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Kernel

Kernel असल में foundational layer होता है एक operating system (OS) का. ये function करता है एक basic level में, जिसमें ये communicate करता है hardware और managing resources के साथ, जैसे की RAM और CPU.

चूँकि एक kernel handle करता है बहुत से fundamental processes को, इसलिए इसे load करना होता है boot sequence के शुरुवात में जब एक computer start-up होता है. तब kernel सबसे पहले perform करता है एक system check और ये फिर recognize करता है components, जैसे की processor, GPU, और memory.

वहीँ उसके साथ ये check भी करता है की कहीं दुसरे peripherals connected हैं भी या नहीं. जैसे ही OS load होता है और साथ में graphical user interface appear होता है, फिर kernel run करने लगता है. यहाँ तक की जब OS fully loaded होता है, तब भी kernel run कर रहा होता है background में, साथ में ये system resources को manage भी कर रहा होता है.

कर्नेल के प्रकार

बहुत से प्रकार के kernels मेह्जुद होते हैं, लेकिन उनमें से केवल दो ही सबसे ज्यादा popular हैं जो की हैं monolithic kernels और microkernels.

एक monolithic kernel असल में एक single codebase ही होता है, या एक block होता है source code का, जो की प्रदान करता है सभी जरुरी services जिन्हें की offer किया जाता है operating system के द्वारा. वहीँ इसकी काफी simplistic design होती है और ये वहीँ create करता है एक well-defined communication layer, hardware और software के बीच में.

Microkernels का भी वही समान प्रकार का function होता है जैसे की monolithic kernels का होता है, लेकिन इन्हें जानबूझकर design किये गए होते हैं छोटे आकार के, जितने मुमकिन हो. एक single codebase के सभी resources को manage करने के स्थान पर, kernel handle करती है केवल most basic functions को. ये इस्तमाल करता है modules या “servers” बाकि सभी चीज़ों को manage करने के लिए.

उदाहरण के लिए, device drivers को typically शामिल किया जाता है एक monolithic kernel में, लेकिन उन्हें split कर दिया जाता है separate modules में एक microkernel में.

ये design ज्यादा complex होती है, लेकिन ये प्रदान करता है एक ज्यादा efficient तरीका system resources को इस्तमाल करने का और साथ में ये रक्षा भी प्रदान करता है system crashes से.

Kernel Panics in Hindi

चूँकि kernel handle करता है सबसे ज्यादा basic functions को एक computer का, ऐसे में अगर ये crash करता है तब वहीँ उसके साथ ये पूरी computer को भी साथ ले लेता है. इस प्रकार के अनहोनी को एक “kernel panic” कहा जाता है जो की अक्सर macOS और Unix systems में होता है.

वहीँ ये बहुत ज्यादा समानता रखता है blue screen of death के जैसे, जो की Windows में होता है. ऐसे में यदि आप एक kernel panic से अपने computer को recover करना चाहते हैं तब इसके लिए आपको computer को restart करना होता है.

Kernel panics अक्सर होते हैं hardware communication issues के द्वारा.

ऐसे में अगर आपका computer ऐसे repeated kernel panics पैदा करता है, तब इसे ठीक करने के लिए आपको unnecessary devices को unplug कर देना चाहिए जिससे की आपकी समस्या ठीक हो सकता है.

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