Electrical Network क्या है और इसके प्रकार

Electricity के विषय में तो हम सभी कुछ न कुछ जानते ही है लेकिन क्या आप जानते हैं की ये Electrical Network क्या है? इन Electrical Network के प्रकार क्या है? शायद हम में ऐसे बहुत होंगे जिन्हें इन सब के विषय में पहले ही कुछ जानकारी जरुर होगी. ये बहुत ही खुशी वाली बात है लेकिन साथ में हमारे ऐसे भी बहुत readers हैं जिन्हें शायद इन electrical terms के विषय में ज्यादा जानकारी न हो. वैसे मैं आपको बता दूँ की Electric current एक बहुत ही basic concept होती है जो की electrical और electronic science को ठीक से समझने के लिए. आप कह सकते हैं electric current core होती है science of electricity की.

चाहे वो electrical heater, की कोई बड़ी electrical grid system, mobile phone, computer, remote sensor, TV या कोई भी home appliances हों सभी में Electric Current की concept हमेशा ही central होती है उनके operation के नज़रिए से. हाँ ये बात तो सही है की current को हम हवा के ही तरह देख नहीं सकते हैं लेकिन इसके प्रवाह को हम मेह्शूश जरुर कर सकते हैं. वैसे ही यह भी एक network का जाल होता है जिसमें सभी components चाहे वो resistors हो, या capacitors हो या inductors ये सभी एक दुसरे के साथ जुड़े हुए होते हैं. इसलिए आप मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को Electrical Network क्या होता है, इसके types क्या होते हैं जैसे कुछ जानकारी प्रदान की जाये. इससे आपके मन में स्तिथ सभी सवालों के जवाब आपको aricle के ख़त्म होने तक जरुर मिल जायेंगे. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं Electrical Network क्या हैं हिंदी में.

Electrical Network क्या है

Electrical Network Kya Hai Hindi

Electrical Components के interconnection को जिसमें की resistors, inductors, semiconductors devices, transformers और sources of e.m.f. शामिल हैं उसे एक Electric network कहा जाता है. इस network में एक closed loop होता है, जो की current के लिए एक return path प्रदान करता है. एक network में एक या एक से ज्यादा circuit elements स्तिथ होते हैं. साथ ही इसमें दो या उससे ज्यादा terminals होते हैं दुसरे circuits के साथ connection बनाने के लिए.

Network के Types क्या है

मुख्य रूप से Network के दो Types होते हैं

1.  One port network.
2.  Two port network.

One Port Network क्या है

वो network जिसमें की एक ही pair की terminal होती है उसे one port network कहा जाता है. ये circuit analysis की complexity को कम करने में मदद प्रदान करता है. बहुत से common electronic devices और circuit blocks जैसे की transistors, amplifiers, electronic filters, और transformers को analyze उनके terms of ports के हिसाब से किया जाता है.

Examples: Resistors और Capacitors की Series, parallel combination, one port network होते हैं.

Two Port Network क्या है

वहीँ जिन network में दो pairs के terminal हैं उन्हें two-port network कहा जाता है.

Examples: Amplifier, attenuator, filter, transformer ये सभी two-port network होते हैं.

विद्युत् परिपथ में विद्युत धारा कैसे मापा जाता है?

Electric current को measure किया जाता है amperes में, लेकिन actually ज्यादातर electronics work में, current को milliamps, या mA में measure किया जाता है. अगर आपको current मापना है, तब आपको Ammeter के दोनों leads को connect करना होगा circuit में जिससे की current flows हो सके ammeter के माध्यम से. इसे दुसरे शब्दों में कहें तो ammeter को circuit का एक हिस्सा बनाना होगा.

Ammeter को Circuit में insert करने के बाद ही current को मापा जा सकता है. इसमें ये फर्क नहीं पड़ता है की आप Ammeter को कहाँ पर insert करें क्यूंकि सभी जगहों पर उसकी reading समान ही होगी.

कैसे Current को measure करें एक digital multimeter के मदद से?

Current को measure करने के लिए digital multimeter से आपको कुछ simple steps follow करने होंगे :

1.  सबसे पहले Meter को Turn On करना होगा.

2.  फिर आपको probes को सही connection में Insert करना होगा – बहुत से meters में अलग अलग connections होते हैं Probes के. अक्सर एक labelled common में black probe को normally place किया जाता है. वहीँ दूसरा probe को सही socket में enter करना जरुरी होता है सही measurement प्राप्त करने के लिए.

3.  इसके बाद main selector switch on करें meter में और साथ में उसे correct measurement type में switch करें, (i.e. current) और range करें measurement के लिए. जब आप range select कर रहे हों, इस बात का ख्याल रखें की हमेशा maximum range expected reading से ऊपर होनी चाहिए. क्यूंकि DMM की range बाद में जरुरत के अनुसार कम की जा सकती है. वहीँ अगर range को बहुत ज्यादा कर दिया गया हो तब इससे meter कभी भी overload नहीं होगा.

4.  जब आप Current measure करें, तब हमेशा range को optimize करें best reading प्राप्त करने के लिए. अगर संभव हो तब enable करें सभी leading digits को zero read न करने के लिए, और इस तरह greatest number of significant digits को read किया जा सकता है.

5.  एक बार आपके reading complete हो जाये तब, सबसे अच्छा होगा अगर आप probes को voltage measurement sockets में place कर दें और range को सेट कर दें maximum voltage में. इससे अगर meter कहीं accidentally connected हो जाता है बिना किसी range के इस्तमाल के, तब इससे meter को damage होने के कम chances होते हैं.

किसी परिपथ में विद्युत प्रवाह किसके द्वारा संभव है?

Current की जो basic concept होती है उसके अनुसार substance में movement of electrons को ही current कहा जाता है. Electrons उन minute particles को समझा जाता है जो की materials के molecular structure में पाए जाते हैं. कभी कभी ये electrons बड़े ही tightly जकड़े गए होते हैं molecules में और कुछ समय वो loosely जकड़े गए होते हैं जिससे वो आसानी से structure के भीतर freely move कर सकें.

एक महत्वपूर्ण बात यह है की ये electrons charged particles होते हैं – जो की negative charge होते हैं. अगर वो move कर रहे हों तब उनके साथ कुछ amount की charge भी move कर रही होती है जिसे की current कहा जाता है. इससे एक और बात भी सामने आती है जो ये की जितनी भी electron substance के भीतर move करती है उससे ये पता चलता है वो substance कितनी electricity conduct करती है. कुछ materials current को दूसरों से ज्यादा बेहतर move करने के लिए मदद प्रदान करते हैं.

वैसे अक्सर देखा गया है की ये free electrons का motion बहुत haphazard होता है – जिसमें की कुछ electrons एक direction में move करते हैं तो कुछ दुसरे direction में जिसके चलते charge की कोई भी overall movement नहीं होती है. वहीँ अगर एक force उन electorns में act करता है तब इससे सभी electrons एक ही direction में drift होने के लिए बाध्य होते हैं. ये force जो की electrons पर act करती है उसे electromotive force, या EMF कहा जाता है, और इसकी quantity होती है voltage measured in volts.

Conventional current और electron flow क्या है?

इन दोनों conventional current flow और electron flow को लेकर लोगों में बहुत confusion होता है. भले ही ये starting में थोडा confusing हो लेकिन ये बहुत straightforward होते हैं.

वो particles जो की charge carry करते हैं along conductors अक्सर free electrons होते हैं. किसी circuit में electric field direction उस direction को कहा जाता है जिस direction में positive test charges को push किया जाये. इसलिए negatively charged electrons हमेशा electric field के उलटे direction में flow होती है.

  • Conventional current flow: Conventional current flow होती है positive terminal से negative terminal की तरफ और ये indicate करती है उस direction को जिसमें positive charges flow करती है.
  • Electron flow: वहीँ electron flow होती है negative से positive terminal के और. इसमें Electrons negatively charged होते हैं इसलिए वो ज्यादा positive terminal के तरफ attract होते हैं क्यूंकि unlike charges attract करती हैं.

Electrical Network के Electrical laws क्या है

सभी Electrical Networks में बहुत से electrical laws apply होते हैं जो की सभी electrical networks में लागु होते हैं :

1.  Kirchhoff’s current law: इसमें सभी currents जो की node में enter हो रहे हों उनको अगर जोड़ दिया जाये तब वो समान होता है सभी currents के समाहार के साथ जो की node से निकल रहे हों.

2.  Kirchhoff’s voltage law: एक closed loop के चारों तरफ के electrical potential difference के directed sum को अगर हिसाब किया जाये तब उसका value हमेशा शुन्य होता है. of

3.  Ohm’s law: एक resistor के across का voltage हमेशा समान होता है resistance और current जो की उनके माध्यम से बह रही हो के product के साथ.

4.  Norton’s theorem: किसी भी network of voltage या current sources और resistors हमेशा electrically equivalent होते हैं एक ideal current source के साथ जो की parallel होते हैं एक single resistor के साथ.

5.  Thévenin’s theorem: किसी भी network of voltage या current sources और resistors हमेशा electrically equivalent होते हैं एक single voltage source के साथ जो की series होते हैं एक single resistor के साथ.

6.  Superposition theorem: एक linear network में जिसमें की several independent sources होते हैं, उसमें एक particular branch में response जब सभी sources simultaneously act कर रहे हों, तब वो समान होता है individual responses के linear sum के साथ जिन्हें की calculate किया जाता है एक independent source एक समय में लेकर.

दुसरे ज्यादा complex laws की जरूरत तब होती है जब network में nonlinear या reactive components स्तिथ होते हैं. वहीँ Non-linear self-regenerative heterodyning systems को approximate किया जाता है. यदि कोई इन laws को apply करता है किसी simultaneous equations के set में तब उसे या तो algebraically solve किया जाता है या numerically.

Conclusion

मुझे आशा है की मैंने आप लोगों को Electrical Network क्या है? के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को Electrical Network के प्रकार के बारे में समझ आ गया होगा. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं. आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा. यदि आपको मेरी यह post Electrical Network क्या होता है इन हिंदी अच्छा लगा हो या इससे आपको कुछ सिखने को मिला हो तब अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

4 COMMENTS

  1. बहुत ही Uniqe और Best लेख को आपने Share किये हैं । इस पोस्ट से हमे electric network क्या है ? इसके पूरी जानकारी को step by step बताया है। so, Very-Very Thanks इस ज्ञानवर्द्धक लेख के लिए।

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