझदार लड़ाकू pilot होने की वजह से इसे सम्हाल लिया गया.

सबसे बड़े बम का परिक्षण कहा किया गया था?

दरअसल इस बम को रूस के पूर्वी इलाके में बेहद ही वीरान ‘नोवाया ज़ेमलिया द्वीप’ में गिराया गया था इस बम के धमाके की झलक करीब 1000 किलोमीटर तक भी देखी जा सकती थी. इसके आसपास के सभी इलाको के घरो में फिस्फोट का असर देखा जा सकता था.

किन कारणों से बनाया गया था यह विनाशकारी विस्फोट

रूस का कहना था की जो अमेरिका ने हिरोशिमा में बम विस्फोट किया था बस उसके जवाब में रूस ने इस बम को बनाने का सोचा, पर रूस को पता था की इस बम को अगर अमेरिका को मुहतोड़ जवाब देना होतो ये सही हल नहीं है क्यों की इससे मानव जीवन की कड़ी ही नस्ट हो जाती.

जार बम को बनाने का मकसद बस इतना ही था की वह बताना चाहता था की रूस भी कम नहीं है किसी भी मामले में.

जब वैज्ञानिको को लगा की इस बम को बनाने में जितने भी विस्फोटक लगे है अगर हम इसे ऐसे ही विस्फोट करे तो पूरी पृथ्वी ही राख ना होजाए इसी वजह से इसके विस्फोटको की मात्रा में कमी कि गई.

आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख सबसे बड़ा बम कौन सा है जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को सभी दिलचस्प बातें जैसे की सबसे बड़ा बम के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

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2 COMMENTS

  1. प्रिय लेखक ये पोखरन नही है उसका नाम पोकरण (राजस्थान) है। क्योंकि मै राज्स्थान से हू

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