Modem क्या है और कितने प्रकार के होते हैं?

क्या आप जानते है मॉडेम का आविष्कार किसने किया और यह कैसे काम करता है. मॉडेम के बारे मं अधिक जानकारी के लिए इस लेख को जरुर पढ़े.

Modem का नाम आपने पहले जरुर सुना होगा. लेकिन क्या आपको सही माईने में पता है की Modem क्या है (What is Modem in Hindi), ये कैसे काम करता है? वैसे एक modem के माध्यम से ही आप अपने computer को available Internet connection के साथ connect कर सकते हैं existing telephone line के माध्यम से. NIC के जैसे, Modem को computer motherboard के साथ integrate करने के लिए इस्तमाल किया जाता है. बल्कि यह एक separate part के रूप में उपलब्ध होता है जिसे की PCI slots में install किया जा सकता है जिन्हें motherboard में आप पा सकते हैं.

वैसे एक modem की ज्यादा जरुरत LAN में नहीं होती है, लेकिन इनकी जरुरत दुसरे internet connection जैसे की dial-up और DSL में जरुर से होती है. Modems के बहुत से प्रकार होते हैं जो की Speed और Transmission rate में एक दुसरे से differ करते हैं. Standard PC modem या Dial-up modems की (56Kb data transmission speed) होती है, Cellular modem (जिन्हें की laptop में इस्तमाल किया जाता है और ये enable करता है connect होने में एक ही समय में ), cable modem (जो की 500 times faster होता है standard modem से) और DSL Modems भी बहुत ही popular होते हैं. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को Modem क्या होता है हिंदी में समझाया जाये जिससे की आप लोगों को इसके विषय में कहीं और ढूंडने की जरुरत नहीं होती है. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

मॉडेम क्या है (What is Modem in Hindi)

Modem Kya Hai Hindi

Modem का Full Form होता है “Modulator / Demodulator.” यह एक ऐसा hardware component होता है जो की allow करता है एक computer या दुसरे device को, जैसे की एक router या switch, को Internet के साथ connect होने के लिए. ये convert करता है या “modulates” करता है एक analog signal को एक telephone या cable wire से digital signal में जिसे की एक computer आसानी से recognize कर सकें. वहीँ Similarly, ये convert करता है outgoing digital data को एक computer या दुसरे device में analog signal में.

आस्खिर मॉडेम की खोज किसने की? 1962 में, पहला commercial modem, AT&T द्वारा Bell 103 के रूप में निर्मित और बेचा गया था. पहले modems होते थे “dial-up,” मतलब की उन्हें एक phone number dial करना होता है ISP के साथ connect होने के लिए. ये modems operate होते हैं standard analog phone lines में और इसमें भी वही समान frequencies का इस्तमाल होता है telephone calls के जैसे, जो की उनकी data transfer rate को limit कर देती है maximum 56 Kbps तक. Dial-up modems को भी local telephone line की full bandwidth की जरुरत होती है, इसका मतलब की voice calls आपके internet connection को interrupt कर सकती है.

वहीँ Modern modems typically DSL और cable modems, होते हैं जिन्हें की “broadband” devices भी कहा जाता है. DSL modems operate करते हैं standard telephone lines के ऊपर, लेकिन ये एक wider frequency range का इस्तमाल करते हैं. ये allow करते हैं higher data transfer rates के लिए यदि हम इसकी तुलना करें dial-up modems से और साथ ही ये phone calls को interfere भी नहीं करती हैं.

Cable modems data को send और receive करते हैं standard cable television lines में, जो की typically coaxial cables ही होते हैं. ज्यादातर modern cable modems support करते हैं DOCSIS (Data Over Cable Service Interface Specification), जो की प्रदान करती है एक efficient तरीका जिससे की TV, cable Internet, और digital phone signals को आसानी से transmit किया जा सके वही समान cable line में.

NOTE: चूँकि एक modem convert करता है analog signals को digital में और vice versa, इसलिए इन्हें ADC या DAC की जरुरत होती है. वहीँ Modems की जरुरत fiber optic connections में नहीं होती है क्यूंकि इनमें signals को transmit किया जाता है digitally शुरुवात से आखिरी तक.

Modem कैसे काम करता है?

जैसे की हम जानते हैं की Modem का full form होता है Modulator – Demodulator. Modems का इस्तमाल एक computer network से दुसरे computer network तक data transfer करने के लिए होता है. इसमें data transfer telephone lines के द्वारा किया जाता है. वैसे तो computer network digital mode में कार्य करता है, वहीँ analog technology का इस्तमाल messages को phone lines के across भेजने के लिए किया जाता है.

Modulator information को convert करता है digital mode से analog mode में transmitting end पर और वहीँ demodulator वही समान information को convert करता है analog mode से digital mode में receiving end पर. Digitizing उस process को कहा जाता है जिसमें की एक computer network के analog signals को convert किया जाता है digital signals में किसी दुसरे computer network में.

जब एक analog facility का इस्तमाल किया जाता है data communication के लिए दो digital devices के बीच तब उन्हें Data Terminal Equipment (DTE) कहा जाता है, modems का इस्तमाल दोनों end में किया जाता है. ऐसे में DTE कोई एक terminal या एक computer भी हो सकता है.

वो modem जो की transmitting end में present होता है वो digital signal को जिसे की DTE के द्वारा generate किया जाता है उसे वो Analog Signal में convert करता है, इसके लिए वो बस carrier को modulate करता है. वहीँ modem जो की receiving end में स्तिथ होता है वो carrier को demodulate करती है और फिर बाद में उस demodulated digital signal hand over किया जाता है DTE में.

दो modems के बीच की transmission medium या तो dedicated circuit हो सकती है या एक switched telephone circuit. अगर एक switched telephone circuit का इस्तमाल किया जाता है, तो modems को connect किया जाता है local telephone exchanges में.

मॉडेम परिभाषा

शुरुवात में Data Terminal Equipment या DTE (इसे computer भी कहा जाता है) send करता है एक Ready To Send या RTS signal, Data Communication Equipment या DCE (जिसे की modem भी कहा जाता है). इसे कई बार एक wakeup call भी कहा जाता है और परिणाम स्वरुप ये send करता है एक Data Carrier Detect या DCD signal receiving modem को. तब फिर signals की series भेजी जाती है इन दोनों के भीतर जब तक की एक communication channel establish न हो जाये. इसी process को handshaking कहा जाता है.

इसके बाद दूसरा modem अब एक Data Set Ready या DSR signal send करता है computer को और फिर ये wait करता है Data Terminal Ready या DTR reply के लिए. जब ये होता है तब first modem एक Clear To Send या CTS signal send करता है computer को और इससे पूरी process start हो जाती है और data आसानी से transmit हो जाती है.

इस प्रक्रिया को पूरी करने के लिए, इन signals को भेजा जाता है plug में स्तिथ अलग अलग pins और इसलिए सभी modems और printers के handbooks एक pin diagram carry करते हैं इसी section में troubleshooting में. इन्हें भी standardized कर दिया गया जब बाकि industry leaders उस standard को agree किया सभी range के peripheral equipment के लिए. इसलिए RS 232 cable को Standard माना जाता है पूरी दुनियाभर में.

फिर भी बहुत्तों के मन में ये सवाल जरुर होगा की आखिर कैसे data को transfer किया जाता है एक computer से दुसरे तक. ऐसा इसलिए क्यूंकि phone lines analog होते हैं वहीँ computers digital होते हैं. आसान शब्दों में एक telephone signal constantly change हो रहा होता है. इसे समझने के लिए एक ऐसे sine wave के बारे में सोचो जो की e Oscilloscope के द्वारा produce किया गया है. ये signal भले ही constant प्रतीत हो, लेकिन असल में ये constantly change हो रहा होता है positive से negative में और फिर उसका उल्टा वो भी smooth curves के series में.

वहीँ दुसरे तरफ, computers केवल वही information को समझ सकती है जिसे की उन्हें binary digits के string के हिसाब से present किया जाये. इसलिए यहाँ पर जो main idea था वो ये की कैसे digital output को analog signal में map किया जाये.

बिना इसके technicalities को ध्यान दिए इसे किया जाता है अलग अलग frequencies को superimpose कर analog signal में (जिसे की हम बाद में Carrier Wave भी कहते हैं). अलग अलग frequencies different groups की binary digits को represent करते हैं इस process में जिसे की modulation कहा जाता है. वहीँ जब इसे transmit कर receiving end में decode किया जाता है तब इसे Demodulation कहा जाता है. असल में दो प्रकार की communication को एक single device के द्वारा achieve किया जाता है जिसमें दोनों modulation और demodulation आते हैं, इसलिए इस device को Modem कहा जाता है.

इससे एक बात तो स्पष्ट होती है की जितनी ज्यादा मात्रा में frequencies को carrier wave में superimpose किया जाये इतनी ही ज्यादा faster तरीके से data को transmit भी किया जा सकता है. इसे दूसरी तरीके से समझें तब ज्यादा data को transmit किया जाता है जब ज्यादा frequencies की जरुरत पड़ती है.

वहीँ एक बात का स्मरण करें की केवल एक limited मात्रा की frequencies को एक समय में send किया जा सकता है और इसे की Bandwidth कहा जाता है. अब तो data बहुत ही बड़ी बड़ी आती है जैसे की pictures, sound और video sequences जिन्हें की regular basis में Internet के माध्यम से transmit किया जाता है.

मॉडेम के प्रकार (Types of Modem in Hindi)

वैसे तो Modems के बहुत से प्रकार होते हैं और जिन्हें की बहुत से तरीकों से categorized किया जाता है. चलिए अब उन्ही के विषय में जानते हैं.

चलिए Categorization जानते हैं इन following basic modem features के आधार में :
1. Directional capacity: half duplex modem और full duplex modem.
2. Connection to the line: 2-wire modem और 4-wire modem.
3. Transmission mode: asynchronous modem और synchronous modem.

Half Duplex और Full Duplex Modems

Half duplex

1. एक half duplex modem permit करता है transmission केवल एक ही direction में वो भी एक ही समय में.

2. अगर एक carrier को detect किया जाता है line में modem के द्वारा, तब ये एक indication देता है incoming carrier में DTE तक जिसे की किया जाता है एक control signal के माध्यम से अपने ही digital interface में.

3. जब तक उन्हें वह indication नहीं मिल जाती, तब तक modem DTE को permission नहीं देता है data transmit करने के लिए.

Full Duplex

1. एक full duplex modem simultaneous transmission को allow करता है दोनों ही directions में.

2. इसलिए इसमें दो carriers होते हैं line में, एक outgoing और दूसरा incoming.

2-Wire और 4-wire Modems

इन modems का line interface का या तो 2-wire connection हो सकता है या फिर 4-wire connection, transmission medium में.

4-wire Modem

1. 4-wire connection में, Wires की एक pair का इस्तमाल outgoing carrier में होता है वहीँ दूसरा pair incoming carrier में इस्तमाल होता है.

2. Full duplex और half duplex modes की data transmission इन 4- wire connection में संभव होता है.

3. जैसे की प्रत्येक दिशा के लिए physical transmission path अलग अलग होता है, इसलिए समान carrier frequency को दोनों की directions में इस्तमाल किया जाता है.

2-wire Modem

1. 2-wire modems वही समान pair की wires का इस्तमाल करते हैं outgoing और incoming carriers के लिए.

2. एक leased 2-wire connection अक्सर सस्ते होते हैं एक 4-wire connection की तुलना में क्यूंकि इसमें केवल एक ही pair की wires subscriber की premises तक extended होते हैं.

3. Telephone Exchange के माध्यम से जो data connection establish होता है वो भी एक 2-wire connection होता है.

4. इन 2-wire modems में, half duplex mode की transmission जो की समान frequency का इस्तमाल करता है दोनों incoming और outgoing carriers में, उसे यहाँ आसानी से implement किया जा सकता है.

5. लेकिन full duplex mode of operation के लिए, ये जरुरी है की दो transmission channels हो, एक transmit direction के लिए वहीँ दूसरा receive direction के लिए.

6. इसे achieve किया जाता है frequency division multiplexing से दोनों different carrier frequencies की. इन carriers को रखा जाता है speech channel की bandwidth के भीतर ही.

Asynchronous और Synchronous Modems

Asynchronous Modem

1. Asynchronous modems start और stop bits के मदद से आसानी से data bytes को handle कर सकते हैं.

2. इसमें कोई separate timing signal या clock नहीं होता है modem और DTE के बिच में.

3. इसमें internal timing pulses को repeatedly synchronized किया जाता है Start Pulse के leading edge के साथ.

Synchronous Modem

1. Synchronous modems आसानी से एक continuous stream of data bits को control कर सकते हैं लेकिन इन्हें एक clock signal की जरुरत होती है.

2. इसमें data bits हमेशा synchronized होती है clock signal से.

3. इसमें separate clocks होते हैं data bits के लिए जिन्हें की transmit और receive किया जाता है.

4. Data bits की synchronous transmission के लिए, DTE अपनी internal clock और supply को समान ही दी जाती है modem में.

मॉडेम के उपयोग

Basic modulation techniques जिन्हें की एक modem के द्वारा इस्तमाल किया जाता है Digital Data को Analog signals को convert करने के लिए:

  • Amplitude shift keying (ASK).
  • Frequency shift keying (FSK).
  • Phase shift keying (PSK).
  • Differential PSK (DPSK).

इन techniques को binary continuous wave (CW) modulation भी कहा जाता है.

1.  Modems को हमेशा pairs में ही इस्तमाल किया जाता है. कोई भी system चाहे वो simplex, half duplex या full duplex हो उनमें एक modem की जरुरत जरुर से होती है वो भी transmitting और receiving end में.

2.  इसलिए हम कह सकते हैं की एक modem एक electronic bridge के जैसे act करते हैं दो दुनिया के बिच में – पहला दुनिया जो की purely digital signals का होता है और वहीँ दूसरा एक established analog की दुनिया.

मॉडेम के कार्य

Modems को असल में users को internet के साथ connect करने के लिए और Fax भेजने के लिए इस्तमाल किया जाता था. लेकिन बात यदि अभी करी जाये तब modems का अब बहुत से businesses में कई applications में उपयोग किया जाने लगा है. इसके कुछ ख़ास applications हैं जैसे की data transfers, remote management, broadband backup, Point of Sale, Machine to Machine और ऐसे कई. वैसे अधिकतर solutions backend में स्तिथ होते हैं इसलिए users से hidden होते हैं लेकिन ये backend से ही काम करते हैं और हमारा जीवन easier बनाते हैं प्रतिदिन. नीचे मैंने ऐसे ही कुछ उदाहरणों का इस्तमाल किया है.

Point of Sale (PoS)

PoS का full form होता है Point of Sale. यह एक बहुत ही heavily इस्तमाल किया जाने वाला application है जिसे की ज्यादातर consumer हर दिन इस्तमाल करते हैं. जब भी आप कहीं किसी दुकान में credit card या debit card का इस्तमाल कर pay करते हैं तब वहां पर वो एक modem (dial-up या broadband) का ही इस्तमाल करते हैं और data transfer के पीछे.

Point of Sale के Examples
Credit Card Payment Terminal restaurants में, movie theaters, या retail stores में,
Train Stations में Ticketing machines, bus stations, और airports में, Pre-pay gas pumps, ATM cash machines

Remote Management, Maintenance, & Logistics

Modems को remote locations में install किया जा सकता है off-site locations में, tight enclosures, या sensitive locations के भीतर. कुछ applications को remotely ही controlled किया जा सकता है modem की सहायता से और इसमें user को actual location तक जाने की जरुरत ही नहीं होती है. इससे दोनों time और पैसों की बचत होती है, साथ ही ये accidents होने से भी बचाता है या ऐसे issues से जिसमें की quick actions की जरुरत होती है और instant configuration changes जरुरत पड़ने पर.

Remote Management, Maintenance or Logistics के Examples
1. Stoplight Timing Control पर – इससे traffic flow को regulate करने के लिए headquarters से किया जा सकता है, जिसमें signal timing को बदल सकने की ability होती है.

2. Roadside Digital Signs को बदलना – इसमें ऐसी ability जिससे की messages को headquarters से बदला जा सके.

3. Grocery Store Freezer और Cooler Call Center – temperature को monitor कर सकने की ability और साथ में status भी, इसके अलावा automatically alert receive करना.

4. Safe company – Temperature को check कर सकने की ability.

5. Golf Course की Irrigation system – Sprinklers की usage की timings को control करना और साथ में उनके consumption को monitor करना.

6. Vending machine inventory और status – ये जान पाना की किन चीज़ों की जरुरत है site को पहुँचने से पहले.

7. Gas/Petrol station की maintenance – जब एक credit card operated pump down हो तब automatically ही एक alert को relay कर दिया जाये एक central point को वो भी 24 hours के लिए दिन में.

Data Transfers

बड़े बड़े companies में एक headquarter location होता है जहाँ पर की सभी data को centrally locate किया गया होता है. इसका मतलब है की सभी दुसरे location प्रतिदिन data send करते हैं Daily basis में उस HQ को. Dial-up modem solutions बहुत ही ideal इसलिए होते हैं क्यूंकि उन्हें programmed किया जा सकता है प्रत्येक दिन data को secure connections के साथ भेजा जा सके. इससे data transfer की failure में काफी कमी आती है, साथ में ये बहुत ही cheaper भी होते हैं.

Data transfers के Examples
1. Data की Synchronization एक headquarter location में दुसरे branches से

2. Daily Sales information automatically ही भेजा जाये headquarter location को दुसरे सभी branches से.

Machine से Machine (M2M) Communication

Machine से Machine solutions में typically एक communications link होता है जो की connect करता है दो machines (computers, electronic devices) को एक दुसरे के साथ और जो की सक्षम हो data को transfer करने में जब उनकी जरुरत पड़े. इसमें कोई भी इंसानी interference की जरुरत ही नहीं पड़ती है.

Machine से Machine communication की example
Medical devices जो की test results को transfer करते हैं Doctor के computer को जो की उनके office में स्तिथ होता है.

दुसरे Applications क्या हैं

ऐसे बहुत से अलग अलग applications हैं जहाँ पर की modems का इस्तमाल किया जाता है. तो चलिए उन्ही के विषय में जानते हैं.

1. Home security monitoring में – इसमें एक modem का इस्तमाल किया जाता है voice message भेजने के लिए एक telephone/mobile को जब alarm बंद हो जाये.

2. Cell phone tower maintenance में circuits पर

3. Gasoline vapor containment system में

4. Property listings में

5. Cinema screening approval में – एक serial port modem का इस्तमाल किया जाता है एक coded key भेजने के लिए ये authorize करने के लिए की कौन सी film को run किया जाये screen पर.

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख मॉडेम क्या है (What is Modem in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को मॉडेम फुल फॉर्म के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या Internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं. यदि आपको यह post मॉडेम के प्रकार हिंदी में पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

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