Repeater क्या है और कैसे काम करता है?

क्या आप जानते हैं की Networking में Repeater क्या है? वैसे Wireless networking एक बहुत ही common alternative होता है wired networking के लिए जो की allow करता है multiple computers को एक दुसरे के साथ communicate करने के लिए जिससे की वो share कर सकें Internet connection को बिना किसी physical connections के ही.

वहीँ Wireless networking में कुछ बड़े issues जरुर आते हैं जो की operation के होने में दिक्कतें लाते हैं जैसे की Signal Strength का degradation होना. इसी issue को solve करने के लिए जिस networking device को इस्तमाल में लाया जाता है उसे Repeater कहा जाता है. एक wireless repeater या range extender एक ऐसा device होता है जो की मदद करता है computers को बेहतर और stronger wireless signals maintain करने में. जिसके लिए ये signals को routers से लेते हैं और उन्हें remit (फिर से emit) करते हैं.

एक repeater OSI model के Physical Layer में operate होता है. इसका मुख्य काम होता है signal को regenerate करना वही समान network में, signals के ज्यादा weak या corrupt होने से पहले. इससे ये होगा की signal ज्यादा दुरता तक extend किया जा सके वही समान network में. ऐसे ही repeater के बहुत से दुसरे features और functions हैं जिनके विषय में आगे इस article में बताया है. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को रिपीटर क्या होता है और कैसे काम करता है के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे की आने वाले समय में आपको इस network device को लेकर कोई भी doubt न हो. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

रिपीटर क्या है (What is Repeater in Hindi)

Repeater Kya Hai Hindi

रिपीटर का मतलब क्या होता है? Network Repeater या Repeater एक ऐसा powerful network device होता है जिनका इस्तमाल signals को regenerate करने के लिए होता है, जब वो लम्बी दुरी तय करते हैं, जिससे की signal की strength समान रहे.

Repeaters के विषय में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह हैं की repeaters signal को amplify नहीं करते हैं. जब signal weak बन जाते हैं, तब ये signal को copy करते हैं bit by bit और फिर उसे regenerate करते हैं उसके original strength में. यह एक 2 port device होता है.

Repeaters का इस्तमाल Ethernet network को establish करने के लिए होता है. एक repeater OSI layer के first layer (physical layer) में स्तिथ होता है. Repeaters उन cables में इस्तमाल किया जाता है जिन्हें की करीब 100 meters तक की दूरता को cover करने के लिए होता है. इनका इस्तमाल signals पाने के लिए होता है optical fibers, copper cables और coaxial cables से.

Repeaters को develop बहुत से महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए भी किया जा सकता है जैसे की microwave को regenerate करना एक satellite से; ऐसे repeaters को transponders कहा जाता है. इसलिए इन devices का उपयोग electric के साथ साथ light signals को carry करने के लिए भी होता है.

Repeater के Features क्या होते हैं?

एक repeater बहुत ही simplest facility होता है जिसका इस्तमाल network interconnection के लिए किया जाता है.

1.  इसका major function होता है network signal को receive करना एक LAN terminal cable segment से और उन्हें regenerate करना और फिर उसी signal को retransmit करना उसकी original strength में एक या उससे ज्यादा cable segment में.

2. Basically repeater signal की strength को regenerate करती है उसे transmit करने से पहले.

3.  Repeaters operate करते हैं OSI model के Physical layer में और ये transparent होते हैं सभी protocols को जो की operate होते हैं इसके ऊपर के layers में.

4.  Repeaters allow करता है एक network को construct होने में जिससे की वो exceed हो सके एक single, physical, cable segment के size limit पर.

5.  Repeater की संख्या कितनी होगी यह एक particular LAN implementation पर निर्भर करती है. एक repeater का इस्तमाल दो या उससे ज्यादा LAN cables segment में हो तब इसके लिए उन्हें समान physical layer protocol में कार्य करना होता है सभी cable segments में.

Repeaters का इस्तमाल Ethernet में

Repeaters का इस्तमाल बेहतर और efficient signal length प्राप्त करने के लिए होता है, इसलिए repeaters को ज्यादा Ethernet में उपयोग किया जाता है.

Ethernet repeater का मुख्य कार्य होता है signal को carry करना एक Ethernet cable से दुसरे तक बिना कोई attenuation या signal strength के loss से.

वहीँ repeater system की मदद करते हैं किसी collision को detect करने में. अगर एक repeater कोई collision को identify करता है, तब ये उस signal को सभी connected ports तक पहुंचाता है.

Repeater का इस्तमाल Ethernet के बहुत से segments को आपस में connect करने के लिए होता है. एक multiport repeater का ज्यादातर इस्तमाल इस चीज़ के लिए होता है. अगर दो host devices के बीच पांच से ज्यादा segments होंगे, तब ऐसे में अक्सर repeaters improper links को detect कर लेते हैं; ऐसे में data flow terminate हो जाता है तब तक के लिए जब जाट की data सही तरीके से accurate या rectify न हो जाये.

Repeaters smart devices होते हैं; वो signals को regulate करते हैं और signal flow को control भी करते हैं. जिससे की wires को बचाया जा सके damage या breakage से.

Repeaters network segments की continuous working को भी enable करता है, अगर कोई segment टूट जाये या वो कोई function करने में असक्षम हो जाये. इसलिए repeaters बहुत ही ज्यादा helpful होते हैं wired networks के smooth functioning में.

वाईफाई रिपीटर क्या है और कैसे काम करते हैं?

WIFI Repeater Kya Hai Hindi

Wireless routers के तरह ही, अब market में wireless repeaters भी उपलब्ध हैं. Wireless repeaters का इस्तमाल wireless signals के range को बढ़ाने के लिए होता है, इसमें और wires या devices को embed करने के कोई भी जरुरत नहीं होती है. यदि आपको एक instant और efficient boost की जरुरत है आपके deteriorating signal strength में, तब आपको एक wireless repeater को आपके computer और WAP के बिच में स्थापित करना होगा.

यदि हम इनकी काम करने की प्रक्रिया को समझें तब Wireless repeaters radio signals को receive करते हैं एक WAP से और उन्हें regenerate करते हैं फिर उन्हें deliver करते हैं frames के form में. Wireless repeaters का इस्तमाल एक operator को offer करता है sufficient convenience जिससे की वो wireless repeater का इस्तमाल कर सकता है ज्यादा access points को add करने की जगह में.

ये repeaters wireless system के एक बहुत ही major weakness को overcome करने में मदद कर सकते हैं. ये major weakness है signal attenuation (signal का कमजोर होना). Wireless repeaters बहुत ही ज्यादा capable होते हैं wireless signal के coverage को बढ़ाने में.

जब एक repeater को place किया जाता है एक remote location में, जहाँ की network signals travel तो कर सकती है, लेकिन बहुत ही ज्यादा weak हो जाती है. इन जगहों में connectivity बढ़ जाती है इन repeaters के इस्तमाल से. उदहरण के लिए अगर एक आदमी travel करता है अपने research project के लिए, तब वो अपने साथ एक wireless repeater carry कर सकता है; जिससे की वो signals regenerate कर सकता है repeater के इस्तमाल से. इससे उसके सभी communication gapes को आसानी से makeup किया जा सकता है और उसे बिना रुकावट के signals मिल सकती हैं.

Star Topology में Repeaters का इस्तमाल

एक LAN में जब प्रत्येक individual unit को एक access प्रदान किया जाता है directly communicate करने के लिए central device या hub से, तब इसे star topology कहा जाता है. Topology की परिभाषा को समझें तब यह एक physical set up होता है जिससे की एक network connection point को establish किया जा सके. इसमें इस central device को कहा जाता है एक multiport repeater. इस repeater का मुख्य purpose होता है की ये allow करें signal को लम्बी दुरी तय करने के लिए. Multiple ports Ethernet repeaters का इस्तमाल star topology cabling के deficiency (दुर्बलता) को कम करने के लिए होता है.

रिपीटर का कार्य

Digital communication systems में, एक repeater ऐसा device होता है जो की digital signal को receive करते हैं एक electromagnetic या optical transmission medium में और फिर उसे regenerate करते हैं उस signal को अगले medium में.

Electromagnetic media में, repeaters attenuation की समस्या को दूर करते हैं जो की free-space electromagnetic-field divergence या cable loss से उत्पन्न होता है. Repeaters के एक series के इस्तमाल से ये signal की extension होने में मदद करता है लम्बी दूरता तय करने के लिए.

1)  Repeaters हटाता है unwanted noise को एक incoming signal से. एक analog signal के विपरीत, original digital signal को और एक बार restore किया जा सकता है चाहे तो कितना भी weak या distorted क्यूँ न हो. Analog transmission में, signals को restrengthened किया जाता है amplifiers से लेकिन इससे noise और information भी amplify हो जाती है.

चूँकि digital signals निर्भर करता है voltage के होने या न होने से, इसलिए वो जल्द ही dissipate हो जाते हैं analog signals की तुलना में इसलिए उन्हें ज्यादा frequent repeating की जरुरत होती है. इसलिए analog signal amplifiers को 18,000 meter intervals की दूरता में लगाया जाता है, वहीँ digital signal repeaters को typically place किया जाता है 2,000 से 6,000 meter की intervals में.

2) एक wireless communications system के, एक repeater में ये चीज़ें होती हैं radio receiver, एक amplifier, एक transmitter, एक isolator, और दो antennas. इसमें transmitter ऐसी signal produce करती है जिसकी frequency भिन्न होती है received signal से. यही frequency offset ही बहुत ही जरुरी होता है strong transmitted signal को दूर रखने के लिए उसे receiver को disable करने से. ऐसे में isolator एक additional protection प्रदान करता है.

वहीँ एक repeater, जिसे की strategically ही locate किया गया होता है high building या किसी पहाड़ के top में, और ये बहुत हद तक wireless network के performance को बढ़ा सकता है जिससे की लम्बी दूरता के लिए आसानी से communication किया जा सके.

3) इन satellite wireless में, एक repeater (जिसे की frequently एक transponder भी कहा जाता है) receive करता है uplink signals और उसे फिर retransmits करता है, अक्सर अलग अलग frequencies में, दुसरे locations को.

4) इन्हें cellular telephone system में भी इस्तमाल किया जाता है, एक repeater एक प्रकार का group होता हिया transceivers का, एक geographic area का जो की collectively ही serve करता है एक system user को.

5) वहीँ एक fiber optic network में, एक repeater में एक photocell, एक amplifier, और एक light-emitting diode (LED) या infrared-emitting diode (IRED) होते हैं प्रत्येक light या IR signal के लिए जिन्हें की amplification की जरुरत होती है. Fiber optic repeaters operate करते हैं बहुत ही कम power levels में यदि हम इनकी तुलना करें wireless repeaters से, और ये बहुत ही ज्यादा simpler और cheaper भी होते हैं. लेकिन इन्हें बनाते वक़्त इस बात को जरुर से ध्यान देना चाहिए की इनकी internal circuit noise को हमेशा minimized किया जाये.

6) Repeaters को commonly इस्तमाल किया जाता है commercial और amateur radio operators के द्वारा जिससे की signals को radio frequency range में extend किया जा सके एक receiver से दुसरे तक. इनमें drop repeaters होते हैं, जो की cells किसी cellular radio के तरह होते हैं, और hub repeaters, जो signals को receive कर उन्हें retransmit भी करते हैं बहुत से directions में.

7) एक bus repeater link करता है एक computer bus को दुसरे bus के साथ जो की दुसरे computer chassis में होता है, जिससे की एक computer से दुसरे computer की chaining की जा सके.

Repeater के Advantages क्या होते है?

1. Connect करना Simple होता है
इन्हें connect करना बहुत ही आसानी से किया जा सकता है. साथ ही खोलना भी.

2. Cost effective
ये ज्यादा costly भी नहीं होते हैं बाकि के network components के जैसे इसलिए ये ज्यादा cost effective होते हैं.

3. इनकी Ability की signal की strength को बढ़ाये
Repeater या Wireless repeater की एक बहुत ही primary advantage यह है की यह wireless signal strength को बढ़ाने में मदद करती है. ये तो आपको पता ही हो गा की जितनी दूरता में computer स्तिथ होगा wireless router से उतनी ही weak होगी wireless signal. ऐसे में यदि एक wireless repeater को place कर दिया जाये computer और router के बिच में तब signal की strength को काफी बढाया जा सकता है.

Repeater के Disadvantages क्या है?

1.  Repeaters ऐसी कोई भी तरीका प्रदान नहीं करती है जिससे की traffic को isolate किया जा सके एक cable segment से दुसरे cable segment के generated traffic को.

2.  जब कोई network एक repeater का इस्तमाल करते हैं cable segment A को connect करने के लिए segment B के साथ तब चाहे या न चाहे segment B में एक station जरुर से होता है जो की signal का destination होता है.

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख रिपीटर क्या है (What is Repeater in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को वाईफाई रिपीटर के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं. यदि आपको यह post Repeater क्या होता है हिंदी में पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

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