USB क्या है और कितने प्रकार के है?

USB के बारे में शायद आप सभी जानते ही होंगे लेकिन क्या आपको पता है की ये यूऍसबी क्या है (What is USB in Hindi)? इसके कितने प्रकार मेह्जुद हैं? और इसका कैसे इस्तमाल करें? यदि आपका भी यह सब doubt है तो मेरे हिसाब से आपको ये Post पूरी तरह से पढनी चाहिए. USB का full form होता है Universal Serial Bus, जो की एक plug-and-play interface होता है और इसके मदद से ये computer को दुसरे devices और peripherals के साथ communicate करने में मदद करता है.

USB-connected devices एक बहुत ही बड़े range को cover करता है जैसे की keyboards, mouse, music players और flash drives. इस USB cable की मदद से computer को दुसरे device जैसे की printer, monitor, scanner, mouse और keyboard के साथ जोड़ा जाता है. ये USB interface का एक मुख्य भाग है, जिसमें की बहुत से अलग अलग प्रकार के ports, cables और connectors होते हैं.

इन USB connector को इसलिए develop किया गया ताकि computer और दुसरे devices को आसानी से connect किया जा सके. USB interface के आविस्कर के पूर्व बहुत से variety के connectors हुआ करते थे. लेकिन इसके आने के बाद पूरा नजरिया ही बदल गया है क्यूंकि इन USB Cables के बहुत से benefits मेह्जुद हैं जैसे की इन्हें आसानी से plug-and-play किया जा सकता है, इसमें data transfer rate (DTR) बहुत ही ज्यादा है, इससे connectors के numbers में भी काफी घटोतरी हुई है. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को भी यूऍसबी क्या होता है के विषय में पूरी जानकारी दे दी जाये जिससे आप लोगों को इसके विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की आखिर ये USB Cable क्या है.

यूऍसबी क्या है (USB in Hindi)

USB Kya Hai Hindi

एक USB port बहुत ही standard cable connection होता है जो की एक interface प्रदान करता है personal computers और consumer electronics devices के बिच. USB का full form होता है Universal Serial Bus जो की industry standard होता है short-distance digital data communications के लिए. USB ports allow करते हैं USB devices को एक दुसरे के साथ connect होने के लिए जिससे की वो आसानी से Digital Data transfer कर सके USB cable के माध्यम से. इसके साथ इनके इस्तमाल से electric power भी supply किया जा सकता है devices के बिच.

USB standard में दोनों wired और wireless versions स्तिथ है लेकिन केवल wired version में ही USB ports और cables होते हैं. सबसे पहले Universal Serial Bus (version 1.0) को commercially सन 1996 के January महीने में release किया गया था. इस industry standard को जल्द ही दुसरे बड़े companies जैसे की Intel, Compaq, Microsoft इत्यदि के द्वारा अपना लिया गया था.

USB Ports Devices में कहाँ स्तिथ होते हैं?

प्राय सभी modern computers में कम से कम एक USB port तो होता ही है, यहाँ पर कुछ ऐसे ही typical locations के बारे में मैंने बताया है जहाँ की आप एक computer में इन USB port को locate कर सकते हैं.

  • Desktop computer
    एक desktop computer में अक्सर दो से चार ports होते हैं सामने के तरफ और दो से आठ ports होते हैं पीछे की तरफ.
  • Laptop computer
    एक laptop computer में उसके sides में एक से चार ports स्तिथ होते हैं.
  • Tablet computer
    अगर एक tablet में USB port होता है तब ये अकसर वही charging port ही होता है.
  • Smartphone
    बहुत ही कम smartphones में USB port मेह्जुद रहता है, लेकिन बहुत सारे लोग USB port का इस्तमाल अपने phone को charge करने के लिए करते हैं.

USB Devices क्या है

आज हम लगभग लाखों के तादाद में अलग अलग USB devices का इस्तमाल करते हैं जिसे ही हम अपने computer के साथ connect करके इस्तमाल कर सकते हैं. ये USB Devices उन्हें कहा जाता है जो की USB Technology का इस्तमाल अपने operations को सुचारू रूप से करने के लिए करते हैं. यहाँ में कुछ ऐसे ही USB devices के बारे में लिखने जा रहा हूँ जिन्हें की हम अपने रोजमर्रा के जिंदगी में इस्तमाल करते हैं.

  • Digital Camera
  • External drive
  • iPod or other MP3 player
  • Keyboard
  • Keypad
  • Microphone
  • Mouse
  • Printer
  • Joystick
  • Jump drive aka Thumb drive
  • Scanner
  • Smartphone
  • Tablet
  • Webcams

इन USB interface को सबसे पहले मध्य 1990s में develop किया गया और उन्हें USB Implementers Forum (USB-IF) के द्वारा standardized किया गया. ये standards के अनुसार दो मुख्य प्रकार के connectors मेह्जुद हैं जो की हैं A-type और B-type. इन USB connector को जानबुझकर design किया गया है ठीक तरीके से connect होने के लिए. इन्हें गलत तरीके से connect करना एक तरह से नामुमकिन ही है. इसलिए users के आसानी के लिए USB icon को Plug के ऊपरी तरफ imprint किया जाता है, जो की visually किसी को आसानी से दिखाई पड़ सकता है. इसके साथ USB standards ये पहले से ही specify कर देता है कोन का connector किस प्रकार के extension cable पर fit बैठेगा.

अब तो USB Connectors के बहुत सारे version मेह्जुद हैं जो की अपने अपने DTRs के हिसाब से vary करते हैं, उदहारण स्वरुप USB 1.0 जिसकी DTR होती है 1.5 Mbps और 12 Mbps, USB 2.0 जिसकी DTR होती है 480 Mbps, और USB 3.0, or SuperSpeed, जिसकी DTR होती है 5 Gbps.

USB interface के इस्तमाल से बहुत से पूर्व interfaces, जैसे की serial और parallel ports, individual power chargers portable devices के लिए. USB connectors का इस्तमाल अब ऐसे devices जैसे की network adapters और portable media players, video game consoles के तरह और smartphones में किया जा रहा है.

Types of USB Cable in Hindi

Types of USB Cable in Hindi

ये doubt आप में से बहुतों के मन में आ सकता है की यदि USB universal है तब इसके इतने ज्यादा types क्यूँ मेह्जुद हैं ? ये बहुत ही बढ़िया सवाल है लेकिन जवाब भी इसका उतना ही आकर्षक है जो की कुछ इसप्रकार है की सभी USB Cables के अलग अलग functions होते हैं, mainly नए नए devices के हिसाब से उनके साथ compatible होने के लिए ज्यादा बेहतर specs वाले USB Cable को बनाया जाता है. यहाँ मैंने ऐसे ही कुछ USB Cable के विषय में बताया है.

Type-A: प्राय सभी cables में एक type-A connector एक छोर पर होता ही है, प्राय सभी peripherals (जैसे की keyboards और mice) में एक type-A connector होता ही है, personal computers में usually multiple type-A ports पाया जा सकता है, और कई दुसरे devices और power adapters type-A port का इस्तमाल data transfers और charging के लिए करते हैं.

Type-B: ये दिखने में almost square connector जैसे होता है, इसका इस्तमाल मुख्यतः printers और दुसरे powered devices के लिए होता है जिसे की computer के साथ connect किया जाता है. ये Type-A के तुलना में बहुत ही कम इस्तमाल में लाया जाता है.

Mini-USB: ये एक standard connector type होता था mobile devices के लिए जब micro-USB type नहीं हुआ करते थे. जैसे की इसके नाम से पता चल रहा है की mini-USB बहुत ही छोटे हुआ करते हैं regular USB की तुलना में, और ये अब भी कुछ ऐसे cameras में इस्तमाल किये जा रहे हैं जहाँ की अब भी non-standard connectors का इस्तमाल किया जा रहा है.

Micro-USB: ये अभी के Mobile और दुसरे portable devices में इस्तमाल किया जाने वाला standard USB Cable है. इसे सभी Manufactures के द्वारा इस्तमाल में लाया जा रहा है लेकिन बस Apple को छोड़कर.

Type-C: ये एक reversible cable है जिससे की higher transfer rates और ज्यादा power पाया जा सकता है previous USB types के मुकाबले. इसके बेहतरीन features के वजह से इसे लगभग सभी standard laptops, desktop, tablets और Smartphones में इस्तमाल में लाया जा रहा है.

USB 3.0 क्या है

USB 3.0 अभी latest USB standard के अनुसार सबसे faster transfer rates प्रदान कर रही है, इसके साथ ये अपने पूर्व USB Version के साथ भी compatible है. ये fully compatible तो है लेकिन इसके features को पाने के लिए सभी components का USB 3.0 compatible होना बहुत ही जरुरी है. इन USB 3.0 Cables में एक extra pin available होता है जो की allow करता है higher transfer speed के लिए. पुराने type b और micro versions को हम USB 3.0 के port में इस्तमाल तो कर सकते हैं लेकिन USB 3.0 जैसे Speed हासिल नहीं कर सकते. ये एक बहुत ही emerging standard है जो की technology के साथ बदल भी रहा है, धीरे धीरे ये और भी fast हो रहा है.

USB On-The-Go (OTG) क्या है

USB OTG एक बहुत ही नयी standard है जो की mobile और दुसरे portable devices को allow करते हैं एक USB hosts के जैसे काम करने के लिए.

उदहारण के तोर पर अगर आपके पास एक external drive, या फिर एक Smartphone, या एक Laptop हो. यहाँ पर यदि आपको कुछ files को external drive से smartphone को move करना है तब यहाँ पर आप क्या करोगे ? इसका बहुत ही आसान जवाब है की हम पहले वो files को external drive से laptop को transfer करेंगे, फिर laptop से smartphone को.

वहीँ ये OTG Cable काम पर आती है जहाँ हम OTG USB Cable की मदद से हम External drive को अपने Smartphone में host कर सकते हैं, इसके लिए हमे Laptop की भी जरुरत नहीं पड़ेगी.

USB Ports की Transfer Speeds

जैसे की हम ये जानते ही हैं की अलग अलग USB Ports के हिसाब से अलग अलग transfer speed होते हैं. जिनके बारे में हम यहाँ पर जानेंगे.

USB 1.x : – ये एक external bus standard है जो की 12 Mbps की data transfer rates को support करता है और ये capable होता है करीब 127 peripheral devices को support करने में.

USB 2.0 : – इसे hi-speed USB के नाम से भी जाना जाता है. इसे सन 2001 में पहली बार इस्तमाल में लाया गया था, फिर बाद में दुसरे company जैसे की Compaq, Hewlett Packard, Intel, Lucent, Microsoft, NEC और Phillips के द्वारा इस्तमाल में लाया गया. Hi-speed USB करीब 480 Mbps तक की transfer speed को support करता है. Hi-speed USB backward compatible होते हैं जिसका मतलब की ये USB 1.0 और 1.1 वाले devices और cables को support करते हैं.

USB 3.0:- इन्हें SuperSpeed USB भी कहा जाता है. इसे सबसे पहली बार सन 2009 में Buffalo Technology के द्वारा बनाया गया था. लेकिन पहली certified devices के available न होने के कारण इसे 2010 में ही सबसे पहले इस्तमाल में लाया गया था. USB 3.0, USB 2.0 technology की तुलना में ज्यादा speed और बेहतर performance प्रदान करता है. इसके साथ इसमें improved power management होता है और इसकी bandwidth capability भी बेहतरीन है. इसमें एक साथ दो unidirectional data paths में data को receive और send भी किया जा सकता है. USB 3.0 करीब 5.0 Gbps की Transfer Speed को support करता है.

USB 3.1 : – इन्हें SuperSpeed+ भी कहा जाता है. इसे सबसे पहली बार सन 2013 में market में available कराया गया. ये फ़िलहाल सबसे latest version है USB Protocol की. USB 3.1 करीब 10 Gbps की Transfer Speed को support करता है.

USB Port काम न करने पर क्या करें ?

हमेशा सभी चीज़ें computer में smoothly काम नहीं कर सकती हैं. कुछ न कुछ तो हमेशा तकलीफ होती ही है. ठीक उसी तरह से USB Ports भी कभी कभी ठीक से काम नहीं करते हैं. तो आज में आप लोगों को कुछ ऐसे tips देने वाला हूँ जिनका इस्तमाल आप ऐसे समय में कर सकते हैं.

USB Port के ठीक से न काम करने के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे की sudden उसका काम बंद कर देना, ऐसे problems को hardware या software failure से track किया जा सकता है. यहाँ में आपको कुछ tips देने वाला हूँ.

  • सबसे पहले अपने Computer को Restart कर लें.
  • या फिर आप Physically USB Port को inspect कर सकते हैं.
  • इसके बाद आप अलग अलग USB Port में plug को डाल सकते हैं और check कर सकते हैं की ये ठीक से काम कर रहा है या नहीं.
  • या फिर किसी दुसरे USB Cable को इस्तमाल करके देख सकते हैं की आपका USB Cable सही है या नहीं.
  • अपने Device को किसी दुसरे के Computer में insert करके देख सकते हैं.
  • या फिर आप अपने System को Update भी कर सकते हैं क्यूंकि कई बार outdated drivers के कारण भी USB Port काम नहीं करता है.

Device Class क्या है ?

सभी USB device की एक device class होती है जो की ये define करती है की उस device की functionality और purpose क्या है. यहाँ पर host load कर देता है device class के हिसाब से suitable driver. जो most common device classes हैं वो कुछ इसप्रकार हैं :

  • Human Interface Device (HID)
    इस class को generally वही devices इस्तमाल करती हैं जो की Interrupt Transfer का इस्तमाल करती है data communication के लिए. उदहारण के लिए keyboard, mouse और joystick.
  • Mass Storage
    ये class का इस्तमाल वो करते हैं जिन Devices को बड़ी मात्रा में data को transfer करने के जरुरत होती है और वो भी Bulk Transfer के द्वारा. उदहारण के लिए USB flash drive, memory card reader और external hard disk.
  • Audio
    ये class का इस्तमाल audio devices के द्वारा होता है जैसे की microphone, speaker, external sound card इत्यादि. ये device data communication के लिए Isochronous Transfer का इस्तमाल करते हैं.
  • USB Hub
    इनका इस्तमाल USB hubs के द्वारा होता है number of ports को expand करने के लिए.
  • Image
    इन्हें image के लिए इस्तमाल किया जाता है जैसे की webcam और scanner में.
  • Printer
    इन्हें printing के लिए इस्तमाल किया जाता है जैसे की Laser printer, inkjet printer और CNC machines में.
  • Wireless
    इन्हें external adapter के द्वारा wireless communication के लिए इस्तमाल किया जाता है. उदहारण के लिए Bluetooth, 802.11.

USB के Advantages क्या हैं:

  • इस्तमाल करने में आसानी
    USB को इसीलिए develop किया गया क्यूंकि ये Users के द्वारा आसानी से इस्तमाल किया जा सके.
  • Multiple devices के लिए Single Interface
    USB के versatile nature के वजह से ये अलग अलग devices के साथ में connect होने में आने वाली complexity को दूर करता है. बड़ी ही आसानी से ये दुसरे peripherals के साथ connect हो जाता है.
  • Auto-configuration
    यहाँ पर host device की operating system पर एक बार ही USB device driver को install करने की जरुरत है. बाद में जब भी वो peripheral device को system के साथ connect किया जायेगा तब automatically उसका driver load हो जायेगा जिससे वो plugged in device को configure कर लेगा. इससे आसानी से उसे इस्तमाल किया जा सकता है.
  • Expand करने में आसानी होना
    आमतोर से personal computers (Motherboards) में 3 से 4 USB ports होते हैं. और अगर भविस्य में अधिक USB ports की जरुरत भी पड़े तो USB hubs के इस्तमाल से हम external ports add कर सकते हैं.
  • Compact Size का होना
    USB sockets की size बहुत ही छोटी होती है अगर हम उसकी तुलना RS232 और parallel ports से करें तब.
  • External power की जरुरत नहीं
    USB devices को चलाने के लिए external power की जरुँरत नही नहीं पड़ती है क्यूंकि उन्हें उस हिसाब से बनाया जाता है जिससे वो host device को 5V DC प्रदान कर सके.
  • Speed
    USB दुसरे Cables के तुलना में बहुत ही ज्यादा Speed और eficient होते हैं. ये लगभग 1.5Mbit/s से 5Gbit/s तब की data transfer rate की speed प्रदान करती हैं.
  • Reliability
    ये USB protocol बड़े आराम से data transfer के दोरान error पकड़ सकते हैं जिससे ये notify कर देते हैं Transmitter को data retransmit करने के लिए. आमतोर से generic USB driver और specific driver software error-free data communication होने के लिए ensure करते हैं.
  • Low cost
    इसके versatile nature और high demand, होने के कारण ये बहुत ही सस्ते में manufacture किया जा सकता है. इसके साथ इसके components की ज्यादा availability होने के कारण इसके manufacturing को आसानी से Scale किया जा सकता है.
  • Low power consumption करता है
    USB devices आमतोर से +5V में ही काम करता है और बहुत ही काम current consume करते हैं जो की कुछ Milliampere में होते हैं.

इतने सारे advantages के होने से भी इसके कुछ disadvantages भी मेह्जुद है तो चलिए उसी के विषय में जानते हैं.

USB के Disadvantages क्या हैं:

  • Speed
    नए technology USB 3.0, के होने से 5Gbits/sec तक की data transfer rate तक पहुंचा जा सकता है. लेकिन ये फिर भी Gigabit Ethernet से बहुत ही कम है.
  • Peer to Peer Communication का होना
    USB standard के हिसाब से केवल host और peripheral के बिच ही communication हो सकती है. यहाँ दो hosts directly communicate नहीं कर सकते हैं एक दुसरे के साथ. और ये peripheral के साथ भी होता है. लेकिन वहीँ interfaces जैसे की FireWire peripheral से peripheral communication को support करता है .
  • Distance का न होना
    USB standards के हिसाब से connecting cable ज्यादा से ज्यादा 5 meters तक ही लम्बी हो सकती है, इसके बाद USB hubs का इस्तमाल होता है connectivity को expand करने के लिए.
  • Broadcasting
    Universal Serial Bus में हम broadcasting नहीं कर सकते हैं, यहाँ केवल individual messages को भी communicate किया जा सकता है host और peripheral के बिच.

मुझे पूर्ण आशा है की मैंने आप लोगों को यूऍसबी क्या है (USB in Hindi) के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को USB Cable के बारे में समझ आ गया होगा. मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Share करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

मेरा हमेशा से यही कोशिश रहा है की मैं हमेशा अपने readers या पाठकों का हर तरफ से हेल्प करूँ, यदि आप लोगों को किसी भी तरह की कोई भी doubt है तो आप मुझे बेझिजक पूछ सकते हैं. मैं जरुर उन Doubts का हल निकलने की कोशिश करूँगा. आपको यह लेख USB क्या है कैसा लगा हमें comment लिखकर जरूर बताएं ताकि हमें भी आपके विचारों से कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिले.

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11 COMMENTS

  1. बहुत अच्छी पोस्ट है सर
    पहली बार पड़ा इतना usb के बारे में

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