ओणम क्यों मनाया जाता है?

ओणम क्यों मनाते हैं? हम एक ऐसे देश के निवासी हैं जहाँ कई तरह की सभ्यताए निवास करती हैं. भारत एक विभिन्नताओं से भरा हुआ देश हैं. पूर्व से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण तक न केवल विभिन्न भौगोलिक स्थितिया बल्कि विभिन्न सभ्यताए भी पायी जाती हैं. विभिन्न सम्प्रदायों के उपलब्ध होने के कारण विभिन्न तरह की मान्यताये और उनसे जुड़े हुए त्यौहार भी मौजूद हैं. ऐसा ही एक त्यौहार ओणम भी हैं. यह एक बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार हैं लेकिन आप में से काफी कम लोग ही इसके बारे में जानते होंगे. आज के इस पोस्ट में हम ओणम क्या हैं और ओणम क्यों मनाया जाता हैं जैसे विषयो पर ही बात करेंगे.

भारत के अलग अलग प्रदेशो में तरह-तरह के लोग रहते हैं और इस कारण यहा कई सम्प्रदाय मौजूद हैं. विभिन्न सम्प्रदायों की मान्यताओ के कारण कई त्यौहार ऐसे हैं जिनके बारे में शायद आपने सुना भी नहीं होगा और वह त्यौहार कुछ लोगो के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. ओणम भी एक ऐसा ही त्यौहार हैं.

ओणम का नाम शायद आप लोगो ने आज से पहले कभी नहीं सुना होगा लेकिन साउथ इंडिया में यह त्यौहार काफी लोकप्रिय हैं. यह त्यौहार मुख्य रूप से केरल में मनाया जाता हैं. इसलिए मैंने सोचा क्यों न मैं आप लोगों ओणम क्यों मनाया जाता है के विषय में पूरी जानकारी प्रदान करूँ जो की काफी कम लोगों को मालूम है. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

ओणम क्या हैं – What is Onam in Hindi

onam kyu manaya jata hai

ओणम या Onam केरल में मनाये जाने वाला एक त्यौहार हैं. वैसे तो यह त्योहार उरे भारत में मनाया जाता हैं लेकिन केरल राज्य में इसकी विशेषता सबसे अधिक हैं. इस त्यौहार को केरल का सबसे बड़ा त्योहार भी माना जाता हैं.

इस त्यौहार को मंदिरो में नहीं बल्कि घरो में मनाया जाता हैं. यह त्यौहार करीब अगस्त से सितम्बर के बीच में मनाया जाता हैं. ओणम को मलयाली पंचांग के अनुसार कोलावर्षम के प्रथम महीने में मनाया जाता हैं. कुछ जगहों पर इस त्यौहार को ओनम भी कहा जाता हैं.

यह त्यौहार हिन्दू सभ्यता के सबसे उच्च स्तर के देव माने जाने वाले विष्णु के अवतार वामन को समर्पित है. यह त्यौहार किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं. इसे लोकप्रिय रूप से ‘फसल का त्यौहार‘ भी कहा जाता हैं. ओणम का यह त्यौहार अथम दिन से लेकर थिरुवोणम के दिन तक बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता हैं.

यह त्यौहार फसल के मौसम की शुरुआत में मनाया जाता हैं. धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस समय पर ही भगवान विष्णु ने स्वर्ग को असुर महाराजा महाबली से मुक्त करने के लिए वामन अवतार धारण किया था. कुछ राज्यो में इस त्यौहार को वामन जयंती के नाम से भी जाना जाता हैं.

ओणम त्यौहार का महत्व

सभी त्यौहारो का अपना एक अलग महत्व होता हैं. ओणम त्यौहार साउथ इंडिया में काफी लोकप्रिय हैं. यह त्यौहार सबसे अधिक महत्वपूर्ण केरल निवासियों के लिए हैं. जिस तरह से पूरे देश में गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा जैसे पर्व 10 दिन तक मनाये जाते हैं वैसे ही केरल में ओणम के त्यौहार को 10 दिनों तक बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता हैं.

यह त्यौहार किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता हैं. ओणम का त्यौहार उस समय मनाया जाता हैं जब साउथ इंडिया और मुख्यतः केरल में फसले पककर तैयार होती हैं. इस समय न केवल महाबली और भगवान वामन की बल्कि अपनी फसलो की सुरक्षा और अपनी मनोकामनाओ की पूर्ति के उद्देश्य से लोग श्रावण देवता और पुष्प देवी की पूजा भी करते हैं.

ओणम के मौके पर अधिकतर शाकाहारी पकवान बनाये जाते हैं. यह त्यौहार केरल के प्रसिद्ध और इकलौते वामन मन्दिर त्रिक्का करा से शुरू होता हैं. इस मन्दिर के बारे में मान्यता हैं की इसे भगवान परशुराम ने बनवाया था. मान्यता हैं की ओणम के समय पर कम से कन 20 पकवान बनाये जाने चाहिए.

इस वजह से विभन्न जगहों पर इस समय पर अनेक तरह के पकवान बनाये जाते हैं और उन्हें प्राचीन समय की तरह केले पर पत्तो पर परोसा और ग्रहण किया जाता हैं. ओणम की इस थाली को साध्या थाली कहा जाता हैं.

ओणम क्यों मनाया जाता है?

ओणम को मनाने के पीछे कई कारण हैं. लेकिन मुख्य रूप से ओणम को महाबली की वापसी के रूप में मनाया जाता हैं. इसके पीछे एक पौराणिक कथा हैं. इस पर्व के सन्दर्भ में कहा जाता हैं की केरल में ‘महाबली’ नाम का एक असुर राजा हुआ करता था. ऐसे तो महाबली एक असुर राजा था लेकिन उसने आने प्रजा के लिए काफी नेक काम किये और इस वख से वह उनके लिए किसी देवता से कम नहीं था.

महाबली को अपनी प्रजा बहुत प्रिय थी और प्रजा को अपने राजा महाबली बेहद प्रिय थे. महाबली ने अपनी साधना से कई तरह की शक्तिया प्राप्त की और उसका यश भी दिन ब दिन बहता ही जा रहा था.

कहा जाता हैं की कोई भी देव महाबली को नहीं हरा सकता था. महाबली ने इंद्र की पराजित करके स्वर्ग पर कब्जा कर लिया. इंद्र की खराब स्थिति को देखते हुए उनकी माता अदिति ने अपने पुत्र की रक्षा के लिए भगवान विष्णु की आराधना शुरू कर दी. आराधना से प्रकट होकर भगवान विष्णु से अदिति से वादा किया की वह इंद्र का उद्धार करेंगे और उन्हें उनका खोया हुआ राजपाट वापस दिलवाएंगे. भगवान विष्णु ने कुछ समय बाद अदिति के गर्भ से वामन के रूप में जन्म लिया. यह भगवान का ब्रह्मचारी रूप था.

असुर राजा महाबली स्वर्ग पर स्थायी अधिकार प्राप्त करना चाहते थे और इसके लिए वह अश्वमेध यज्ञ करा रहे थे. श्रीहरि अपने वामन रूप में वहां पहुच गए. महाबली ने भगवान का सत्कार किया और उनसे कहा की वह जो भेट मांगना चाहे वह मांग सकते हैं. भगवान ने महाबली से तीन कदम रखने की जगह मांगी. महाबली ने भगवान का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. लेकिन भगवान ने एक कदम से पूरी पृथ्वी और दूसरे कदम से पूरा आसमान नाप दिया.

तीसरा कदम रखने की लिए जगह ही नहीं बची. अतः अपना वचन पूरा करने के उद्देश्य से महाबली ने तीसरा कदम रखने के लिये भगवान के आगे अपना सिर झुका दिया. वामन ने जैसे ही महाबली के सिर पर अपना कदम रखा तो भगवान के अनन्त बल के कारण महाबली पाताल में चले गए.

असुर राजा महाबली की प्रजा को उनसे अगाध प्रेम था. जब प्रजा को महाबली के पाताल में जाने की सूचना मिली तो पूरे राज्य में हाहाकार मच गया. महाबली के जाने के कारण प्रजा बेहद ही दुःखी थी. भगवान भी बेहद दयालु थे अतः महाबली के प्रति प्रजा के अनन्त स्नेह को देखते हुए भगवान ने महाबली को यह वरदान दिया की वह वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आ सकेंगे. मान्यता हैं की हर वर्ष एक निश्चित समय मर महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं.

यही समय एक त्यौहार के रूप में माना जाता हैं जिसे हम ओणम कहते हैं. मान्यता हैं की जब महाबली प्रजा से मिलने आते हैं तब पूरे राज्य में हरियाली छा जाती हैं और प्रजा को सम्रद्धि प्राप्त होती है.

ओणम कब मनाया जाता है?

जिस तरह से अधिकतर हिन्दू त्यौहार जैसे की दीवाली और होली हिन्दू कलेंडर और पंचांगो के आधार पर मनाये जाते हैं उसी तरह से ओणम भी मलयाली कलैंडर पर आधारित हैं. यह त्यौहार मलयाली कलैंडर के अनुसार कोलावर्षम के प्रथम माह छिंगम में मनाया जाता हैं.

अंग्रेजी कलेण्डर के अनुसार यह समय क्रीं अगस्त से सितम्बर के बीच में रहता हैं. साल 2019 में यह त्यौहार 1 सितम्बर से 13 सितम्बर तक मनाया गया था और साल 2020 में यह त्यौहार 22 अगस्त से लेकर 2 सितम्बर तक मनाया जाएगा.

ओणम कैसे मनाया जाता है?

ओणम त्यौहार का महत्व केरल में दीवाली से कम नहीं हैं. इस त्यौहार की तैयारियां करीब 10 दिनों पहले से ही शुरू हो जाती हैं. ओणम के आने से पहले ही घरो की सफाई कर दी जाती हैं. ओणम के पहले दिन को उथ्रादम के नाम से जाना जाता हैं. उथ्रादम की रात को घरो कक अच्छे तरह से सजा दिया जाता हैं. इसके बाद थिरुओणम के दिन सुबह घरो में पूजा की जाती हैं. इस समय घर पर कई तरह के शाकाहारी पकवान बनाये जाते हैं जिनकी संख्या 20 या 20 से अधिक होती हैं.

ओणम त्यौहार को मनाने वाले लोग अपने घरो में रंग बिरंगी रंगोलियां मनाते हैं. लड़कियां घर में बनाई गयी रंगोली के चारों तरफ केरल का एक विशेष लोक नृत्यन तिरुवाथिरा कलि करती है. हर रोज इस उक्लम पर फूलो का एक गोला बना दिया जाता हैं इससे 10वें दिन अर्थात तिरुवोनम के दिन तक यह काफी बड़ी हो जाती हैं.

इस पुकल्म के बीच राजा महाबली और विष्णु के वामन अवतार की और उनजे अंग रक्षको की कच्ची मिट्टी से बनाई गयी मुर्तिया होती है.. इसके अलावा कई जगहों पर नौका दौड़ा, रंगोली बनाना, पुलि कलि अर्थात टाइगर स्टाइल का डांस और कुम्माईतीकलि यानी की मास्कं डांस जैसी प्रतियोगिताएं मनाई जाती हैं. इस तरह से यह त्यौहार काफी धूम धाम से मनाया जाता हैं.

आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख ओणम क्यों मनाया जाता है जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को ओणम की पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

यदि आपको यह लेख ओणम क्यों मानते है पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter और दुसरे Social media sites share कीजिये.

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