कंप्यूटर स्पीकर क्या है और इसके प्रकार

आप सभी ने अपने आसपास जरुर से इन Speakers को देखा होगा, वो चाहे तो आपके computer में लगे होते हैं, या railway stations के दीवारों में, या फिर movie hall में. लेकिन आप में से ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जिन्हें की ये पता हो की असल में Speaker क्या है और यह कैसे काम करता है.

इसमें घबराने की कोई बात नहीं है क्यूंकि आज हम इसी Speakers के विषय में भी पूरी जानकारी प्राप्त करने वाले हैं. वैसे तो Market में बहुत से अलग अलग प्रकार के Speakers उपलब्ध हैं, जिनकी भिन्नता उनकी size, power, sound quality, shape इत्यादि के ऊपर निर्भर करता है.

वैसे आपके लिए कौन सा speaker उपयुक्त होगा ये जानने के लिए पहले आपको इन Speakers के विषय में जानना होगा, और साथ में ये भी जानना होगा की ये आखिर कैसे काम करते हैं.

इसलिए कोई भी speaker खरीदने से पहले आपको इनके विषय में थोडा बहुत research कर लेना चाहिए, नहीं तो बाद में पता चला की आपने गलत audio speaker का चुनाव कर दिया है.

बस इसी चीज़ को ध्यान में रखते हुए मैंने सोचा की क्यूं न आप लोगों को स्पीकर के बारे में जानकारी से जुडी छोटी बड़ी चीज़ों की जानकारी प्रदान की जाये जिससे की आपको इनके विषय में सही जानकारी हो और साथ में आप इसे खरीदते वक़्त सही प्रकार का चुनाव कर सकें. तो फिर चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की ये स्पीकर क्या होता है और कितने प्रकार के होते हैं.

स्पीकर क्या है (What is Speaker in Hindi)

Speaker Kya Hai Hindi

Speakers या LoudSpeakers एक बहुत ही common output devices होते हैं. इन्हें computer systems में इस्तमाल किया जाता है. जहाँ कुछ speakers को design किया गया होता है specifically कुछ computers के साथ, वहीँ दूसरों को किसी भी sound systems के साथ इस्तमाल किया जा सकता है.

चाहे उनकी design कुछ भी हो speakers का मुख्य काम ही होता है audio output पैदा करना जिसे की एक आम इन्सान सुन सके.

Loudspeakers का इस्तमाल बहुत से वर्षों से किया जा रहा है electrical signals को audio sound waves में convert करने के लिए.

Loudspeaker का मुख्य काम ही है की वो electrical signal को sound waves में convert करे और ऐसे वो अपने structural design के हिसाब से करता है.

इससे आप ये जान सकते हैं की loudspeakers की quality के हिसाब से इनकी बहुत बड़ी range होती है. वहीँ इनकी Cost, size, और दुसरे factors भी इनकी overall quality को तय करते हैं.

ज्यादातर समय में इन loudspeakers को आप devices के भीतर ही इस्तमाल होते हुए देखे होंगे, ज्यादातर समय में आपको दो या उससे ज्यादा loudspeaker drive units एक साथ दिखे होंगे.

स्पीकर को हिंदी में क्या कहते हैं?

स्पीकर को हिंदी में वक्ता कहा जाता है.

Speakers कैसे काम करते है?

Speakers असल में transducers होते हैं जो की electromagnetic waves को sound waves में convert करते हैं. Speakers receive करते हैं audio input, computer या कोई audio receiver से. ये या तो analog form में होता है या फिर digital form में.

Analog speakers simply amplify करते हैं इन analog electromagnetic waves को sound waves में. चूँकि sound waves analog form में पैदा होते हैं, इसलिए digital speakers को पहले इन digital input को analog signal में convert करना होता है, फिर जाकर वो sound waves पैदा कर सकते हैं.

Speakers के द्वारा पैदा होने वाले sound को define किया जाता है frequency और amplitude में. जहाँ पर frequency ये determine करता है की sound की pitch कितनी high या low होती है.

उदाहरण के लिए, एक soprano singer की voice ज्यादा high-frequency sound waves पैदा करती है, वहीँ एक bass guitar या kick drum ऐसी sounds पैदा करता है जिसकी low-frequency range होती है. इसलिए हम कह सकते हैं की एक speaker system की ability उसके sound frequencies पैदा करने की काबिलियत पर निर्भर करता है, जिससे की आप ये जान सकते हैं की audio की quality कितनी clear है.

बहुत से speakers में multiple speaker cones भी शामिल है अलग अलग frequency ranges के लिए, जो की मदद करते हैं प्रत्येक range के लिए ज्यादा accurate sounds पैदा करने के लिए. Two-way speakers में typically एक tweeter और एक mid-range speaker होती हैं, वहीँ three-way speakers में एक tweeter, mid-range speaker, और एक subwoofer भी शामिल होता है.

Amplitude या loudness, air pressure के बदलाव के ऊपर निर्भर करता है जो की speaker के sound waves पैदा करते हैं. इसलिए जब आप अपने speakers की sound बढ़ाते हैं तब असल में आप उसमें पैदा हो रहे sound waves की air pressure को बढ़ा रहे होते हैं.

चूँकि कुछ audio sources के द्वारा पैदा किया गया signal उतना ज्यादा high नहीं होता है( जैसे की एक computer की sound card), इसलिए इन्हें speakers की मदद से amplify किया जाता है. इसी कारणवस, ज्यादातर external computer speakers को amplify किया गया होता है, इसका मतलब की उनमें electricity का इस्तमाल कर signal को amplify किया गया होता है.

ऐसे Speakers जो की sound input को amplify करने में सक्षम होते हैं उन्हें active speakers कहा जाता है. आप आसानी से इन्हें पहचान सकते हैं, क्यूंकि अगर एक speaker active होता है तब उसमें एक volume control होता है या उन्हें एक electrical outlet में plugged किया जा सकता है.

वहीँ ऐसे Speakers जिनमें कोई भी internal amplification की सुविधा नहीं होती है उन्हें Passive Speaker कहा जाता है. चूँकि ऐसे speakers audio signal को amplify नहीं कर सकते हैं, इसलिए उन्हें एक high level की audio input की जरुरत होती है, जिसे की एक audio amplifier के द्वारा पैदा किया जा सकता है.

Speakers typically pairs में आते हैं, जो की उन्हें allow करता है stereo sound पैदा करने के लिए. इसका मतलब की left और right speakers audio transmit करते हैं दो completely separate channels में. दो speakers के इस्तमाल से, music की sound बहुत ही natural लडती है चूँकि हमारे कान sound को दोनों ही तरफ से एक साथ सुनने में ज्यादा अभ्यस्त होते हैं.

वहीँ Surround systems में चार से सात speakers (plus एक subwoofer), जो की और भी ज्यादा realistic experience पैदा करता है.

स्पीकर के प्रकार

ज्यादातर cases में speakers को categorized किया जाता है उनके drives के हिसाब से और साथ में कुछ उनके variables जो की उन्हें unique बनाते हैं. ये बहुत ही technical होता है. इसलिए चलिए इन technical terms में इन speakers के कुछ categories के विषय में जानते हैं.

1. Dynamic

ये बहुत ही common types के होते हैं, और ये typically passive speakers होते हैं. इनमें एक या उससे ज्यादा woofer drivers होते हैं. ये low-frequency sound पैदा करने के लिए जाने जाते हैं और इसमें एक या उससे ज्यादा tweeter drivers होते हैं. कुछ cases में, professional speakers में rear drivers भी होते हैं जिससे की sound को amplify किया जा सके.

2. Subwoofer

इस type में बड़े woofer driver होते हैं, और अक्सर enclosure में एक bass port होता है जो की low-frequency sound पैदा करता है. इनका इस्तमाल base को enhance करने के लिए भी किया जाता है दुसरे accompanying speakers से वो भी sound की quality को बिना compromise कर.

3. Horn

इन speakers और dyanamic speakers में बहुत सी समानता देखने को मिलती है, जिसमें drivers की arrangement भी शामिल है जो की एक wave guide structure में होता है. इन horn speakers के इस्तमाल से ही users इसके benefits का फायेदा उठा सकते हैं इनकी relatively high degree की sensitivity और sound की transmission बहुत बड़े इलाके में कर.

4. Electrostatic

Electrostatic speakers उन लोगों के लिए एक बहुत ही बढ़िया choice है जो की crisp और detailed sound पसदं करते हैं. ये diaphragm speakers feature करते हैं एक drive और एक fine membrane जिसे की place किया जाता है दो conductive panels के ऊपर.

इनमें एक outside power source की जरुरत होती है और इसलिए इन्हें हमेशा एक outside power outlet से plugged किया गया होता है. ज्यादातर cases में, electrostatic speakers को सबसे ज्यादा high frequencies में ही इस्तमाल किया जाता है और ये low-frequency speakers के लिए ideal नहीं होती हैं.

5. Planar-magnetic

इन speakers में diaphragms के जगह में, planar-magnetic speakers feature करता है. एक पतली metal ribbon, और electrostatic के विपरीत इन्हें कोई भी बाहरी power source की जरुरत नहीं होती है operate होने के लिए. ये उन speakers के श्रेणी में आते हैं जिनकी बहुत ही high utility value होती है और अगर सही care लिया गया तब यह एक लम्बे समय तक इस्तमाल की जा सकती हैं.

Loudspeaker के अलग अलग types और उनकी technologies क्या हैं?

Loudspeakers में बहुत से different technologies और approaches का इस्तमाल किया जाता है. जिसके कारण आज बहुत से different types की loudspeaker मेह्जुद हैं जिन्हें की इस्तमाल किया जा सकता है. तो चलिए ऐसे ही कुछ technologies के विषय में जानते हैं.

1. Moving coil

ये moving coil type की loudspeaker ऐसी type है जो की बहुत ही commonly देखने को मिलती हैं. इसमें एक cone attach होता है एक coil जो की एक magnetic field के भीतर रखा गया होता है.

ये moving coil loudspeaker ऐसी type की loudspeaker होती है जो की सबसे पहले किसी के मन में आता है जब बात loudspeaker की होती है. इसमें basically एक diaphragm होता है, जो की typically attached होता है एक coil और इनके through audio को pass किया जाता है.

इसमें coil suspended होता है एक magnetic field के भीतर और जिसका मतलब है की current flow की variations से जो की असल में electrical audio signal से होता है ये उस coil को move करवाने में सहायता करता है और इसलिए cone move करते हैं. परिणाम स्वरुप loudspeaker convert करता है electrical audio signal को sound में.

2. Horn

ये horn loudspeaker type को अक्सर इस्तमाल tweeters के लिए किया जाता है. वैसे ये भी वही समान electromagnetic effect का इस्तमाल करता है एक moving coil loudspeaker के हिसाब से, इसमें एक diaphragm को रखा गया होता है एक magnetic field के भीतर जो की vary करता है in line, audio के साथ. इससे ये diaphragm को vibrate कराता है और ये vibrations फिर magnify होते हैं एक horn के द्वारा.

Horn loudspeakers का इस्तमाल बहुत से areas में होते हैं auto technology के, और वैसे तो इनका इस्तमाल कुछ high quality applications में होते हैं, लेकिन इन्हें आप ज्यादा public address और बाहरी चीज़ों में इस्तमाल होते हुए देख सकते हैं.

इन horn loudspeaker में एक transducer होता है, जो की एक अक्सर एक moving coil transducer होता है, और यह एक horn के साथ connected होता है.

इसे आप एक matching element के तरह भी सोच सकते हैं जो की बहुत ही similar होती है एक waveguide horn antenna के जैसे, और इससे ये ज्यादा enable होते हैं higher levels की efficiency को obtain करने के लिए.

इसे आप एक पुराने gramophones में भी देख सकते हैं, जिसमें की एक horn ही enable करता है sound को हमारे कान तक पहुँचाने के लिए. बिना horn के, gramophone की sound लगभग inaudible ही होती है.

3. Electrostatic

इस electrostatic loudspeaker में पूरी ही अलग प्रकार की principle का इस्तमाल होता है जो की moving coil और horn loudspeaker से एकदम अलग होता है.

इसमें sound generate होता है जब force exert होता है एक membrane के ऊपर जो की suspended होता है एक electrostatic field में.

ये थी कुछ बहुत ही ज्यादा इस्तमाल होने वाली technologies, इन्हें छोड़कर भी बहुत ही अलग technologies मेह्जुद हैं जिन्हें की loudspeaker बनाने के लिए इस्तमाल किया जाता है.

बिभिन्न प्रकार के स्पीकर्स

ये traditional loudspeaker तब से हैं जब से की electronic audio का आविष्कार हुआ है. वहीँ विगत कुछ वर्षों में इसमें काफी बदलाव देखने को मिले हैं, और साथ में ये बहुत ही ज्यादा evolve भी हुआ है लोगों के जरूरतों के अनुसार. अब तो ये बहुत से shapes, sizes और variations में देखने को मिलता है.

तो चलिए फिर Speakers के अलग अलग प्रकारों के विषय में और अधिक जानते हैं. एक बात आप जान लें की प्रत्येक speaker की एक अलग ही पहचान है और उसे एक अलग ही purpose में इस्तमाल किया जाता है.

Subwoofers

एक subwoofer ऐसा speaker होता है जो की बहुत ही low-frequency sound पैदा करता है. Bass generate करने में ये सबसे आगे हैं. इसकी range 20 से 200Hz के बीच होती है, और ये subwoofer एक omnidirectional speaker होती है.

इसका मतलब की इस बात से फर्क नहीं पड़ता है की आप इसे कहाँ पर रखें. क्यूंकि ये sound को सभी direction में भेजती है. चूँकि इसकी sound range 20 से लेकर 200Hz के बीच में होती है, इसलिए इंसानी कान इन soundwaves को सुन नहीं सकते हैं, बल्कि केवल feel करते हैं.

आजकल तो desktop speaker systems में भी subwoofer आने लगे हैं. इसके होने से sound system की एक अलग ही शान होती है और सुनने वाले को भी इसका एहसास होता है. अब तो Subwoofers भी powered और unpowered variants में आने लगे हैं.

ये passive subwoofers, unpowered subwoofers को एक amplifier या receiver की जरुरत होती है जिससे की ये इतना output power पैदा कर सकें जिससे की ये push कर सकें इन speakers को उनके optimal level तक.

Studio Monitors

Studio monitors का इस्तमाल ज्यादातर professional audiophile ही करते हैं. इसकी बेहतरीन ability जिससे की ये clearly reproduce कर सकती हैं दोनों vocals और music, studio monitors सच में बहुत ही ज्यादा well optimized होती हैं casual listening और instruments play करने के लिए.

इसमें भी दो प्रकार के monitors होते हैं, powered और unpowered.

Powered monitors को केवल wall में plug-in कर play किया जा सकता है. क्यूंकि वो internally powered होते हैं, और उनमें ये खासियत होती है जिससे की वो buzz add कर सकें speakers में.

Unpowered monitors (जिन्हें की passive studio monitors भी कहते हैं). इन्हें external source की जरुरत होती है उन्हें power up करने के लिए. ये वो speakers होते हैं जिन्हें की पुराने ज़माने में इस्तमाल किया जाता था, दो wires, एक red और एक black. दोनों को Wrap किया जाता था एक post के around और भी उन्हें screw किया जाता था.

इनमें buzz नहीं होता है powered speakers के जैसे, और इन्हें कोई outlet की भी जरुरत नहीं होती है place करने के लिए.
एक चीज़ का ध्यान रखें की जब भी आप कोई studio monitors खरीदें, ये जरुर देखें की वो pair में हैं या नहीं क्यूंकि वो हमेशा pairs में नहीं आते हैं. कुछ तो set में बिक्री होते हैं वहीँ कुछ individually भी बेचे जाते हैं. इसलिए खरीदने से पहले इस चीज़ को check जरुर करें.

Loudspeakers

ये loudspeaker बहुत ही common household speaker होते हैं. पुराने ज़माने में ये loudspeakers ही थे जिनका इस्तमाल television और stereo से sound पाने के लिए होता था.

अब तो इन loudspeakers की size काफी हद तक कम हो गयी है और ये बहुत ज्यादा portable भी बन गयी है. अब loudspeaker में woofer, mid-range speaker और tweeter भी हैं, जो की हमें दूर रखते हैं दुसरे प्रकार के speakers खरीदने से.

इनका इस्तमाल मुख्य रूप से stage performances, karaoke जहाँ की आपको एक बड़ी जगह को cover करना होता है.

Computer Speakers

अगर हम पहले की computer की बात करें तब उनमें जो speakers का इस्तमाल होता था वो छोटे छोटे होते थे जिन्हें की motherboard के साथ attach किया जाता था. बाद में इनमें sound card attach होने लगे जिससे की users आसानी से अपने headphones को plug in कर सुन सकते थे.

उस समय में speakers उतने powerful नहीं थे, लेकिन केवल 8-bit या 16 bit sound ही काम करते थे. अभी के generation के computer speakers में commonly 2.1 (2 loudspeakers और एक subwoofer) style, जो की perfect होता है एक casual listener के लिए.

वहीँ एक gaming enthusiast के लिए, 5.1 या उससे भी ज्यादा fully immersive 7.1 surround systems available हैं. ये basically plug and play systems होते हैं, जिसमें की एक USB plug होता है subwoofer से computer तक, और दूसरा satellite speakers को plug किया जाता है subwoofer में power के लिए.

Floor Standing Speakers

ये Floor Standing Speakers को आप सभी ने बहुत बार देखा होगा आपके आसपास में. यदि आप अपने यहाँ एक home theatre system set up कर रहे हैं, या कोई home studio type की setup कर रहे हैं गाने सुनने के लिए, तब ये floor standing speaker आपके लिए सबसे बेहतर चुनाव होने वाला है. ये करीब 4 feet ऊँचे होते हैं और आसानी से room के सभी तरफ visible होते हैं.

इसमें बहुत से अलग अलग configuration होते हैं और उन्हें आप situaution के हिसाब से चुन सकते हैं. ज्यादातर floor standing speakers unpowered होते हैं, और इन्हें एक receiver या amplifier की जरुरत होती है function करने के लिए.

Bookshelf Speakers

नाम से ही पता चलता है की ये BookShelf Speakers क्या होते हैं. एक home theater setting में, ये medium-sized speakers बहुत ही बड़ा हिस्सा निभाते है इसके setup में.

ये directional speakers होते हैं, मतलब की सुनने के लिए ये आपके तरफ होने चाहिए sound को ठीक से सुनने के लिए. Full Experience के लिए आप अपने Television के दोनों तरफ इन्हें रख सकते हैं. इनकी ऊँचाई अक्सर 5 inches होती हैं और इसमें commonly 2 speakers (1 mid-range और दूसरा 1 tweeter) जिन्हें की refer किया जाता है 2-way speaker के नाम से. Floor standing speakers के तरह ही, इनमें भी amplifier या receiver की जरुरत होती है इन्हें run करने के लिए.

In-Wall/Ceiling Speakers

Quality in-wall या in-ceiling speakers को install करना इतना आसान नहीं होता है. और साथ में ये थोड़े costly भी होते हैं. लेकिन अगर आप चाहते हैं की घर के किसी भी room में रहें और गाना आपको follow करें प्रत्येक room में तब वहां पर In-Wall Speakers का होना बहुत ही जरुरी हो जाता है.

यदि आप अपने घर में पैसे खर्च करना चाहते हैं साथ में best music भी सुनना चाहते हैं तब In Wall Speaker आपके लिए जरुर से चाहिए. कोशिश करें की professionals की सहायता कें इन्हें install करने के लिए.

On-Wall Speakers

यदि आप On-wall speakers का इस्तमाल करते हैं, तब आपको ceilings और walls में बड़े holes बनाने की कोई भी जरुरत ही नहीं है. छोटे से hole कर आप इन्हें आसानी से mount कर सकते हैं.

इसमें mounting brackets होते हैं जो की इसके installation को बहुत ही आसान बना देती है. ये अलग अलग colors और styles में आती है जिससे की आपके घर के decoration को ये suit करे. On-wall speaker भी unpowered होते हैं, इसलिए आपको इन्हें चलाने के लिए amplifier या receiver की जरुरत होती है.

Satellite Speakers

ये speaker छोटे size के होते हैं और ये wired होते हैं साथ में unpowered भी. इनमें पहले से ही एक subwoofer होता है. इस प्रकार के speaker में usually एक mid-bass speaker होता है एक tweeter के साथ. ये subwoofer एक typical power source होता है इन satellite speakers के लिए. इन्हें आप घर के किसी भी जगह में लगा सकते हैं.

Bluetooth Speakers

Bluetooth Speaker में wires नहीं होते हैं और ये self powered होते हैं. ये बहुत ही portable होते हैं जिससे की आप इन्हें कहीं पर भी और कभी भी play कर सकते हैं. इनकी sound quality भी बहुत ही बेहतर होती हैं.

Surround Speakers

Surround speakers एक बहुत ही integral part होती है किसी भी home theater system की. इसमें ये numbers 5.1 और 7.1 की अलग ही meaning होती है.

एक standard system में एक left, right और एक center speaker (LCR) होता है. Basically ये 3 speakers वाले होते हैं जो की viewer या listener की और face करते हैं. इसमें surround और भी 2 या उससे ज्यादा channels (speakers) add करती है viewer के पीछे में जिससे एक 360 degrees sound environment बन जाता है. Multi-channel playback का इस्तमाल होता है correct sound को भेजने के लिए correct speaker में वो भी correct time में.

5.1 surround में एक center channel, left और right front channels, left और right surround channels होते हैं side में और एक subwoofer. Simply कहें तो 5 speakers और एक subwoofer. ये 5.1 surround system combine करता है rear और side audio को 2 speakers में. वहीँ 7.1 system भी 5.1 के जैसे ही होता है, लेकिन ये separate करता है rear और side audio को 4 speakers में.

Outdoor Speakers

इस प्रकार के speakers को design किया गया होता है weatherproof बनने के लिए. आप इन्हें एक system के हिसाब से या एक single speaker के हिसाब से भी खरीद सकते हैं जैसे आपकी जरुरत हो. कुछ systems में एक subwoofer और बहुत से midrange और tweeters होते हैं जिनसे की entire yard और patio को cover किया जा सकें.

इन outdoor speaker की boxes को कुछ इसप्रकार बनाया गया होता है जिससे की ये heat और humidity को सहन कर सकें, साथ में wires को भी plugged किया जाता है एक speaker के भीतर वो भी एक weather resistant enclosure में उसे protect करने के लिए.

Soundbars

अगर आप अपने TV के लिए ज्यादा dynamic sound चाहते हैं बिना कोई speaker place किये अपने room में तब आपके लिए soundbars एक बहुत ही बढ़िया option है.

Sound bars की बहुत ही sleek design होती है जिससे की ये बड़ी ही आसानी से most flat panel LCD, LED और plasma TVs पर suit करता है और usually एक बहुत ही बेहतर r sound पैदा करता है in-built speakers की तुलना में. साथ ही इसमें भी आप 5.1 और 7.1 surround systems वाला experience प्राप्त कर सकते हैं, क्यूंकि एक soundbar में बहुत से speakers होते हैं जो की sound को bounce करते हैं walls से और उस sound को पुरे room में send करते हैं.

Speaker हिंदी में

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख स्पीकर क्या है (What is Speaker in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को स्पीकर के प्रकार के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

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