चन्द्रयान 2 के बारे में जानकारी – भारतीय चन्द्रयान अभियान सफल हुआ?

भारतीय चन्द्रयान अभियान: एक समय था जब भारत दुसरे देशों पर निर्भर करता था अपने किसी भी अंतरिक्ष सम्बंधित mission के लिए. वहीँ अब समय बदल गया है Mission Mangal की सफलता के बाद से हमारे वैज्ञानिकों में नयी उर्जा भर गयी है. अब हमारे वैज्ञानिक स्वदेशी ज्ञान कौशल का इस्तमाल कर ऐसे कारनामें कर रहे हैं की कई विकसित देश भी इसे देखकर अचंभित हो जा रहे हैं.

एक ऐसा ही mission है Chandrayaan 2. भारत का यह दूसरा चंद्रयान मिशन चन्द्रयान २ को कुछ महीनों पहले ही भारत के श्रीहरिकोटा ने launch किया गया था. वहीँ अब ये सफलता पूर्वक वहां पर पहुँच भी चूका. लेकिन इसके साथ ही इसका lander ठीक से काम न करने के वजह से ये successfully land नहीं हो पाया.

फिर भी बाकि सभी चीज़ें अभी तक भी ठीक से काम कर रही है और लगातार हमारे ISRO के research center को data भेज रही हैं. चन्द्रयान २ मिशन से जुडी बहुत सी ऐसी बातें हैं जो की बहुत से लोगों को समझ में नहीं आयी है. ख़ास इसी कारण से मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को चन्द्रयान २ के बारे में सभी जानकारी प्रदान की जाये.

इस article को बड़े ही ध्यान से पढ़ें क्यूंकि हमने काफी research करी हैं और बहुत से अलग अलग sources से जानकारी इक्कठा कर आप तक पूरी एवं सठिक जानकारी पहुँचाने की कोशिश करी हैं. उम्मीद हैं की हमारी ये कोशिश आपको स[पसदं आये. वहीँ आप अपने मन में उठ रहे सवाल हमें निचे comments में पूछ सकते हैं, हमें खुशी होगी उनका जवाब देने में.

तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की चंद्रयान २ क्या हैं, ये Chandrayan 2 क्या होता है और हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण क्यूँ हैं?  चन्द्रयान २ फुल इनफार्मेशन यहाँ आपको पढने को मिलेगा.

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चन्द्रयान 2 क्या है (What is Chandrayaan 2 in Hindi)

Chandrayaan 2 Kya Hai Hindi
चन्द्रयान २ के बारे में

Chandrayaan-2 भारत का दूसरा lunar mission है. इस मिशन के द्वारा भारत चन्द्रमा के unchartered (न पता लगाया गया) south pole के इलाके में अपनी research करना चाहता है जहाँ पर आज तक कोई भी देश पहुँच नहीं पाया है.

लेकिन इस मिशन के दौरान lander Vikram ने अपनी पहली (primary) landing site को चुक गया और इसलिए उसे दुसरे site में उतरना पड़ा. वहीँ लैंडिंग करते वक़्त संपर्क टूट जाने के वजह से visuals का आना बंद हो गया.

ISRO के chief K Sivan के अनुसार, Vikram (विक्रम) Lander से communication होना टूट गया है वहीँ इसका कारण अभी भी वैज्ञानिक पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीँ साथ में data को analyse भी किया जा रहा है.

वहीँ अगर भारत इस mission में अगर पूरी तरह से सफल रहा तब ये दुनिया का चौथा ऐसा देश बन जायेगा जिसने ने सफलता पूर्वक चाँद में अपनी landing कर चुकी हैं. वहीँ इससे पहले USSR, US और China ऐसा करने में सफल रह चुके हैं. हालाँकि उन्हें भी बहुत से प्रयास लेगे ऐसा करने के लिए.

भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle, GSLV MkIII-M1 ने सफलतापूर्वक Chandrayaan-2 spacecraft को पृथ्वी के कक्षा में launch कर दिया था July 22 में.

Update भारत के लिए एक खुसखबरी की Chandrayaan-2 spacecraft ने successfully चन्द्रमा के कक्षा में enter कर चूका है August 20 में.

वहीँ August 22 में, Isro ने चन्द्रमा का पहला image release किया जो की Chandrayaan-2 द्वारा capture किया गया था.

Update वहीँ September 2 को, ‘Vikram’ ने सफलतापूर्वक Orbiter से खुदको अलग कर दिया है.

Chandrayan 2 की शुरुवात कब होने वाली थी?

अगर हम थोडा पीछे गौर करें तब हमें पता चलेगा की Chandryaan-2 को सन 2011 में launch किये जाने का तय किया गया था. जो की उस समय Russian-made lander और rover को लेकर चन्द्रमा में जाने वाला था.

लेकिन ठीक मिशन के पहले ही Russia ने अपने इस प्रक्रिया को मना कर दिया, जिसके फलस्वरुप ISRO को खुद ही अपना lander और rover विकसित करना पड़ा वो भी स्वदेशी ज्ञान कौशल के इस्तमाल से. जिसके लिए उन्हें करीब और 8 वर्ष लग गए इन्हें विकशित करने में.

Note भारत का पहला lunar probe था Chandrayaan-1 mission जिसे की October 2008 में लांच किया गया था. इस mission में एक lunar orbiter और एक impactor था लेकिन वहीँ इसमें कोई भी rover नहीं शामिल था जैसे की Chandrayaan-2 में है.

चंद्रयान 2 को कब और कहाँ से Launch किया गया?

चंद्रयान 2 को 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre SHAR: SDSC-SHAR) से चंद्रयान-2 अंतरिक्षयान को भूतुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle-GSLV) मार्क III से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया.

Note Chandranyan 2 को पहले July 15 को launch किया जाना था लेकिन कुछ तकनिकी खराबी के वजह से इसे post-pone कर दिया गया और 22 July 2019, 2.43 pm को इसे launch किया गया.

Chandrayaan-2 का पूरा वजन कितना है?

Chandrayan 2 का पूरा वजन करीब 3,850 kg (8,490 lb) है.

Chandrayaan-2 कैसे कार्य करेगी?

चलिए अब चन्द्रयान 2 की working को आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे. कैसे चंद्रयान 2 अपना कार्य करने वाला है चंद्रमा पर.

जैसे की rocket ऊपर अंतरिक्ष में पहुँच जायेगा, तब fairing की प्रक्रिया चालू होगी i.e. इसका मल्काब की rocket का उपरी भाग अलग हो जायेगा और इसके payload को release कर देगा.

वहीँ orbiter-lander module करीब पांच complex manoeuvres की एक series करेगी पृथ्वी के चारों तरफ जिससे की वो एक momentum build up करेगी और साथ में खुद को slingshot के जरिये चन्द्रमा के निकट लेने का कार्य करेगी.

जब ये duo चन्द्रमा के कक्षा के भीतर capture हो जायेंगे तब lander खुदको अलग कर देगी orbiter से जिससे की वो एक soft landing कर सके चन्द्रमा में और वहीँ वो rover को भी release कर देगी चन्द्रमा के सतह पर research करने के लिए.

वहीँ orbiter चन्द्रमा के चारों और घूमता ही रहेगा करीब एक वर्ष के लिए, वहीँ इस दौरान वो इसके सतह ही scanning और mapping करता रहेगा. और सभी data को भेजता रहेगा पृथ्वी पर.

Chandrayaan 2 करने का कारण क्या है?

ISRO (Indian Space Research Organisation) के अनुसार इस lunar mission चंद्रयान 2 में भारत वो पहला देश होगा जिसने की अपना यान चन्द्रमा के ऐसे इलाके पर भेजा है जहाँ की आज तक किसी ने नहीं भेजा है, जो की है चन्द्रमा का south polar region.

इस mission का मुख्य उद्देश्य है की चन्द्रमा के विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त की पाए, जिससे की ये न केवल भारत को बल्कि पूरी दुनिया को इससे फायेदा मिलने वाला है.

चन्द्रमा के South Pole को Explore करने का क्या कारण है?

चंद्रयान 1 से ये बात सामने आई थी की कुछ जगहों में पानी मिलने की संभानाएं हैं. वहीँ इस विषय पर और अधिक खोज की जरुरत है.

वहीँ चुकी ये जगह हमेशा अँधेरे में रह जाता है इसलिए यहाँ पर सतह पर या फिर सतह के नीचे पानी रहने के ज्यादा chances हैं.

ये lunar south pole काफी रोचक इसलिए भी है क्यूंकि यहाँ की ज्यादा area हमेशा shadow में रहते हैं north pole की तुलना में.

इसके साथ इन south pole region में ज्यादा craters हैं जो की cold traps होते हैं और इनमें fossil record मिलने के संभावनाएं है हमारे early Solar System की.

चंद्रयान 2 भेजने का मुख्य कारण क्या है?

वैसे तो चंद्रयान 2 भेजने के बहुत से कारण हैं, लेकिन चलिए कुछ मुख्य कारणों के ऊपर गौर करते हैं.

१. इसका सबसे मुख्य कारण है चन्द्रमा में पानी की खोज करना.

२. वहीँ चूँकि lunar South Pole के पास आज तक कोई भी गया नहीं है इसलिए यहाँ पर पानी के मिलने की ज्यादा संभावनाएं हैं.

३. वहीँ इसके साथ lunar topography, mineralogy, elemental abundance, और lunar exosphere की पढाई करने के लिए भी.

४. यहाँ पर ज्यादा craters मेह्जुद हैं जहाँ की हमें fossil मिलने की उम्मीदें हैं वहीँ ये early Solar System के विषय में जानकारी प्रदान कर सकता है..

५. Chandrayaan-2 में ऐसे यंत्र लगे हुए हैं जो की 3D mapping कर सकते हैं South Polar region की topography की और जिससे इसकी elemental composition और seismic activity के विषय में पता लगाया जा सकता है.

चन्द्रयान २ के बारे में – चंद्रयान 2 विकिपीडिया

OperatorIndian Space research Organisation (ISRO)
Type of MissionLunar orbiter Lander और Rover
Duration of MissionOrbiter: 1 year
Lander: >15 Days
Rover: >15 Days
Launch Massaprox. 3850 Kg
Mass of PayloadOrbiter: approx 2379 Kg
Lander: approx. 1471 Kg
Rover: approx. 27 Kg
RocketGSLV Mk III
Launch SiteSatish Dhawan Space Centre
Launch Date-22 July 2019

Chandrayaan 2 इतना ज्यादा स्पेशल क्यूँ है?

चंद्रयान 2 ऐसा पहला space mission है जो की चन्द्रमा के सतह पर soft landing करेगा वो भी south polar region में. वहीँ ये भारत की पहली Indian expedition की attempt जिसे की हमने अपने स्वदेशी ज्ञान कौशल से विकसित किया हुआ है.

ये मिशन भारत को चौथा ऐसा राष्ट्र बना देगा जो की चन्द्रमा के सतह में soft-land करने में सफल हुए हैं.

चंद्रयान aircraft के Components क्या क्या हैं?

इस चंद्रयान aircraft के मुख्य components के विषय में जानते हैं.

जहाँ Spacecraft का वजन करीब 3.8 tonne है, वहीँ इसके तीन modules हैं — Orbiter, Lander (Vikram) और Rover (Pragyan).

इसमें Orbiter और Lander modules को mechanically ही interfaced किया जायेगा और एक साथ stacked किया जायेगा एक integrated module के रूप में. वहीँ इसे रखा जायेगा GSLV Mk-III launch vehicle के भीतर ही. Rover को Lander के भीतर ही स्थपित किया जायेगा. वहीँ ये बाद में आगे अलग होने वाला है.

GSLV MK-III के द्वारा launch होने के बाद earth-bound orbit में, इसकी integrated module फिर moon orbit में पहुँच जाएगी जिसके लिए orbiter propulsion module का इस्तमाल किया जायेगा.

वहीँ फिर Lander अलग हो जायेगा Orbiter से और वो उसके बाद soft land करेगा पहले से निर्धारित site पर, जो की काफी निकट होने वाला है lunar South Pole से, ऐसा ISRO ने पहले ही बताया है.

Rover फिर बहुत से scientific experiments करेगा lunar surface पर, वहीँ instruments को mount किया जायेगा Lander और Orbiter पर सभी scientific experiments किये जाने के लिए.

ख़बरों के अनुसार जो scientific payloads स्तिथ होगा Orbiter, Lander और Rover पर वो बहुत से mineralogical और elemental studies करने वाला है चाँद के सतह पर.

Chandrayaan-2 के पुरे Payload को पूर्ण रूप से समझते हैं?

चलिए अब समझते हैं की चंद्रयान 2 के सभी हिस्से क्या हैं वहीँ इसके payload क्या काम करने वाले हैं और साथ ही कैसे काम करने वाले हैं.

1. Rover

चंद्रयान 2 में भेजा गया rover (रोवर) का नाम है Pragyan (प्रज्ञान). इसमें दो instruments होंगे इसके board पर.

चन्द्रमा के सतह पर ये instrument test करेगा mineral और chemical compositions को वो भी वहां की मिटटी और शिला खण्डों से. वहीँ south pole से वो जो भी चीज़ें उठाएगा उसे collect कर पृथ्वी पर भेजेगा.

भेजने की प्रक्रिया को समझें तब ये रोवर पहले सभी information को चन्द्रमा से Vikram Lander पर भेजेगा. फिर वो Lander सभी डाटा को Orbiter को भेजेगा. फिर Orbiter सभी चीज़ों को ISRO centre को भेजेगा.

ये पूरी प्रक्रिया को होने में करीब 15 minutes का समय लगेगा. इसलिए कहा जा सकता है की प्रज्ञान रोबोट से भेजा गया information भारत के ISRO centre में पहुँचने के लिए सिर्फ और सिर्फ 15 minutes ही लगेंगे.

2. Lander

चंद्रयान 2 में भेजा गया Lander का नाम है Vikram. ISRO ने इस Lander का नाम ISRO के संस्थापक और भारत के Space Program के पिता Vikram Sarabhai के नाम पर नामित किया है.

इस पांच पैर वाले lander में तीन instruments onboard होगा. जो की हैं Radio Anatomy of Moon-Bound Hypersensitive Ionosphere और एक Atmosphere Probe (Rambha) जो की measure करेगा lunar sub surface के density को और साथ में इसमें हो रहे बदलाव को भी.

वहीँ Chandra Surface Thermophysical Experiment (ChaSTE) के इस्तमाल से चन्द्रमा के south pole के चारों ऑर की thermal temperature को मापा जायेगा.

वहीँ तीसरा instrument है Lunar Seismic Activity (ILSA) जो की measure करेगा seismicity या quake या tremor-potential को उस इलाके की.

इसे करीं 15 दिनों के लिए scientifically इस्तमाल में लाया जायेगा. वहीँ इसकी initial design को ISRO’s Space Application Centre Ahmedabad के द्वारा बनाया गया है. वहीँ इसे बाद में develop किया गया है URSC Bengaluru के द्वारा. ISRO ने ये सभी चीज़ें स्वदेशी ज्ञान कौशल से बनाया है जब रूस ने हमें अपना lander और orbiter देने से मना कर दिया था.

3. Orbiter

चन्द्रयान 2 का Orbiter को स्थापित किया जायेगा चन्द्रमा सतह के करीब 100 km ऊपर. वहीँ इसमें आठ instruments onboard होंगे.

इन instruments की जानकारी को प्रदान नहीं किया गया है जो की rocket में load किये जायेंगे. लेकिन इसमें एक Imaging Infra-red Spectometer (IIRS) जरुर से होगा जो की हमारी मदद करेगा minerals और water molecules को ढूंडकर पहचानने में . वहीँ ये operate होगा solar power के द्वारा.

इसका मुख्य काम होगा सभी data को Lander और Rover से collect कर उसे ISRO Centre तक पहुँचाना. वहीँ ये ISRO द्वारा भेजी गयी commands को भी Lander और Rover तक पहुंचाएगी. इसे तैयार किया है Hindustan Aeronautics Limited ने और वहीँ इसे ISRO को प्रदान किया गया सन 2015 में.

‘Vikram’ और ‘Pragyan’ क्या हैं और कैसे काम करते हैं?

जैसे ही भारत ने soft landing करने की कोशिश करी चन्द्रमा के सतह पर September 7 को, सभी लोगों की निगाहें lander ‘Vikram’ और rover ‘Pragyan’ पर टिकी हुई थी.

यह 1,471-kg वाला ‘Vikram‘, को नामित किया गया है Vikram Sarabhai के ऊपर, जो की भारत के Indian space programme के जनक थे. इसे designed किया गया है चन्द्रमा के सतह पर soft landing करने के लिए, वहीँ ये करीब वहां पर 1 चन्द्र दिवस तक कार्य करेगा, 1 चन्द्र दिवस समान होता है 14 पृथ्वी दिवस के साथ.

Chandrayaan-2 की रोवर का नाम है “प्रज्ञान”. इसका वजन है करीब 27-kg. जिसका संस्कृत में मतलब है होता है ‘wisdom‘. इसे करीब 500 metres तक चलाया जा सकता है इसकी landing spot से. वहीँ ये solar energy का इस्तमाल करेगा function होने के लिए.

अगर ये successful होता, जो की नहीं हुआ तब Pragyaan Lander से अलग होकर अपना काम करने वाला था जिसमें ये चन्द्रमा के सतह से चीज़ें collect कर उनपर experiments करने वाला था.

चंद्रयान की परिभाषा

चन्द्रयान २ का चित्र

Chandrayaan, का परिभाषा होती है “moon vehicle” या Sanskrit में इसे चन्द्र पर जाने वाला यान. वहीँ इससे भारत की अंतरिक्ष को लेकर विचार धारा का पता चलता है.

जहाँ US, China और private corporations भी इसी race का हिस्सा है की वो कैसे चन्द्रमा से resources को mine कर सकें, या ये जान सकें की क्या सच में चन्द्रमा पर रहा जा सकता है.

चंद्रयान 2 सॉफ्ट लैंडिंग के किस instruments का इस्तमाल करेगा और कहाँ पर ये landing करने वाला है?

Chandrayaan 2 इस्तमाल करेगा Vikram lander और Pragyan rover का soft landing करने के लिए एक high plain में दो craters Manzinus C और Simpelius N के बीच में, जो की होगा एक latitude करीब 70° south पर स्तिथ होगा.

वहीँ दोनों Lander और Rover करीब एक महीने तक active रहने वाले हैं.

चंद्रयान 2 में किस launch vehicle का इस्तमाल किया जायेगा?

चंद्रयान 2 में GSLV Mk-III का इस्तमाल किया जायगा इसे इसकी निर्धारित कक्षा तक पहुँचाने के लिए.

यह three-stage vehicle भारत का सबसे powerful launcher है अभी के समय में, और ये बहुत ही सक्षम है करीब 4-ton class की satellites को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में launch करने में.

ISRO ने कितने scientific instruments का चुनाव किया है?

ISRO ने करीब आठ scientific instruments का चुनाव किया है Chandrayan 2 के लिए. जिसमें होगा 2 orbiter के लिए, 4 lander के लिए, और 2 rover के लिए.

चंद्रयान 2 की कुल कीमत कितनी हुई है?

Mission Chandrayaan-2 की कुल लगत करीब Rs 1000 crore है. वहीँ इसके अंतर्गत GSLV MK-III की लगत है करीब Rs 375 crore और बाकि की लगत Satellite की है.

चंद्रयान 2 कब चन्द्रमा पर land करेगी?

चंद्रयान 2 ने चाँद के सतह पर September 7 को लैंड कर चुकी है. वैसे ये landing पूरा successful नहीं हो पाया है.

भारत का Moon Mission (चंद्रयान 2) दूसरों से क्यूँ अलग है?

भारत से पहले केवल US, Russia और China ने ही चन्द्रमा पर soft landing करने में सक्षम हुए थे. वो भी काफी सारी कोशिशों के बाद ही.

वहीँ भारत का Chandrayaan 2 Mission का budget करीब 1/20th है जितना की USA की NASA ने अपने Moon Mission पर लगाया था. वहीँ Chandrayaan 2 mission दूसरों से अलग इसकी लागत से हैं जिसमें काफी कम cost, जो की करीब Rs. 1,000 crore पर पूर्ण हो गया है.

एक दूसरा पहलु ये भी है जो की Chandrayaan 2 Mission को औरों को अलग करती है, वो है की lander Vikram इस बार चंद्रमा की south pole के तरफ जायेगा – एक ऐसा इलाका जहाँ आज तक किसी भी देश का यान गया नहीं है.

क्यूंकि ये ज्यादा खतरनाक इलाका होता है landing करने के लिए. वहीँ बाकि देशों के यान northern hemisphere या equatorial region तक की गए हुए हैं.

चंद्रयान २ पर कितने लोग हैं?

चंद्रयान 2 एक मानवरहित मिशन है इसलिए इसमें कोई भी इन्सान नहीं गया है.

चंद्रयान 2 की स्पीड क्या है?

चंद्रयान 2 की स्पीड है 21,600 kmph. वहीँ soft landing के दौरान इसकी स्पीड को कम कर 7 kmph तक कर दिया गया था.

इसरो का मिशन चंद्रयान २ चांद पर कुल कितने दिन में पहुंचेगा?

मिशन चंद्रयान को चन्द्रमा के कक्षा में पहुँचने के लिए करीब 29 दिन लग गए थे. वहीँ ये August 20 2019 को वहां पर पहुंचा था.

वहीँ मिशन चंद्रयान ने लैंडिंग करीब चन्द्रमा के सतह पर 7 September 2019 में.

चंद्रयान २ का लाइव कास्ट देखना चाहता हूं?

चंद्रयान २ का live cast को देखने के लिए आपको बस YouTube पर चंद्रयान २ live search करना होगा. इससे आपको बहुत सारे Live Video देखने को मिल जायेंगे.

क्या चंद्रयान 2 में कोई व्यक्ति गया है?

नही चंद्रयान २ में कोई भी व्यक्ति नहीं गया है.

चंद्रयान 2 अभी हाल ही में लांच हुआ है इसमें कोन सा इंधन का प्रयोग किया गया?

चंद्रयान २ में निम्नलिखित fuels का उपयोग होता है.

UH25 (fuel) की filling liquid core stage (L110) में

N2O4 (fuel) की filling liquid core stage (L110) में

Liquid Oxygen (fuel) की filling Cryogenic Stage (C25) में

Liquid Hydrogen (fuel) की filling Cryogenic Stage (C25) में

क्या चंद्रयान 2 ने फोटो भेजी शुरू कर दी है?

जी हाँ चंद्रयान 2 ने फोटो भेजनी August 4 से ही शुरू कर दी थी.

चंद्रयान 2 का फ्यूल

चंद्रयान 2 का फ्यूल की जानकारी पहले ही प्रदान की जा चुकी है ऊपर में. वहीँ चंद्रयान 2 की fuel carrying capacity हैं करीब 100 kg के करीब.

भारत द्वारा चंद्रयान 2 को पूर्ण तरह से विफल माना जाएगा क्या?

नहीं बिलकुल भी नहीं भारत द्वारा चंद्रयान 2 के मिशन को पूर्ण रूप से विफल नहीं माना जायेगा. बल्कि ये करीब 95% सफल रहा है.

केवल lander vikram सही तरीके से soft landing करने में सक्षम नहीं रहा है. बाकि सभी चीज़ें ठीक चल रही है.

इस चंद्रयान 2 को बनाने में कितना समय लगा प्लीज बताएं?

चंद्रयान 2 को बनाने में करीब 10 वर्षों का समय लग गया है.

चंद्रयान-2 मिशन की मंजूरी किसने और कब दी?

12 Novemember 2007 में भारत और रूस ने मिलित रूप से चंद्रयान 2 पर काम करना प्रारंभ कर दिया था. लेकिन बाद में रूस ने भारत के साथ काम करना बंद कर दिया जिसकी वजह से भारत को खुद ही चंद्रयान 2 के ऊपर अकेले ही काम करना पड़ा.

इसमें स्वदेशी ज्ञान कौसल का उपयोग किया गया है.

क्या चंद्रयान 2 के द्वारा संपर्क जोड़ने की कोई आशंका है?

अभी के समय में Lander Vikram के साथ संपर्क जुड़ने की ज्यादा आशंका नहीं है. लेकिन Orbiter अब भी सही तरीके से काम कर रहा है.

कोई वैज्ञानिक चंद्रयान 2 के साथ गया है?

नहीं कोई भी वैज्ञानिक चंद्रयान 2 के साथ नहीं गया है.

क्या चंद्रयान 2 का संपर्क वापस जुड़ेगा?

नहीं चंद्रयान 2 के lander Vikram के साथ संपर्क जुड़ने का कोई भी उम्मीद अभी नहीं है.

चंद्रयान 2 का परिणाम

चंद्रयान 2 का परिणाम अभी नहीं आया है. इसे करीब 30 दिन लग जायेंगे सभी प्रकार का data पृथ्वी में ISRO Centre तक भेजने के लिए.

क्या चंद्रयान 2 लैंडओवर से अभी भी सिग्नल आ सकते है?

चंद्रयान 2 लैंडओवर से अभी सिग्नल आने की संभावनाएं काफी कम है.

चंद्रयान 2 का मॉडल किस वैज्ञानिक ने तैयार किया?

चंद्रयान 2 का model किसी एक वैज्ञानिक द्वारा नहीं बनाया गया है. इसे ISRO के अलग अलग शाखा में निर्मित किया गया है. वहीँ इसमें ISRO की मदद HAL और दुसरे Space Centers ने भी किया है.

चंद्रयान 2 मे कोन बैठकर गया है?

चंद्रयान 2 में कोई बैठकर नहीं गया है. यह एक मानवरहित mission है जिसे की पूर्ण रूप से computer और robots के द्वारा नियंत्रण किया जा रहा है.

चंद्रयान मिशन 2 कब लॉन्च किया?

चंद्रयान मिशन 2 को 22 July 2019 में लांच किया गया था.

चंद्रयान मिशन 2 कब Soft Landing किया?

चंद्रयान 2 ने September 7 को सॉफ्ट लैंडिंग करने का attempt किया था चन्द्रमा के सतह पर.

चंद्रयान 1 और चंद्रयान 2 में क्या अंतर है?

चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर अपना ”विक्रम” मॉड्यूल उतारने की कोशिश करेगा और छह पहियों वाले रोवर ”प्रज्ञान” को चांद पर फिट कर देगा और इसके जरिए कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे.

जबकि चंद्रयान-1 यह कार्य नही कर पाया था. चंद्रयान-1 का लिफ्ट ऑफ भार 1380 किलोग्राम था जबकि चंद्रयान-2 का भार 3850 किलोग्राम है.

चंद्रयान 2 पृथ्वी पर कब आएगा?

चंद्रयान 2 पृथ्वी पर अभी आने की कोई भी उम्मीद नहीं है. ये लगभग कुछ समय (१ वर्ष) वहीँ चन्द्रमा में रहने की उम्मीद है.

रोवर चन्द्रमा में कितनी दूर तय कर पायेगा?

रोवर चंद्रमा पर उतरने की जगह से पांच सौ मीटर की दूरी तक चल सकता है।

चंद्रयान 2 को बनाने में भारत के किस किस राज्य के बैज्ञानिक थे?

चंद्रयान 2 को बनाने में भारत के बहुत से राज्य के वैज्ञानिक शामिल थे. जिसमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिल नाडू, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, बिहार, केरला, कर्णाटक इत्यादि प्रमुख हैं.

ISRO का भविष्य का क्या प्लान है?

Isro ने आगे अपनी अगली प्लान गगनयान मिशन के तैयारी भी कर रहा है. ये project की कुल budget करीब $1.4 billion तक निर्धारित की गयी है.

इस Gaganyaan mission में, पहली बार तीन भारतीय “gaganauts” को भेजे जाने की उम्मीद है. वहीँ उसमें करीब एक महिला वैज्ञानिक को भेजने की उम्मीद है अंतरिक्ष में.

Chandrayaan 2 हिंदी में

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख चन्द्रयान 2 क्या है (What is Chandrayaan 2 in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को भारतीय चन्द्रयान अभियान के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

यदि आपको यह post चन्द्रयान २ क्या होता है हिंदी में पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter और दुसरे Social media sites share कीजिये.

15 COMMENTS

  1. Hi sir, मैंने अपने साइट में amp enable किया है। क्या आप बता सकते है कि वो कितने दिनों बाद गूगल सर्च में आना शुरू होता है।

    मैंने नोटिस किया है कि पहले जो पेज सर्च रिजल्ट में amp वर्शन में आ रहे थे। वो अभी नार्मल वर्शन में शो हो रहे है। यानी amp में नही आ रहे है।

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