RFID क्या है और कैसे काम करता है?

शायद आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे जिन्हें की ये पता हो की ये RFID क्या है? वैसे देखा जाये तो RFID की technology ज्यादा नयी technology नहीं है. बस अभी इसके ज्यादा applications के हो जाने के कारण ये सबके attention में आ गया है. जैसे की computer networking technology, जिसे की 60’s या 70’s के दसक में invent कर दिया गया था लेकिन उनका widespread adoption Internet के आने से ही हुई. ठीक वैसे ही RFID technology का इस्तमाल IOT (Internet Of Things) के आने से ही ज्यादा प्रचलित हुआ. इसके बाद का बात तो हमे पता ही है की कैसे लोगों ने वर्तमान के समय में RFID का इस्तामला हमारे जीवन के प्रत्येक भाग में करने लगे हैं.

RFID की इतनी लोकप्रियता को देखते हुए आज मैंने सोचा की क्यूँ न हमारे readers को RFID क्या है, इसमें इस्तमाल होने वाली technology क्या होती है और ये RFID कैसे काम करता है जैसे विषयों में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें भी किसी RFID devices को इस्तमाल करने से पहले उसके काम करने के तरीके के विषय में मालूम हो. यदि आप सच में इस technology को समझना चाहते हैं तब आपको पूरी article जरुर से पढनी चाहिए क्यूंकि हो सकता है आप में से बहुतों को कुछ नया सीखने को मिल जाये. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की Radio-frequency identification क्या होता है हिंदी में.

RFID क्या है (What is RFID in Hindi)

RFID Kya Hai Hindi

RFID का Full Form होता है Radio-Frequency Identification. यह acronym उस छोटे से electronic devices को refer करता है जो की एक small chip और एक antenna से बना हुआ होता है. यह chip typically capable होती है 2,000 bytes की data को carry करने के लिए.

यह RFID device भी वहीँ समान काम करती हैं जैसे की barcode या एक magnetic strip जो की credit card या ATM card के पीछे लगा हुआ होता है; यह उस object के लिए एक unique identifier प्रदान करता है. ठीक जैसे की एक barcode या magnetic strip को scanned किया जाता है information पाने के लिए, वैसे ही RFID device को भी scan किया जाता है identifying information को retrive करने के लिए.

RFID Technology की सबसे पहले कब और किसने Introduce किया था?

RFID Technology का सबसे पहला इस्तमाल January 23, 1973 में Mario W. Cardullo के द्वारा किया गया. जिनके नाम पर पहला U.S. patent भी है जिसमें उन्होंने एक active RFID tag में rewritable memory का आविष्कार किया था. उसी साल ही Charles Walton जो की Califoria के एक entrepreneur थे, उन्होंने एक patent receive किया जिसमें उन्होंने एक passive transponder का इस्तमाल door को बिना किसी key के unlock कर दिया था.

RFID frequencies: RFID systems के प्रकार क्या हैं?

वैसे तो RFID Systems के कई प्रकार होते हैं. लेकिन उनमें से तीन main types होते हैं

1. Low frequency (LF)
2. High frequency (HF)
3. Ultra-high frequency (UHF)
4. Microwave RFID

Frequencies अलग अलग country और region के हिसाब से बदलते हैं.

Low-frequency RFID systems की range होती है 30 KHz से 500 KHz तक, वहीँ इसकी typical frequency होती है 125 KHz. LF RFID की short transmission ranges होती हैं, जो की generally कुछ inches से लेकर six feet तक हो सकता है.

High-frequency RFID systems की range होती है 3 MHz से 30 MHz तक की, वहीँ इसकी typical HF frequency होती है 13.56 MHz. और इसकी standard range होती है कुछ inches से लेकर several feet तक हो सकता है.

UHF RFID systems की range होती है 300 MHz से 960 MHz तक की, वहीँ इसकी typical frequency होती है 433 MHz और इसकी standard range होती है 10 feet से 25-plus feet तक की.

Microwave RFID systems run करते हैं 2.45 GHz की frequency में और इन्हें 30+ feet की दुरता से भी read किया जा सकता है.

RFID कैसे काम करता है

RFID की Technology को समझने से पहले हमें ये समझना होगा की इसके अलग अलग parts क्या है और उनका function क्या हैं.

एक Radio-Frequency Identification (RFID) system के मुख्य रूप से तीन parts होते हैं :

  • एक scanning antenna
  • एक transceiver, वहीँ उसके साथ एक decoder भी होता है. जिससे की data को interpret किया जाता है
  • एक transponder – RFID tag – जिसे की programmed किया जाता है कुछ information के साथ.

इसमें scanning antenna radio-frequency signals spread करती है relatively short range में. यह RF radiation दो प्रकार का काम करती हैं :

  • यह एक माध्यम प्रदान करता है transponder (RFID Tag) के साथ communicate करने के लिए.
  • ये RFID tag को energy प्रदान करता है communicate करने के लिए. (खासकर passive RFID tags में).

यह इस technology का key part होता है, RFID tags में कोई भी batteries की आवश्यकता नहीं होती है, और इसलिए इनका इस्तमाल बहुत सारे वर्षों के लिए किया जा सकता है.

इसमें scanning antennas को permanently affixed किया जाता है एक surface में; साथ में handheld antennas भी available होते हैं इस्तमाल के लिए. ये कोई भी shape या आकार ले सकते हैं आपके जरुरत के हिसाब से; उदाहरण के लिए, आप उन्हें एक door frame के भीतर भी बना सकते हैं जिससे की वो सभी persons से data accept कर सकें जो की उस door से pass करें.

जब एक RFID tag pass करता है scanning antenna के field से, तब ये उस antenna से activation signal detect करता है. जो की RFID chip को जगा देता है, और वो infomation transmit करने लगती हैं अपनी microchip से और जिसे की pick कर लिया जाता है scanning antenna से.

RFID tags के कितने प्रकार के होते हैं?

अगर में RFID Tags के अलग अलग प्रकार होते हैं लेकिन उसमें से दो प्रकार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं.

1. Active RFID Tags
2. Passive RFID Tags

Active RFID tags के अपने ही power source होते हैं ; इसका जो बड़ा advantage है वो ये की इन tags में अगर reader बहुत दूर भी होता है तब भी वो signal receive कर सकता है. इन devices की आयु 10 वर्षों तक होती है, जिससे ये पता चलता है की इनकी limited life spans होती है.

Passive RFID tags में लेकिन कोई भी batteries की जरुरत नहीं होती है, और ये आकर में बहुत छोटे भी होते हैं. इनकी आयु की अगर बात करें तब ये virtually unlimited life span के होते हैं.
RFID tags को बहुत सारे variety के circumstances में पढ़ा जा सकता है, जहाँ की barcodes और दुसरे optically read technologies useless होती हैं.

  • इसमें tag को किसी object के surface में ही होने की कोई compulsory नहीं होती है, जिससे ये ज्यादा जल्दी ख़राब नहीं होता है.
  • इसकी read time typically 100 milliseconds से भी कम होती है.
  • इसमें बहुत तादाद में tags को एक साथ read किया जा सकता है, न की item by item.
    इसी तरह से ही RFID technology कार्य करता है.

RFID technology को कहाँ पर इस्तमाल किया जा सकता है?

RFID technology का इस्तमाल इनके RFID tags में ही किया जाता है. ये tags बहुत से variety के आते हैं जिनकी shapes और sizes बहुत अलग अलग होती है, साथ में उन्हें बहुत सारे variety के materials में encash किया जाता है :

  • Animal tracking tags, जिन्हें की उनके चमड़ी के अन्दर डाला जाता है, उनके movements को track करने के लिए. इनकी साइज़ एक चावल के दाने के आकार का होता है
  • कुछ Tags screw-shape के भी होते हैं जिन्हें की पेड़ों और दुसरे लकड़ी के वस्तुओं को track करने के लिए किया जाता है.
  • Credit-card shape के RFID tags को access applications में इस्तमाल किया जाता है.
  • इन tags को anti-theft hard plastic tags के आकार में बहुत से merchandise stores में रखा जाता है.
  • Heavy-duty 120 by 100 by 50 millimeter rectangular transponders का इस्तामला shipping containers, heavy machinery, trucks, और railroad cars को track करने के लिए रखा जाता है.
  • RFID devices का इस्तमाल कुत्तों में उन्हें पहचानने के लिए इस्तामला किया जाता है.
  • साथ ही बहुत से costly musical instruments को चोरी होने से रोकने के लिए उनमें RFID tag का बड़ी ही चतुराई से install किया जाता है, जिससे चुराने वाले को इसका एहसास भी न हो की उसके द्वारा चुराए गए item को track भी किया जा सकता है.

RFID tag वाहनों पर कहाँ पर लगाते है?

RFID Tag in Hindi

RFID tag को वाहनों में बहुत से जगहों में लगाया जा सकता है. साथ की इनके बहुत सारे uses भी हैं अगर सच कहूँ तो. तो चलिए इसके विषय में जानते हैं.

1.  Automated Tolling में : अभी के समय में अगर हम tranportation inductry की बात करूँ तब FASTag के introduction ने automated tolling में एक बड़ा बदलाव लाया है, ये एक RFID tag होता है जिसका इस्तामला automated tolling के application के लिए होता है. इसमें किसी भी गाड़ी का driver आसानी से toll fee pay कर सकता है, केवल उस RFID enables toll gate से pass होकर. इसमें उन्हें कहीं पर भी रुकने की जरुरत नहीं होती है और न ही कोई physical transaction करनी होती है. अब सोचिये की busy traffic lanes में इनकी कितनी ज्यादा उपयोगिता होती होगी.

2.  AVI में ( Automatic Vehicle Identification ) : RFID AVI Tags का इस्तमाल किसी vechile के विषय में सभी information fetch करने के लिए होता है. इसके लिए कोई vehicle का physical papers होना जरुरी नहीं होता है. बस आपको उस tag को scan करना होता है और सभी vechiles की सभी information आपके पास पहुँच जाती है.

3. Genuine Check करने के लिए : कुछ companies ऐसे vehicles release करती है जिसमें की पहले से ही RFID Tags fit होते हैं , जिससे उनकी genuineness को verify किया जा सके. यही चीज़ उनके spare parts पर भी applicable होता है. Tamper-proof और tamper evident tags ये दोनों ही available होते हैं समान काम करने के लिए.

4. RFID Tyre tags के तोर पर : ये केवल Tyre assets के information को पढने तक ही सिमित नहीं है बल्कि इससे बहुत सारे चीज़ों को track भी किया जा सकता है.

5. Automated parking और access system के लिए : RFID technology के इस्तमाल से parking places को आसानी से automate किया जा सकता है. इसके लिए आपको केवल RFID windshield tags को scan करना होता है और इसके बाद का काम अपने आप ही होने लग जायेगा.

6. Logistics में : इसके इस्तमाल से Transporting vehicles और उनकी identification को आसानी से automate किया जा सकता है.

RFID और Barcodes में क्या अंतर है

वैसे तो RFID tags और barcodes, ये दोनों ही products के विषय में information carry करते हैं. लेकिन इन दोनों ही technologies के इस्तमाल में बहुत ही ज्यादा अंतर हैं. तो चलिए RFID और Barodes के Differences के विषय में और अधिक जानते हैं :
Barcode readers को एक direct line of sight की जरुरत होती हैं उन printed barcode के लिए; वहीँ RFID readers को एक direct line of sight की जरुरत ही नहीं होती है. चाहे वो active RFID tags हो या फिर passive RFID tags.

RFID tags को आसानी से ज्यादा दुरी से एक RFID reader के द्वारा पढ़ा जा सकता है, जो की करीब 300 feet तक होता है. वहीँ एक barcode को read करने का range बहुत ही कम होता है, जो की typically 15 feet से भी कम होता है.

RFID readers बड़ी speed से interrogate और read कर सकते हैं RFID tags को ; जो की होते हैं 40 या उससे ज्यादा tags per second में. वहीँ barcodes को read करने में ज्यादा time-consuming होता है, क्यूंकि इसमें एक direct line of sight की जरुरत होती है. वहीँ इसमें अगर items सही तरीके से orient न हों तब इसमें एक barcode को पढने के लिए भी ज्यादा समय (कुछ seconds) लग जाते हैं.

चूँकि Barcodes को ठीक तरीके से read करने के लिए Line of sight की ज्यादा जरुरत होता है. इन requirements के होने से ये limit करता है barcode के ruggedness और उसके साथ barcodes की reusability (आसान भाषा में कहें तब line of sight की जरुरत होती है barcodes के लिए, इसलिए printed barcode को product के ऊपर रहना होता है जिससे की वो ज्यादा exposed हो barcode reader के लिए. वहीँ इससे उस barcode में ज्यादा कट और ख़राब होने की संभावनाएं होती है). इसके विपरीत RFID tags ज्यादा rugged होते हैं, क्यूंकि electronic components को इसमें एक plastic cover से protect किया जाता है. RFID tags को बहुत बार product में ही implant किया जाता है, जो की इसकी ज्यादा rugged और reusable होने की gurantee प्रदान करता है.

Barcodes की कोई भी read/write capability नहीं होती है; इसका मतलब की आप इसमें कोई additional information add नहीं कर सकते एक printed barcode में. वहीँ RFID tags, लेकिन आसानी से devices को read/write कर सकते हैं, एक RFID reader आसानी से tag के साथ communicate कर सकता है, और tag design के अनुसार इसमें information को alter भी किया जा सकता है.

वहीँ RFID tags ज्यादा costly होते हैं barcodes के मुकाबले .

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख RFID क्या है (What is RFID in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को Radio-frequency identification in hindi के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्धर्व में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं. यदि आपको यह post RFID क्या होता है हिंदी में पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

9 COMMENTS

  1. मेने ब्लॉगिंग शरू की उसके 2 महीने हो गए लेकिन व्यूज नही आ रहे हर पोस्ट में 10 ही आते है seo, कीवर्ड रिसर्च सब करता हूँ लेकिन व्यूज नही आते और 10 महीने में मेरा डोमेन expire होने वाला है फिर रिन्यू कराने के पैसे भी नही है तो क्या मुझे अब ब्लॉगिंग करना चाहिए? क्या अब 10 महीने में ट्रैफिक आ सकता है और पहेली पेमेंट आ सकती है? मुझे जरूर बताइयेगा।

  2. बहुत खूब जानकारी, वैसे तो में इस बारे में जानता था लेकीन बहुत थोड़ा , इस ब्लॉग के माध्यम से अब बहुत कुछ पता चला है. शुक्रिया

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