जीपीआरऍस क्या है और कैसे काम करता है?

Photo of author
Updated:

GPRS असल में मोबाइल संचार के लिए वैश्विक प्रणाली की एक विस्तार है. ये मूल रूप से 2G और 3G सेलुलर संचार नेटवर्क की वैश्विक प्रणाली में एक पैकेट-उन्मुख मोबाइल डेटा मानक है मोबाइल संचार के लिए. GPRS को European Telecommunications Standards Institute (ETSI) के द्वारा बनाया गया था.

gprs kya hai hindi

GPRS override करता है wired associations को, क्यूंकि ये framework में streamlined access मेह्जुद होता है packet information’s network के तरह जैसे की web. Packet radio standard को utilize किया जाता है GPRS के द्वारा वो भी transport करने के लिए client information packets को एक structured route में, GSM versatile stations और external packet information networks के बीच में. इन packets को straightforwardly direct किया जाता है packet changed systems को वो भी GPRS portable stations से.

जीपीआरएस की परिभाषा

General Packet Radio Service एक प्रकार का packet-switching technology होता है जो की enable करता है data transfers वो भी cellular network’s global system के माध्यम से mobile communications (GSM) के लिए, वहीँ ये प्रदान करता है end-to-end, wide-area wireless IP connectivity भी.

GPRS transmission rate को improve किया जा सकता है 56Kbps से 114Kbps तक भी. वहीँ इसमें existing wireless applications की जरुरत नहीं होती है एक एक intermediary converter के तोर पर, इस कारण connection और transmission बन जाते हैं ज्यादा convenient और आसान. इस तरीके से, users आसानी से log on कर सकते हैं Internet में, वहीँ साथ में वो participate भी कर सकते हैं interactive communication में जैसे की video conference, और users उसी समान video network (VRN) में connect हो सकते हैं network के साथ बिना dial-up के ही.

GPRS Full Form in Hindi

GPRS की फुल फॉर्म “General Packet Radio Service” होती है, हिंदी भाषा में इसका अर्थ यह हुआ की यह एक ऐसी service है जो की data को radio waves के जरिये transmit करने का काम करती है.
इसे हिंदी में “सामान्य पैकेट रेडियो सवाएं “ कहा जाता है.

जीपीआरएस का मालिक कौन है?

GPRS specifications को लिखी गयी है European Telecommunications Standard Institute (ETSI) के द्वारा, यह एक European counterpart है American National Standard Institute (ANSI) की. इसलिए इसे हम GPRS का मालिक मान सकते हैं.

जीपीआरएस की मापदंड

GPRS असल में एक standard ETSI के अंतर्गत लेकिन वहीँ इसे बाद में transfer कर दिया गया 3rd Generation Partnership Project (3GPP) को और वहीँ इसे publish कर दिया गया सन 1998 में. एक standard के तोर पर, ये compatible होता है 2G, 3G और WCDMA networks के साथ वो भी via GPRS Core Network के साथ.

GPRS एक packet-switching communications protocol होता है, वहीँ इससे पहले दुसरे circuit-based switching protocols का इस्तमाल किया जाता था 2G networks पर. इसका मतलब ये भी है की इसमें data delivery होती है best-effort वाली; latency और deliverability थोडा vary कर सकती है समय समय पर. Quality of Service (QoS) आसानी से manageable नहीं होती है GPRS में क्यूंकि ये निर्भर करती है कितनी संख्या की दुसरे users उस service को share कर रहे हैं.

जीपीआरएस के प्रमुख विशेषताऐं

चलिए अब जानते हैं की ऐसे कौन सी तीन key features है GPRS की जो की describe करती हैं wireless packet data को:

1. हमेशा online वाली feature – ये मिटा देती है dial-up process को, जो की applications को बना देती है केवल one click away.

2. यह एक upgrade है मेह्जुदा systems के साथ – इसमें Operators को उनके equipment को replace नहीं करना होता है; बल्कि, GPRS एक added features है उनके मेह्जुदा existing infrastructure के ऊपर.

3. एक integral part वो भी future 3G systems का – GPRS एक packet data core network होता है 3G systems EDGE और WCDMA के लिए.

GPRS का लक्ष्य

GPRS एक पहला कदम है end-to-end wireless infrastructure की और और इसकी कुछ लक्ष्य भी है जिनके विषय में चलिए जानते हैं :

  • Open architecture का होना
  • Consistent IP services प्रदान करना
  • समान infrastructure वो भी अलग अलग air interfaces के लिए
  • Integrated telephony और Internet infrastructure
  • Leverage करना industry investment वो भी IP में
  • इसकी Service innovation पूरी तरह से independent होती है infrastructure से

GPRS में कैसी Services Offer की जाती हैं?

अब चलिए जानते हैं की GPRS के द्वारा प्रदान की जाने वाली Services के विषय में.

1. SMS messaging और broadcasting

2. Push-to-talk over cellular

3. Instant messaging और presence

4. Multimedia messaging service

5. Point-to-Point और Point-to-Multipoint services

GPRS के द्वारा Support किये जाने वाले Protocols क्या क्या हैं?

अब चलिए जानते हैं की वो ऐसे कौन कौन से Protocols हैं जिन्हें की GPRS Support करता है.

1. Internet Protocol (IP)

2. Point-To-Point Protocol (PPP)

जीपीआरएस के फायदे क्या है?

GPRS technology काफी सारे benefits और advantages प्रदान करती है users और network operators को वो भी basic GSM system की तुलना में. इसे widely deploy किया जाता था एक realistic data capability प्रदान करने के लिए via cellular telecommunications technology. अब चलिए जानते हैं की GPRS के advantages क्या हैं :-

Higher Data Rate
GPRS shorter access times में higher data rates प्रदान करती हैं. GPRS प्रदान करती है transfer rate up to 115kbit/s (इसमें maximum होती है 171.2kbit/s, excluding FEC). इसका मतलब है की GPRS और ISDN users आसानी से Internet को surf कर सकते हैं वो भी portable computers के जरिये.

Low Connection Cost
GSM network में, high resource utilization होती हैं. वहीँ GPRS ने पहली बार introduce किया packet-switching, transmission mode, जिससे की सही मायिने में circuit-switching GSM data transmission mode का इस्तमाल होने लगा, वहीँ ये काफी ज्यादा महत्वपूर्ण था wireless resource scarcity के लिए.

अब GPRS Users की billing के लिए communication की data volume को main basis किया जाता है, जिससे की ये आसानी से पता चल जाता है की user को service इस्तमाल करने का कितना pay करना होता है. अब GPRS users की connection time भले ही कुछ घंटे क्यूँ न हो, लेकिन उन्हें केवल pay करना होता है relatively low connection cost.

Short Access Times
GPRS mainly प्रदान करता है एक connection mobile users और remote data networks (e.g.. Support TCP/IP, X.25 और दुसरे networks को), जिससे की mobile users को प्रदान किया जा सके high-speed wireless IP और wireless X.25 services.

Easy Billing
GPRS packet transmission offer करता है एक ज्यादा user-friendly billing वो भी circuit switched services की billing के तुलना में. Circuit switched services की बात करें तब, billing आधारित होती है connection के duration के ऊपर. ये उपयुक्त नहीं होती है उन applications के लिए जिनमें bursty traffic होती है. इसमें user को pay करना होता है entire airtime को, वो भी idle periods में जब कोई भी packets को भेजा न जाता हो (e.g., जब एक user read करता है एक Web page).

वहीँ इसके विपरीत, packet switched services में, billing आधारित होता है transmitted data के परिणाम के ऊपर. इसमें user की advantage यह है की वो भले ही “online” होते हैं एक लम्बे समय के लिए लेकिन उन्हें billed किया जाता है transmitted data volume के आधार पर.

Speed:
एक बहुत ही बड़ी benefit है GPRS technology की वो offer करती है higher data rate वो भी GSM की तुलना में. Rates up to 172 kbps मुमकिन हैं, वहीँ maximum data rates realistically achieve किया जा सकता है under most conditions जिसमें की range 15 – 40 kbps में होती है.

Packet switched operation:
जहाँ GSM में circuit switched techniques का इस्तमाल होता था, वहीँ GPRS technology इस्तमाल करती हैं packet switching in line वो भी Internet के साथ. इससे ज्यादा efficient use होता है available capacity का, और वहीँ ये allow करती है greater commonality वो भी Internet techniques.

Always on connectivity:
GPRS की एक और advantage यह है की ये offer करती है “Always On” capability. जब circuit switched techniques का इस्तमाल होता है, charges आधारित होते हैं समय के ऊपर की कितनी देर तक एक circuit का इस्तमाल होता है i.e. कितनी देर तक call चल रही है. वहीँ packet switched technology में charges को हिसाब किया जाता है amount of data carried के ऊपर जो की services provider’s capacity के द्वारा इस्तमाल किया गया होता है. वहीँ, always on connectivity मुमकिन होती है.

ज्यादा applications:
Packet switched technology के साथ always on connectivity जब combined होती है higher data rates के साथ, तब इससे ज्यादा possibilities पैदा होती है नए applications के लिए. GPRS के आने से Blackberry जैसे Mobile या PDA का growth ज्यादा होने लगा.

वहीँ GPRS की Capabilities को ज्यादा develop करने के लिए, उसमें further advances किये गए और दूसरी system जिसे की EDGE या Enhanced GPRS, EGPRS को develop किया गया.

GPRS में किस Switching का इस्तमाल किया जाता है?

GPRS technology में Packet Switched Data का इस्तमाल होता है न की circuit switched data का. यह technique ज्यादा efficient इस्तमाल करती हैं available capacity की. इसका कारण यह है की ज्यादातर data transfer occur होती है “bursty” fashion में. इसमें transfer होती है short peaks में, वहीँ ये followed होती है breaks के द्वारा जब बहुत ही कम या no activity होती है.

एक traditional approach के अनुसार एक circuit को permanently switched कर दिया जाता था एक particular user के लिए. इन्हें कहा जाता है एक circuit switched mode. Data Transfer की “bursty” nature के हिसाब से इसका मतलब है की कुछ ऐसे भी periods होते हैं जब ये किसी भी प्रकार की data carry नहीं कर रही होती है.इस situation को improve करने के लिए, overall capacity को shared कर दिया जाता है several users के बीच में.

इसे प्राप्त करने के लिए, data को split किया जाता है packets और tags में जिन्हें की insert किया जाता है packet में जिससे की इसे प्रदान किया जा सके destination address. Packets वो भी अलग अलग sources से उन्हें transmit किया जाता है link के माध्यम से. ये तो possible नहीं है की data burst वो भी अलग अलग users के लिए एक ही समय में occur हो, लेकिन overall resource को share कर ऐसे fashion में, channel, या combined channels को ज्यादा बेहतर रूप से इस्तमाल किया जा सकता है. इसी approach को packet switching कहा जाता है, और ये काफी सारे cellular data systems के core में हुआ करता था, और इस case में GPRS में.

PACKET SWITCHING VS CIRCUIT SWITCHING

अब चलिए जानते हैं की packet switching और Circuit Switching में क्या अंतर हैं.

CIRCUIT SWITCHED MODE PACKET SWITCHED MODE
IMSI attach होती है GPRS attach होती है
Call setup TBF establishment
PDP context activation
Call state (bi-directional) Block transfer (uni-directional)
ये Channel की Exclusive इस्तमाल करती हैं इसमें Channel को share किया जाता है users के बीच में
Calls clear होती है completion के बाद ये हमेशा on होता है

DIFFERENCE BETWEEN GSM AND GPRS

अब चलिए जानते हैं की GSM और GPRS में क्या अंतर हैं.

GSM GPRS
GSM एक standard-bearer है 2G technologies की. GPRS एक upgrade version है basic GSM features का. ये allow करती है mobile handset को जिससे की वो obtain कर सकती हैं much higher data speed वो भी जितनी की standard GSM offer कर सकती हैं.
GSM traffic और signalling follows करती हैं अलग अलग multi-frame structure.
i.e. 51 frame MF का इस्तमाल होता है signaling के लिए और 26 frame MF का इस्तमाल होता है traffic के लिए.
वहीँ GPRS में traffic और signaling दोनों ही follow करती हैं common multi-frame structure. i.e. 52 frame MF का इस्तमाल होता है दोनों signaling और traffic में.
GSM इस्तमाल करती हैं circuit switching traffic GPRS इस्तमाल करती हैं packet switching traffic.
GSM UE मेह्जुद होती है दो states  में ,i.e
IDLE और READY.
वहीँ GPRS UE में तीन states होती हैं,
i.e IDLE, READY और STANDBY.
GSM time slot को allocate किया जाता है दोनों uplink और downlink में. यही कारण है की इन radio resource allocation को GSM में Symmetric कहा जाता है. वहीँ GPRS radio resource allocation होता है asymmetric, उदाहरण के लिए, ये मुमकिन है की time slot को allocate करना केवल downlink में, न की uplink में जब एक user केवल file को download कर रहा होता है.
GSM में location area concept का इस्तमाल होता है. वहीँ GPRS में routing area concept का इस्तमाल होता है.

GPRS का भविष्य?

अब तक आप ये तो जान ही गए होंगे की GPRS एक बहुत ही crucial step है mobile evolution में, और वहीँ ये खोलता है endless possibilities वो भी application developers और users के लिए. GPRS के बाद के technology होंगे या तो EDGE या UMTS (या दोनों).

1. Enhanced Data rate for GSM Evolution (EDGE) : इसमें एक नयी modulation scheme का इस्तमाल होता है जिससे की ये प्रदान करता है up to three times higher throughput (वो भी HSCSD और GPRS के लिए)

2. Universal Mobile Telecommunication System (UMTS) : एक नयी wireless technology जिसमें की नयी infrastructure deployment का इस्तमाल होता है.

आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख जीपीआरऍस क्या है (What is GPRS in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को GPRS के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

यदि आपको यह post जीपीआरएस की परिभाषा पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter और दुसरे Social media sites share कीजिये.

Leave a Comment

Comment (1)

  1. प्रभंजन साहू जी और चंदन जी मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा कि मैं आपके साइट पर गेस्ट पोस्ट करना चाहता हूं क्या आप मुझे इजाजत देंगे.
    अगर हां तो कृपया रिप्लाई कीजिए

    Reply