Initial Coin Offering (ICO) क्या है और कैसे काम करता है?

क्या आपने हाल फिलहाल में ICO क्या है (Initial Coin Offering in Hindi) के बारे में सुना है. क्यूँ आज जिसे देखो वो इस Term ICO के बारे में जानने को चाहता है. दोस्तों जैसे की हम जानते हैं की आजकल Cryptocurrency इंटरनेट पर काफी trend कर रही है। Cryptocurrency का सबसे अच्छा उदाहरण हम सभी को पता है की Bitcoin को कह सकते है। क्यूंकि जिस तेजी से Bitcoin की कीमत में उछाल आया है लोगों का इस सिलसिले में ज्यादा रूचि दिखाई दी है. ऐसे में धीरे धीरे लोगों का सभी Cryptocurrency और उससे जुड़ी सभी बातों के तरफ ज्यादा झुकाव हो रहा है.

आज कल इन्टरनेट पर किसी भी Bitcoin या cryptocurrency से जुडी वेबसाइट पर एक नयी चीज़ देखने को मिल रही है जिसका नाम है Initial Coin Offering (ICO) या फिर हिंदी मैं इसका अनुवाद “आरंभिक सिक्का ऑफरिंग” है। आजकल इंटरनेट पर ICO एक बहुत बड़े चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन लोगों को ICO के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पा रही है. इसलिए आज मैंने सोचा क्यूँ न आप लोगों को ICO क्या है और इसके क्या फायेदे है के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दे दी जाये जिससे आपको इसे समझने में आसानी होगी. तो आखिर ICO क्या होता है और क्यों हर कोई इसके बारे मैं इतनी बात कर रहा है आइये जानते है।

ICO क्या है (What is Initial Coin Offering in Hindi)

ICO को एक नई cryptocurrency जारी करने के लिए crowd funding के एक विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। जब भी किसी crypto currency के लिए crowd funding के जरिये रकम जुटाई जाती है उस प्रक्रिया में कंपनी अपने निवेशकों को जिन्होनें कंपनी को रकम जुटाने में मदद की है उनको कंपनी में Share या हिस्से की जगह एक टोकन प्रदान करती है। इस टोकन को निवेशक जैसे इस्तेमाल करना चाहे वैसे कर सकता है। कंपनी द्वारा जारी किये गए इस टोकन को निवेशक किसी को भी बेच सकता है। या फिर अपने पास रख कर इसकी price value बढ़ने का इंतज़ार कर सकता है। आप इस टोकन को bitcoin, Ethereum या किसी और crypto currency में इस्तेमाल करके bitcoins खरीदने के लिए इस्तेमाल कर सकते है। ये tokens हर जगह उपयोग किये जा सकते है।

History Of ICO initial coin offering

जुलाई 2013 में मास्टरकोइन द्वारा पहले टोकन की बिक्री आयोजित की गयी, Ethereum ने 2014 में टोकन बिक्री के साथ अपने पहले 12 घंटों में 3,700 BTC जुटाए, जो लगभग 2.3 मिलियन डॉलर के बराबर था।

ICO और टोकन बिक्री आज के समय में बेहद लोकप्रिय हो चूके है। इसमें होने वाले मुनाफे से ICO ने बहुत से लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है।

ICO क्यों उपयोग किया जाता है?

जब भी कोई कंपनी शुरू होती है तो उसको सबसे पहले अपने प्रोडक्ट के लिए रकम जुटानी होती है। उसके पास रकम जुटाने के तीन मुख्य तरीके होते है-

1) पहला की वह निवेशकों को अपनी कंपनी में शेयर दे दे।

2) दूसरा की वह किसी बैंक से ब्याज(loan) लेकर अपनी कंपनी की funding करे। इस अवस्था में कंपनी को बैंक को ब्याज भी देना पड़ेगा।

3) तीसरा और आखिरी तरीका है की प्रोडक्ट बनाने से पहले उसका आर्डर लेना और उससे पैसे जमा करके प्रोडक्ट बनाना और बेचना।

ICO एक व्यक्ति या कंपनी के लिए अपनी परियोजनाओं के लिए fund जुटाने के सबसे अच्छे और सबसे आसान तरीकों में से एक है, और इसके साथ साथ ही न केवल कंपनियाँ बल्कि लोग भी उसकी परियोजना(project) में निवेश करते है।

जब भी किसी कंपनी को अपने प्रोजेक्ट/स्टार्ट-अप के लिए पैसा जुटाना होता है तो उसके लिए वो ICO यानी की प्रारंभिक सिक्का ऑफरिंग का उपयोग करते है। आसान शब्दों में कहा जाए तो कंपनी के प्रोडक्ट के लिए crowdfunding के जरिये रकम जुटाने की प्रक्रिया को ICO के माध्यम से किया जाता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2017 में हर महीने लगभग 50 ऑफरिंग हो रही है। जो की एक बहुत ही बड़ा नंबर है।

How ICO works?

जब भी कोई cryptocurrency startup firm ICO के जरिये फण्ड raise करना चाहती है तो फण्ड raise करने से पहले वह कंपनी एक प्लान बनाती है। कंपनी एक whitepaper पर प्रोजेक्ट से जुडी सारी जानकारी लिखती है। जिसमे बताया जाता है की प्रोजेक्ट में कितने पैसे लगेंगे और firm को कितने पैसे चाहिए? firm को fund raise करने में कितना समय लगेगा? यह ICO campaign कब तक चलेगा और अगर raise की हुई रकम प्लान की गयी रकम से कम होती है तो ऐसे मैं क्या होता है। ये सब जानकारी उस whitepaper पर लिखी हुयी होती है। whitepaper ICO का एक बहुत महत्वपूर्ण कागज़ होता है।

ICO के ज्यादातर मामलों में इक्विटी शामिल नहीं होने के कारण निवेशकों को ICO के दौरान कम दरों पर Crypto currency खरीदने में अधिक दिलचस्पी होती है। शुरुआत में ICO कम दरो पर मिल जाती है पर जैसे जैसे कंपनी grow करती है इसकी price value और market value भी बढ़ती है। निवेशक कम कीमतों में खरीद कर ज्यादा पैसो में बेचने की सोच के साथ ICO पर निवेश करते है। जब ICO एक्सचेंजों पर आ जाती है तो निवेशक को काफी मुनाफा होता है। बिटकॉइन ने अभी हाल के समय में 1000 डॉलर पार किये है। जबकि 2011 में यह मात्र एक डॉलर था।

Types of ICO

ICO को विभिन्न प्रकार से विभाजित किया जा सकता है। ICO में प्रोजेक्ट funding के लिए या तो एक समय , लक्ष्य की एक तय सीमा हो सकती है जो की बदली नहीं जा सकती। या फिर इसके अलावा ICO में प्रत्येक टोकन को पूर्व-नियत मूल्य दिया जाता है जो ICO अवधि के दौरान कभी भी बदला नहीं जाता। इस मामले में टोकन आपूर्ति को स्थायी रखा जाता है। इसमें एक गतिशील धन लक्ष्य शामिल है। इस मामले में प्राप्त funding के अनुसार टोकन वितरण किया जाता है। यदि आपकी परियोजना को अधिक funding मिलती है, तो token के मूल्य में वृद्धि हो जाती है। इससे कंपनी को ज्यादा funding जुटाने में मदद मिलती है।

Advantages and Disadvantages of ICO

ICO के बहुत से फायदे है। जैसे की हर अच्छी चीज़ के साथ बुरी चीज़ हमेशा जुडी होती है ठीक वैसे ही इसके फायदों के साथ साथ ICO के कुछ नुकसान भी है।आइये ICO के फायदे और नुक्सान जानते है।

Advantages:

ICO का मुख्य और सबसे अच्छा फायदा है की इसके जरिये जो कंपनियां निवेशक ढूंढ रही होती है उनको निवेश करने के लिए लोग मिल जाते है। यही फायदा इसमें निवेश करने वालो के लिए भी है। निवेशक बड़ी आसानी से ICO में निवेश कर सकते है। ICO निवेश के लिए सब के लिए खुला है। कोई भी व्यक्ति इसमें निवेश कर सकता है।

जब भी प्रोजेक्ट की शुरुआत होती है तो टोकन कम price पर खरीदे जा सकते है। प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इनका मूल्य काफी बढ़ जाता है। और फिर इनको बेच कर आप काफी अच्छा पैसा कमा सकते है।

ICO टोकन में लिक्विडिटी(liquidity) इसके इतने लोकप्रिय होने की वजह है। टोकन में तरलता तथा financial चीज़ों में पारदर्शिता इसे पारंपरिक निवेश वाली स्कीमों से बेहतर बनाती है।

Disadvantages:

ICO के सिर्फ फायदे नहीं है इसके कुछ नुकसान भी है। टोकन में दी जाने वाली तरलता अपनी जगह है पर इसमें निवेश करने से पहले आपको प्रोजेक्ट के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए और अगर आप बिना पूर्ण जानकारी के निवेश करते है तो आपको काफी नुकसान सहन करना पढ़ सकता है। क्योंकि अगर प्रोजेक्ट सफल नहीं होता तो आपको निश्चित करना पड़ता है की आपकी रकम का क्या होगा। इसलिए पहले पूरी जानकारी प्राप्त कर ले।

इसकी लोकप्रियता को देखते हुए आजकल बहुत सी कंपनिया ICO के नाम पर फर्जीवाड़े भी कर रही है। वो निवेश किये गए पैसो के लेकर भाग जाती है। इसलिए निवेश करने से पहले कंपनी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी जुटा ले और जब आपको सब सही लगे तब ही पैसे लगाये।

ICO में टोकन की अस्थिरता भी एक चर्चा करने वाला विषय है। अगर कोई टोकन आज अच्छा चल रहा है तो क्या पता आगे चल कर उसकी price कम हो जाए। ऐसा होना मुमकिन है बहुत सारी चीज़ें है जिनकी वजह से ऐसा हो सकता है। इसलिए निवेश करते समय टोकन की अस्थिरता को बगल में नहीं किया जा सकता।

ICO और IPO में अंतर

कई लोग एक ICO की तुलना IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) से भी करते हैं, पर हम बता दे की दोनों में काफी अंतर है IPO के विपरीत, ICO आपको कंपनी में की किसी भी तरह हिस्सा या ownership नहीं देता।

IPO में जहाँ निवेशक को कंपनी के आंतरिक मामलो में वोटिंग करने का हक़ प्रदान किया जाता है। ICO में ऐसा कुछ नहीं है। ICO में निवेशक को सिर्फ उसके पास मौजूद उस टोकन को इस्तेमाल करने का हक़ होता है।

केवल स्थापित कंपनियां जो की कुछ समय से ऑपरेशन में हैं केवल वही IPO जारी करती हैं जबकि एक नये स्टार्ट-अप की पूंजी बढ़ाने के लिए ICO का इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, ICO जारी करने वाली अधिकांश कंपनियों के पास बाजार में तैयार product नहीं होता है। उनमें से ज्यादातर के पास सिर्फ एक white paper होता हैं जो की product से जुडी जानकारी का वर्णन करता है।

IPO कंपनी की स्थापना के बाद किया जाता है। जबकि ICO मार्किट में प्रोडक्ट के आने से पहले, कंपनी या उस प्रोडक्ट के लिए रकम जुटाने के लिए किया जाता है। ICO कंपनी की शुरूआती stage में जारी किया जाता है तो IPO कंपनी की स्थापना होने के बाद जारी किया जाता है।

Future of ICO

ICO ने जिस तरह से इतने कम समय में इतनी अधिक लोकप्रियता हासिल की है उसे देख के तो यही लगता है की निवेश करने की और फण्ड जुटाने की ये तरक़ीब बाजार में काफी समय तक रहने वाली है। इसके प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास और बढ़ी हुयी ऑफरिंग तो इसी और इशारा करते दिख रहे है। अभी ICO के बारे में कुछ भी कहना बहुत जल्दबाज़ी होगा पर अभी के trend के मुताबिक़ यह काफी आगे तक जाने वाला प्लान है।

Final words on ICO

मुझे आशा है के आपको ICO क्या है (What is Initial Coin Offering in Hindi) समझ में आ गया होगा. वेसे जब स्टार्टअप को जरूरत के हिसाब से पैसे नही मिल पाते तो Firm को निवेशकों का निवेश किया गया पैसा उनको वापस लौटाना पड़ता है और इस अवस्था में ICO को असफल मान लिया जाता है। इसकी ये अच्छाई है पर निवेश करते समय ध्यान रखें की आप कहाँ और कितना पैसा निवेश कर रहे है। ICO के नाम पर scam कर रही फर्जी कंपनियों से दूर रहे। ऐसी कंपनियों की लिस्ट बना ले जो इन फर्जीवाड़ों में लिप्त रहते है।

मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Share करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

Hindi Me Jankari

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