Transformer क्या है और इसका कार्य सिद्धांत

जब से विद्युत की उत्पत्ति हुई है, तब से लोगों ने इसका पूरा इस्तमाल करना प्रारंम्भ कर दिया है. और करें भी क्यूँ न Electricity के फायेदे जो इतने सारे हैं. विद्युत निकलने से लेकर उसे फ़ैलाने की प्रक्रिया में Transformer की एक अलग ही भूमिका होती है. शायद आप में बहत लोग ये जानते हों की ट्रांसफार्मर क्या है?

हम पाने आस पड़ोस में बहुत से प्रकार के Transformer देखते हैं. कुछ के आकार छोटे होते हैं तब कुछ के आकार बहुत ही बड़े होते हैं. इन्हें इनकी जरुरत के हिसाब से इस्तमाल किया जाता है. हम में से ऐसे बहुत से लोग है जिन्होंने की ट्रांसफार्मर देखा तो है लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता है की ये किस कार्य में लगते हैं.

ट्रांसफार्मर की संरचना दिखने में भले ही एक दैत्य जैसा machine हैं लेकिन इसकी उपयोगिता के विषय में जानकर शायद आप भी अचंभित हो जाएँ. यदि आपको सच में इन मचिनों के विषय में कुछ भी नहीं पता तब आज का यह article Transformer क्या होते हैं और काम कैसे करते हैं जरुर ही आपके लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है.

इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को ट्रांसफार्मर की परिभाषा के साथ साथ उसी उपयोगिता के सन्दर्भ में पूर्ण जानकारी प्रदान की जाये जिससे आपको इसे सही तरीके से समझने में आसानी होगी. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

अनुक्रम

ट्रांसफार्मर क्या है (What is Transformer in Hindi)

Transformer Kya Hai Hindi

Transformer एक ऐसा device होता है जो की electrical energy को transfer करता हैं एक circuit से दुसरे में वो भी एक magnetic field के माध्यम से और बिना कोई बदलाव के frequency में.

इसमें जो electrical circuit Source की electrical power को receive करता है उसे primary winding कहते हैं और दूसरी circuit जो electric energy deliver करती है load को उसे secondary winding कहा जाता है.

ट्रांसफार्मर का आविष्कार किसने किया

इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर का आविष्कार विलियम स्टेनले ने 1885 में संयुक्त राज्य अमेरिका में किया था. यह जानकारी विकिपीडिया पे है. और यह भी कहा जाता है के ट्रांसफार्मर का आविष्कार माइकल फैराडे ने 1831 में ब्रिटेन में किया था.

ट्रांसफार्मर की परिभाषा

यदि हम Transformer की परिभाषा की ऊपर गौर करें तब पाएंगे की, ये एक ऐसी device होती है जो की या तो Voltage को step-up करती है या फिर step-down, वो भी current के corresponding decrease और increase के हिसाब से.

Transformer असल में एक electromagnetic energy conversion device होती है, जिसमें की जो energy receive किया जाता है primary winding में उसे पहले convert किया जाता है magnetic energy में और फिर उसे दुबारा reconvert किया जाता है electric energy में secondary winding पर.

ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

यदि हम ट्रांसफार्मर की बात करें तब ये जिस principle के आधार पर कार्य करता है उसे Faraday’s Law of Electromagnetic Induction कहा जाता है.

इस Principle के हिसाब से “ Voltage की magnitude directly proportional होती है rate of change of flux के.”

ट्रांसफार्मर की संरचना

अब चलिए Transformer के Parts के बारे में जानते हैं.

वैसे तो ट्रांसफार्मर के कई parts होते हैं लेकिन उनमें से सबसे प्रमुख होते हैं तीन parts,

  • Transformer की Primary Winding
  • Transformer की Magnetic Core
  • Transformer की Secondary Winding

Primary Winding

ये Primary Winding ही है जो की magnetic flux उत्पन्न करती है जब उसे किसी electric source के साथ connect किया जाता है तब.

Magnetic Core

इस primary winding में उत्पन्न हुई magnetic flux को pass किया जाता है low reluctance path से जो की linked होती है secondary winding से और ये एक closed magnetic circuit create करती है.

Secondary Winding

Primary Winding में जो flux उत्पन्न हुई होती है उसे core के माध्यम से pass किया जाता है जो की secondary winding के साथ link हुआ होता है. ये winding भी वही समान core में लिपटी हुई होती है और ये जरुरत की output पैदा भी करती है Transformer की.

Note ये समझना जरुरी है की transformers electrical power generate नहीं करते हैं; ये transfer करते हैं electrical power को एक AC circuit से दुसरे में वो भी magnetic coupling के इस्तमाल से.

Transformer का core इस्तमाल होता है एक controlled path प्रदान करने के लिए magnetic flux को जो की generate होता है transformer में उस current के द्वारा जो की windings में flow हो रही होती है, जिन्हें की coils भी कहा जाता है.

ट्रांसफार्मर के भाग

Transformer Ke Bhag

एक Basic Transformer का चार primary parts होता है. जो की होते हैं Input Connection, Output Connection, Windings या Coils और Core.

Input Connections

Transformer के input side को primary side भी कहा जाता है क्यूंकि main electrical power जिसे बदला जाता है वो इसी point से जुड़ा हुआ होता है.

Output Connections

Transformer का output side या secondary side वो हिस्सा होता है जहाँ की electrical power को भेजा जाता है load को. Load के जरुरत के हिसाब से, incoming electric power को या तो बढाया जाता है या फिर घटाया जाता है.

Winding

Transformers की दो windings होती है, एक है primary winding और दूसरी होती है secondary winding.
Primary winding वो coil होती है जो की Source से power draw करती है.

वहीँ secondary winding वो coil होती है जो की energy deliver करती है transformed या changed voltage में load को. अक्सर इन दोनों coils को subdivide किया जाता है बहुत से coils में जिससे की flux के creation को कम किया जा सके.

Core

Transformer core का इस्तमाल एक controlled path प्रदान करने के लिए होता है magnetic flux को जो की generate हुआ होता है transformer में.

ये core generally कोई एक solid bar of steel नहीं होता है, बल्कि एक एक समूह होता है बहुत से पतले laminated steel sheets या layers की. इसे ऐसा इसलिए बनाया गया होता है क्यूंकि इससे heating को कम या पूरी तरह से eliminate किया जा सके.

Transformers में generally नीचे बताये गए दो cores में से एक का इस्तमाल होता है :

Core Type और Shell Type

ये दोनों ही प्रकार एक दुसरे से अलग कुछ इसप्रकार से होते हैं की जैसे इनके primary और secondary coils को किसप्रकार से लिपटाया गया है steel core के चारों और.

Core type – इस type में, windings को surround किया गया होता है laminated core से.

Shell type – इस type में, windings surround होता है laminated core से.

ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत

transformer ka karya siddhant hindi

ट्रांसफार्मर की working principle बहुत ही सरल होती है. इसमें Mutual induction का इस्तमाल होता है two या उससे ज्यादा windings (जिन्हें की coils भी कहा जाता है) के बीच में जो की allow करता है electrical energy को इन circuits के बीच transfer होने के लिए.

इस principle को आगे बढ़िया ढंग से समझाया गया है. चलिए उसे पढ़ते हैं.

मान लीजिये की आपके पास एक winding है (जिसे की coil भी कहा जाता है) और इसे supply किया गया एक alternating electrical source. अब ये alternating current जो की flow हो रही है इस winding से ये उत्पन्न करती है एक continually changing और alternating flux जो winding को surround करती है.

अब अगर एक दूसरा winding को पास लाया जाये इस winding के निकट, तब alternation flux की कुछ portion link हो जाएगी second winding के साथ. चूँकि ये flux continually change हो रही है इसके amplitude और direction में, इसलिए एक changing flux linkage जुड़ा होता है second winding या coil.

Faraday Law of Electromagnetic Induction के हिसाब से एक EMF पैदा होती है Secondary Winding में. वहीँ अगर secondary winding की circuit बंद हो तब उसमें current flow होती है. यही है basic principle ट्रांसफार्मर की working की.

इसमें समझने वाली बात यह है की जिस winding में source से electric power को receive किया जाता है उसे primary winding कहा जाता है. वहीँ जिस winding से आपको desired output voltage प्राप्त होता है mutual induction के कारण से उसे ‘secondary winding’ कहा जाता है.

Step-Up ट्रांसफार्मर क्या होते हैं?

ऐसा transformer जो की voltage को बढाता है primary से secondary windings के बीच में उसे एक step-up transformer कहा जाता है.

Step-Down ट्रांसफार्मर क्या होते हैं?

वहीं एक ऐसा transformer जो की voltage को घटाता है primary से secondary windings के बीच में उसे step-down transformer कहा जाता है.

ट्रांसफार्मर को Static Device क्यूँ कहा जाता है?

Transformer में electric energy को एक circuit से दुसरे में transfer करने के लिए कोई भी moving part की आवश्यकता नहीं होती है. यही कारण है की इन्हें एक Static Device कहा जाता है.

चूँकि इसमें कोई भी moving part नहीं होती है, इसलिए इसकी सबसे ज्यादा possible efficiency होती है बाकि electrical machines की तुलना में. Efficiency की बात करें तब transformer की करीब 99% तक efficiency होती है.

ट्रांसफार्मर की जरुरत कहाँ पर होती है?

Transformer एक बहुत ही बड़ा और महत्वपूर्ण role अदा करता है पुरे power system में. वो चाहे तो power generation, transmission या distribution हो, सभी जगहों में transformer की जरुरत होती है.

वहीँ AC system आज इतने ज्यादा popular इसलिए है क्यूंकि इसमें transformer का इस्तमाल किया जाता है. चलिए अब transformer की importance और necessity के बारे में जानते हैं.

Electric power generate होता है alternator के द्वारा 11 kV या 16.5 kV या 21.5 kV में. फिर इसी power को आगे transmit किया जाने वाला होता है load center तक. अब इस power को transmit करने के लिए, इसे stepped up किया जाता है higher voltage level जिससे की transmission losses को कम किया जा सके.

मान लीजिये की power generate होता है 16.5 kV में और उसे transmit किया जाना है 220 kV Grid में. इस काम के लिए, 16.5 kV / 220 kV Step-up Transformer का इस्तमाल किया जाता है.

अब वहीँ load center में, इस voltage को stepped down किया जाता है 33 kV को, इसके लिए 220 / 33 kV Step-down transformer का इस्तमाल किया जाता है. उसके बाद 33 kV / 11 kV और आखिर में 11 kV / 415 V step-down transformer का इस्तमाल होता है electric power distribution के लिए हमारे घरों में.

वहीँ इसके साथ, इन्हें ज्यादातर इस्तमाल electronic circuits में isolation transformer के तोर पर किया जाता है. इसलिए transformers को अलग अलग sizes में built किया गया होता है.

ट्रांसफार्मर बनाने की विधि

इनमें ज्यादातर इस्तमाल होने वाले चीज़ों को नीचे लिखा गया है.

1. Magnetic circuit (इसके अंतर्गत आते हैं core, limbs, yoke और damping structure).

2. Electrical circuit (इसके अंतर्गत आते हैं primary और secondary windings)

3. Dielectric circuit (इसके अंतर्गत आते हैं insulations जो की अलग अलग forms में होते हैं और इन्हें अलग अलग स्थानों में इस्तमाल किया जाता है)

4. Tanks और accessories (conservator, breather, bushings, cooling tubes, इत्यादि)

ट्रांसफार्मर का कार्य

चलिए अब ट्रांसफार्मर के महत्वपूर्ण functions के विषय में जानते हैं :-

1. इनका इस्तमाल voltage level को increase या decrease करने के लिए इस्तमाल होता है एक circuit से दुसरे circuit में. जहाँ voltage level को बढ़ाने के लिए step-up transformer का इस्तमाल किया जाता है वहीँ voltage level को घटाने के लिए step-down transformer का इस्तमाल होता है.

2. Transformer का इस्तमाल source और load impedance को match करने के लिए भी होता है जिससे की maximum power transfer achieve किया जा सके.

3. Transformer का इस्तमाल एक circuit को दुसरे से isolate करने के लिए भी किया जाता है. इन transformers को isolation transformer कहा जाता है. इन isolation transformer में, primary और secondary winding की number of turns समान होती है. जिससे इसमें voltage level में कोई भी बदलाव नहीं आते हैं इन दोनों electric circuits में.

जिससे की voltage level दोनों circuits की नहीं बदलते हैं लेकिन ये दोनों circuits को electrically isolate जरुर करते हैं.

ट्रांसफार्मर की Rating क्या होती है

Transformer manufacturer अक्सर एक nameplate fix किये हुए होते हैं transformer के ऊपर, जिसके ऊपर की rated output, frequency, voltage इत्यादि mentioned होते हैं.

एक typical nameplate में ये rating लिखे हुए होते हैं single phase transformer में :

Rated Output: 20 kVA
Rated Voltage: 3300 / 220 V
Frequency: 50 Hz

यहाँ पर rated voltage 3300 / 220 V का मतलब है की, ये transformer की step-up voltage करीब 220 V से 3300 V तक जा सकती है या step-down voltage हो सकती है 3300 V से लेकर 220 V तक, वो भी constant frequency में 50 Hz की.

Note यहाँ ध्यान देने वाली बात ये हैं की rated output लिखी हुई होती है apparent power (kVA) के terms में न की kW (Active Power) में.

ट्रांसफार्मर के प्रकार

वैसे देखा जाये तो Transformer के बहुत से प्रकार होते हैं. इन transformers को बहुत से electrical power system में इस्तमाल किया जाता है अलग अलग कार्य करने के लिए, जैसे की power generation, distribution, transmission और utilization करना electrical power की.

इन transformers को classify किया जाता है voltage levels, Core medium used, winding arrangements, इस्तमाल और installation place, इत्यादि के आधार में.

आगे हम discuss करने वाले हैं अलग अलग प्रकार की transformers जैसे की step up और step down Transformer, Distribution Transformer, Potential Transformer, Power Transformer, 1-ϕ और 3-ϕ transformer, Autotransformer, इत्यादि.

Voltage Levels के आधार पर

ये transformer को सबसे ज्यादा commonly इस्तमाल किया जाता है प्राय सभी प्रकार के applications में. Primary से Secondary Windings के voltage ration के आधार पर, transformers को classify किया जाता है step-up और step-down transformers में.

Step-Up Transformer

जैसे की नाम से ही पता चलता है की, इसमें secondary voltage को stepped up किया गया होता है एक ratio में primary voltage के compare में. इसे प्राप्त करने के लिए secondary windings की number of windings को बढाया गया होता है primary windings की तुलना में.

Power plant में, इस transformer का इस्तमाल generator के transformer को grid के साथ connect करने के लिए किया जाता है.

Step-Down Transformer

इसका इस्तमाल Voltage level को कम करने के लिए होता है. ख़ास इसलिए इन्हें step-down transformer कहा जाता है. इसमें winding turns ज्यादा primary side में होती है secondary side की तुलना में.

Distribution networks में, step-down transformer को commonly इस्तमाल किया जाता है high grid voltage को low voltage में convert करने के लिए और इसलिए इन्हें ज्यादातर home appliances में इस्तमाल किया जाता है.

Core Medium के आधार पर

Primary और Secondary Windings के बीच के medium के आधार पर इन्हें classify किया जाता है Air core और Iron core में.

Air Core Transformer

इसमें दोनों primary और secondary windings को लिपटा गया होता है एक non-magnetic strip में जहाँ की flux linkage, primary और secondary windings के बीच होती है air में.

Iron Core की तुलना में air core की mutual inductance कम होती है, i.e. जिसका मतलब है की reluctance जो offer होता है generated flux को वो high होता है air medium में. लेकिन hysteresis और eddy current losses पूरी तरह से eliminated होते हैं air-core type transformer में.

Iron Core Transformer

इसमें दोनों primary और secondary windings को लिपटा जाता है multiple iron plate bunch में जो की प्रदान करता है एक perfect linkage path पैदा हुए flux को.

वहीँ ये कम reluctance भी offer करती है linkage flux को conductive और magnetic property के कारण iron का. इन्हें बहुत ही ज्यादा इस्तमाल किया जाता है जिसमें की efficiency काफी high होती है air core type transformer की तुलना में.

Winding Arrangement के आधार पर

AutoTransformer

Standard transformers में primary और secondary windings को place किया जाता है दो अलग अलग directions में, लेकिन autotransformer windings में, primary और secondary windings दोनों ही connected होते हैं एक दुसरे के साथ series में.

एक single common coil जो की form करती है दोनों primary और secondary winding, इसमें voltage vary करता है उनके secondary tapping के position के हिसाब से coil windings के body के ऊपर.

Usage के आधार पर

जरुरत के हिसाब से उन्हें classify किया जाता है power transformer, distribution transformer, measuring transformer, और protection transformer में.

Power Transformer

ये power transformers बहुत ही बड़े होते हैं आकार में. ये सबसे ज्यादा उपयुक्त होते हैं high voltage (greater than 33KV) power transfer applications में.

इन्हें इस्तमाल किया जाता है power generation stations और Transmission substation में. इसमें high insulation level होता है.

Distribution Transformer

Power Generation Plants से उत्पन्न हुए power को distribute करने के लिए remote locations में, इन transformers का इस्तमाल होता है.

Basically, इनका इस्तमाल electrical energy को low voltage में (जो की करीब 33KV होता है) distribute करने के लिए होता है industrial purpose के लिए और 440v-220v में domestic purpose के लिए.

  • ये काम करता है बहुत ही कम efficiency में जो की करीब 50-70% होता है
  • Small size होती है
  • इन्हें install करना बड़ा आसान होता है
  • इसकी Low magnetic losses होती हैं
  • ये हमेशा fully loaded नहीं होते हैं

Measurement Transformer

इन transformer का इस्तमाल electrical quantity जैसे की voltage, current, power, इत्यादि को measure करने के लिए होता है. इन्हें classify किया जाता है potential transformers, current transformers में.

Protection Transformers

इस प्रकार का transformers इस्तमाल होता है component protection करने के लिए.

Measuring Transformer और Protection Transformer में जो मुख्य अंतर है वो है इसकी accuracy में. इसका मतलब की protection transformers ज्यादा accurate होने चाहिए measuring transformers की तुलना में.

Place of Use के आधार पर

इन transformer को classify किया जाता है indoor और outdoor transformers के हिसाब से.

Indoor transformers पूरी तरह से ढके हुए होते हैं proper roof जैसे की process industry में होता है.

वहीँ Outdoor transformers ज्यादा कुछ नहीं बल्कि distribution type transformers होते हैं.

Supply के आधार पर

Single phase

इन single-phase power supply की एक distinct wave cycle होती है. Single phase में single wire को circuit के साथ connect होना होता है. इस single phase का voltage होता है 230V,

Three phase

वहीँ three phase में तीन distinct wave cycles होते हैं. और 3-phase में 3-wires की जरुरत होती है. इन three phase की voltage होती है 415V.

Cooling के आधार पर

  • Air Natural (AN) या Self air cooled या dry type
  • Air ForceD (AF) or Air Blast type
  • Oil Natural Air Natural (ONAN)
  • Oil Natural Air Forced (ONAF)
  • Oil Forced Air Forced (OFAF)
  • Oil Natural Water Forced (ONWF)
  • Oil Forced Water Forced (OFWF)

Step-Up Transformer और Step-Down Transformer में क्या अंतर है?

अब चलिए Step-up और Step-down Transformer के बीच के कुछ महत्वपूर्ण अंतर के ऊपर गौर करते हैं जो की उनके application में नज़र आता है.

Sr No.Step-up TransformerStep-down Transformer
1)Step-up transformer का output voltage ज्यादा होता है source voltage की तुलना में.वहीँ Step-down transformer में output voltage कम होता है source voltage की तुलना में.
2)इसमें Transformer की LV winding primary और HV winding secondary होती है.वहीँ transformer की HV winding primary होती है और LV winding होती है secondary.
3)Step-up Transformer की secondary voltage ज्यादा होती है primary voltage की तुलना में.वहीँ Step-down Transformer में secondary voltage कम होती है primary voltage की तुलना में.
4)Primary Winding की number of turns कम होती है secondary winding की तुलना में.वहीँ इसमें number of turns primary winding की ज्यादा होती है secondary winding की तुलना में.
5)Transformer की Primary current ज्यादा होती है secondary current से.वहीँ इसमें Secondary current ज्यादा होती है primary current से.
6)Step-up transformer का इस्तमाल generally power transmission के लिए होता है. Generator Transformer जो की एक power plant में इस्तमाल होता है वो एक उदाहरण है Step-up Transformer की.Step-down Transformer का इस्तमाल power distribution के लिए होता है. Transformer जो की इस्तमाल होता है residential colony में वो एक बढ़िया उदाहरण है step-down transformer का.

आज आपने क्या सिखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख ट्रांसफार्मर क्या है (What is Transformer in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

यदि आपको यह post ट्रांसफार्मर क्या होता है हिंदी में पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

9 COMMENTS

  1. बहुत ही बढ़िया जानकारी दी है बहुत ही अच्छा काम कर रहे हो.

  2. Hello Sir Aapne Jo First Page Pr LOAD MORE Ka option Rakha He Vo Bohat Jayda Niche Jaata Hu To Lag Karta He Mobile Me Plzzz Sir Pehle Jaisa Numbers Hi Rakhie Taki Hum Sabhi AAPKI Puranu Posts Bhi Padh Sake Please Sir |

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