Capacitor क्या है और कैसे काम करता है?

क्या आप जानते हैं की ये कैपेसिटर क्या है (Capacitor in Hindi). यदि नहीं तब तो आज का यह article आपके लिए काफी रोचक होने वाला है. यदि आपने कभी Capacitor देखा नहीं है तब अपने घर के बाहर जाइये और आसमान में आपको जरुर ही Capacitor नज़र आयेंगे. आप सोच रहे होंगे की में क्या पागलों जैसी बात कर रहा हूँ, लेकिन में ऐसा बिलकुल भी नहीं कर रहा हूँ क्यूंकि में जिस चीज़ के बारे में बोल रहा हूँ वो और कुछ नहीं बल्कि आसमान में उड़ रहे बादल हैं. जी हाँ दोस्तों ये बादल भी एक प्रकार के capacitor होते हैं. कैसे होते हैं? यदि आपको जानना है तब आपको यह article capacitor क्या होता है in hindi पूरी तरह से पढना होगा.

Capacitors (जिसे की condensers भी कहा जाता है), ये energy-storing devices होते हैं जिन्हें widely इस्तमाल televisions, radios, और दुसरे प्रकार के electronic equipments में किया जाता है. चाहे वो आपके radio को किसी station में Tune करना हो, या किसी digital camera से photo के लिए flash करना हो, या अपने HDTV में channels flick करना हो, इन सभी जगहों में हम Capacitors का अच्छा इस्तमाल करते हैं. जैसे की मैंने पहले भी कहा है की Clouds (बादल) भी ठीक electronic circuit में इस्तमाल Capacitors के तरह ही काम करते हैं, फर्क सिर्फ इतना है की ये बहुत ही बड़े होते हैं electronic capacitor के तुलना में. चलिए आगे इस article में Capacitors से सम्बंधित सभी जानकारी प्राप्त करते हैं. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं कैपेसिटर क्या होता है.

कैपेसिटर क्या है (What is Capacitor in Hindi)

Capacitor Kya Hai Hindi

Capacitors ऐसे passive electrical components होते हैं जो की electric energy store करते हैं. इन्हें पहले condenser के नाम से जाना जाता था. एक capacitor electrical conductors से बने हुए होते हैं और insulator के द्वारा separated होते हैं. इस insulating layer को dielectric कहा जाता है. वैसे तो सभी capacitors में समान basic principle components इस्तमाल होते हैं, लेकिन material की choice और configuration एक दुसरे से अलग होती है. ये बहुत ही common element होती हैं किसी भी electrical या electronics circuits की. उदाहरण के लिए इनका इस्तमाल केवल AC Current को केवल allow करने के लिए किया जाता है और DC current को block करने के लिए, वहीँ कुछ जगहों में एक smooth power supply output के लिए इस्तमाल होता है.

कैपेसिटर कैसे काम करता है

एक capacitor सक्षम होता है energy को store करने के लिए एक electrostatic field में जो की generate होता है coductors के across potential difference create होने से. इसलिए जब कोई conductor के across voltage दिया जाता है, तब capacitor के एक plate में positive charge collect होता है वहीँ दुसरे में negative charge. इसलिए physicists का मानना है की एक capacitor work करती है energy को store करके electrostatically किसी एक electric field में.

Electric Charge और potential difference (voltage) की ratio को capacitance कहा जाता है. इसे farads में मापा जाता है (unit). यही सबसे main parameter होती है किसी capacitor को describe करने के लिए. Capacitance सबसे ज्यादा तब होती है जब conductors के बीच स्तिथ दुरी सबसे कम होती है और conductors का surface सबसे ज्यादा होता है. Ideal capacitors केवल theory में ही होते हैं जिन्हें पूरी तरह से capacitance से ही describe किया जाता है, लेकिन real world में कुछ limitations exist करते हैं. उदाहरण के लिए conductors और lead wires, parasitic inductance and resistance पैदा करते हैं. वहीँ static electric field की अपनी ही maximum strength की limit होती है, जिसे की describe किया जाता है breakdown voltage से, साथ में Dielectric से जो current leak होता है उसे leakage current कहा जाता है.

कैपेसिटर के प्रकार

वैसे तो Capacitors के बहुत से प्रकार मेह्जुद हैं, लेकिन मैंने निचे कुछ महत्वपूर्ण capacitors के विषय में जानकारी प्रदान करी है :

Ceramic capacitor: इस प्रकार की capacitor का इस्तमाल बहुत से applicaions में होता है चाहे वो Audio हो या फिर RF. इनकी Values की range picofarads से 0.1 microfarads तक होती है. इन Ceramic capacitor का आम तोर से ज्यादातर इस्तमाल होता है क्यूंकि वो cheap और reliable होते हैं, साथ में इनका loss factor बहुत low होता है.

Electrolytic capacitor: इस type की capacitors अक्सर polarized होते हैं. ये बहुत ही ज्यादा high capacitance values offer कर सकते हैं – typically above 1μF, और ये अक्सर low frequency applications में ज्यादा इस्तमाल किये जाते हैं – जैसे की power supplies, decoupling और audio coupling applications, क्यूंकि इनकी frequency limit होती है अगर वो around 100 kHz हो तब.

Tantalum capacitor: Electrolytic capacitors के तरह ही tantalum capacitors भी polarised होते हैं और बहुत ही ज्यादा और high capacitance level प्रदान करते हैं उनके volume में. लेकिन इस प्रकार के capacitor बिलकुल ही intolerant होते हैं reverse biased के प्रति, और अक्सर explode हो जाते है जब इन्हें under stress रखा जाये तब. साथ ही इन्हें high ripple currents और voltages में भी इस्तमाल नहीं करना चाहिए. ये दोनों leaded और surface mount formats में available होते हैं.

Silver Mica Capacitor: Silver mica capacitors का अब ज्यादा इस्तमाल नहीं किया जाता है, लेकिन ये बहुत ज्यादा high levels की stability, low loss और accuracy प्रदान करती है जहाँ space कोई issue की बात नहीं होती है. इनका इस्तमाल primarily RF applications में किया जाता है और इनकी maximum values limited होती है 1000 pF तक ही.

Polystyrene Film Capacitor: Polystyrene capacitors बहुत ही cheap form होते हैं capacitor के लेकिन close tolerance capacitor offer करते हैं जब उनकी जरुरत पड़े तब. ये tubular shape के होते हैं जहाँ पर dielectric को दोनों plates के बीच sandwich का roll किया जाता है, लेकिन इससे उनमें inductance की frequency response को limit करने की क्षमता आ जाती है few hundred kHz तक. ये केवल ही available होते हैं leaded electronics components के तोर से.

Polyester Film Capacitor: Polyester film capacitors को वहां इस्तमाल किया जाता है जहाँ की cost को बहुत ज्यादा ध्यान जाता है क्यूंकि ये बहुत ज्यादा high tolerance offer नहीं करते हैं. बहुत से polyester film capacitors की tolerance value 5% या 10% होती है, जो की बहुत ही adequate होती है ज्यादातर applications के लिए. ये केवल ही available होते हैं leaded electronics components के तोर से.

Glass capacitors: जैसे की नाम से पता चलता है की इस capacitor में dielectric के तोर से glass का इस्तमाल होता है. वैसे ये बहुत ही expensive होता है, लेकिन फिर भी ये capacitors बहुत ही high levels की performance in terms of extremely low loss offer करती हैं. High RF current capability, no piezo-electric noise और दुसरे features इन्हें ideal बनाते हैं बहुत से performance RF applications के लिए.

Supercap: इसे supercapacitor या ultracapacitor भी कहा जाता है, क्यूंकि ये capacitors की बहुत ज्यादा बड़ी capacitance value होती है, जो की करीब several thousand Farads तक हो सकती है. इनका इस्तमाल memory hold-up supply और automotive applications में ज्यादातर इस्तमाल किया जाता है.

Capacitance क्या है और इसे कैसे बढाये

एक capacitor कितनी amount की electrical energy को store कर सकती हैं उसे capacitance कहा जाता है. Capacitor का capacitance एक पानी के बाल्टी के तरह होता है, मतलब की जितनी बड़ी बाल्टी उतनी ही ज्यादा उसमें पानी रह सकती है ठीक उसी तरह जितनी बड़ी capacitor उतनी ज्यादा charge उसमें रह सकता है.

Capacitor की Capacitance को बढ़ाने के मुख्य रूप से तीन उपाय हैं

Surface Area – Surface area को A लिखा जाता है, इसका मतलब की दो conductive plates जो की capacitor को बनाते हैं, तब इसमें जितनी ज्यादा बड़ी area होगी उतनी ही ज्यादा बड़ी capacitance भी होगी.

Distance – Distance को d लिखा जाता है, इसका मतलब की दो conductive plates के बिच जितनी छोटी distance होगी उतनी बड़ी capacitance भी होगी.

Dielectric Material – इन दो plates के बीच का material जो की दोनों plates को separate करता है, जिसे की Dielectric भी कहा जाता है, तो इस dielectric की जितनी ज्यादा permittivity होगी तब उतनी ही ज्यादा उसकी capacitance भी होगी.

Capacitance को कैसे measure किया जाता है ?

Capacitor की size को measured किया जाता है units called farads (F) में, जिसे की English electrical pioneer Michael Faraday (1791–1867) के नाम के ऊपर रखा गया है. One farad बहुत ही ज्यादा amount की capacitance होती है, इसलिए ज्यादातर capacitors में केवल कुछ fractions of a farad ही इस्तमाल होता है typically microfarads (millionths of a farad, written μF), nanofarads (thousand-millionths of a farad written nF), और picofarads (million millionths of a farad, written pF).

Standard Units of Capacitance

  • Microfarad (μF) 1μF = 1/1,000,000 = 0.000001 = 10-6 F
  • Nanofarad (nF) 1nF = 1/1,000,000,000 = 0.000000001 = 10-9 F
  • Picofarad (pF) 1pF = 1/1,000,000,000,000 = 0.000000000001 = 10-12 F

कैपेसिटर क्या काम करता है

क्या आपको पता है केपॅसिटर का क्या कम होता है? Capacitors को हम बहुत से कार्यों में इस्तमाल कर सकते हैं. चलिए उनके विषय में थोड़ी जानकारी प्राप्त करते हैं.

1.  Capacitors का इस्तमाल charge को store करने के लिए होता है इसलिए इसे camera में flash के तोर से इस्तमाल किया जाता है. साथ में Big lasers भी इसी technique का इस्तमाल करते हैं बहुत ही bright और instantaneous flashes के लिए.

2.  Capacitors का इस्तमाल ripples को हटाने के लिए किया जाता है. अगर एक line जिसमें की DC voltage जा रहा हो और उसमें ripples या spikes हो तब एक बड़े capacitor का इस्तमाल कर इन peaks को आसानी से हटाया जा सकता है.

3.  Capacitor DC voltage को block कर सकते हैं. इसलिए अगर आप एक छोटे capacitor को एक battery में लगा दो तब, इसमें कोई भी current flow नहीं होगी battery के दोनों poles के बीच एक बार वो capacitor charge हो जाये तब.

Conclusion

मुझे आशा है की मैंने आप लोगों को Capacitor क्या होता है? के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को कैपेसिटर क्या है (What is Capacitor in Hindi) के बारे में समझ आ गया होगा. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं. आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा. यदि आपको मेरी यह post अच्छा लगा हो या इससे आपको कुछ सिखने को मिला हो तब अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

5 COMMENTS

  1. Capacitor stores the energy in one half cycle and delivers that energy in another half cycle so in complete cycle, when exited by an ac source is zero .
    Please explain me.

  2. यह बहुत ही रोचकदार जानकारी है। इससे पहले हम कभी capactior के बारे में नही सुना था । so, आज आपने पूरी guide करके बता दिया । इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.