डिवाइस ड्राइवर क्या होता है और इसके प्रकार

डिवाइस ड्राइवर क्या है? Computer का एक ऐसा भी हिस्सा है जो की हमेशा अनदेखा किया जाता है. जी आपने सही पढ़ा, यहाँ पर हम ऐसे ही एक महत्वपूर्ण part के विषय में जानने वाले हैं जिसे की Computer Driver या Device Driver भी कहा जाता है.

क्या आप जानते हैं की ये कंप्यूटर ड्राइवर क्या होता है और कैसे काम करता है? यदि नहीं तब आज का यह article आपके लिए बहुत बहुत रोचक होने वाला है क्यूंकि आज हम Computer Driver से जुडी वो सभी छोटी बड़ी बातों के विषय में जानेंगे जो की बहुत जरुरी है.

जब बात Drivers की होती है, तब इसका मतलब वो गाड़ी चलने वाले drivers से बिलकुल भी नहीं जिन्हें की आप रोज roads में देखते हैं. एक device driver ऐसा program होता है आपके computer में जो की control करता है hardware के एक piece को जो की आपके computer के साथ attached होता है.

Computer में लगभग सभी चीजों के लिए एक device driver की जरुरत होती है जिससे की वो सही ढंग से function कर सकें. यदि किसी hardware piece की कोई driver नहीं है, या उसमें सही driver ही नहीं है, तब वो hardware का piece पूरी तरह से useless होता है system के बिकी हिस्सों के लिए.

ये ऐसा होगा की आप एक बच्चे को car में बिठाये हो और उसे उस car को चलाने के लिए कह रहे हों. उन्हें तो car और उसकी driving के विषय में कोई भी idea नहीं है बिना कोई instruction के. यही काम तो करते हैं device drivers आपके computer में, वो computer को एक set of instructions देते हैं की कैसे एक device का सही इस्तमाल किया जाये.

डिवाइस ड्राइवर क्या है (What is Device Driver in Hindi)

Device Driver Kya Hai Hindi

डिवाइस ड्राइवर को कंप्यूटर ड्राइवर, या फिर हार्डवेयर ड्राइवर भी कहा जाता है. यह एक group of files होता है. यह अलग अलग कंप्यूटर हार्डवेयर को ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ कम्यूनिकेट करने में मदद करता है.

बिना drivers के, computer कभी भी data को send और receive नहीं कर सकता है. जैसे की प्रिंटर को डाटा भेजना हो गया.

अगर एक appropriate driver को install न किया जाये तब device सही तरीके से function भी नहीं करेगी.

कंप्यूटर ड्राइवर के प्रकार

Device drivers असल में छोटे computer programs होते हैं जो की allow करते हैं operating systems को hardwares के साथ communicate करने के लिए जो की computer के साथ connected हों.

वैसे तो बहुत सारे device drivers के types मेह्जुद हैं अलग अलग computer hardware के लिए. वहीँ एक computer की basic functionality के हिसाब से कुछ selected drivers ऐसे होते हैं जो की सभी computers में जरुर से होने चाहिए. चलिए इनके विषय में जानते हैं.

BIOS

BIOS (basic input/output system), ये most basic computer driver होता है existence में और इसे design किया गया है first program के हिसाब से जो की boot होता है जब एक PC को turns on किया जाता है.

इस BIOS को store किया जाता है memory में जो की built होता है motherboard में और इसे design किया गया होता है boot करने के लिए उस hardwares को जो की connected होते हैं PC के साथ, इनमें होते हैं hard drives, video display output, keyboard और mouse.

Motherboard Drivers

Motherboard drivers ऐसे छोटे programs होते हैं जिन्हें की read किया जाता है या तो Windows या Linux के द्वारा और ये allow करता है basic computer functions के लिए वहीँ operating system के भीतर.

ये drivers में normally ऐसे programs included होते हैं जो की allow करते हैं broadband ports, USB ports और I/O ports, mouse और keyboard के लिए. Motherboard के बनावट के हिसाब से, इन drivers में कुछ basic drivers भी हो सकते हैं video और audio support के लिए.

BIOS बिलकुल भी समान नहीं होते हैं motherboard drivers के जैसे.

Hardware Drivers

Hardware drivers ऐसे programs होते हैं जिन्हें की design किया गया होता है जो की allow करते हैं computer hardware के pieces को, जैसे की expansion slots, को computer में function करने के लिए.

Video cards, sound cards, network cards और दुसरे expansion cards आते हैं driver discs के साथ जिससे hardware के installation process को ease किया जा सके. दुसरे devices, जैसे की कुछ प्रकार के digital cameras और MP3 players, उनमें PC drivers programmed होते हैं उनके software के साथ ही, जो की उन्हें इस्तमाल करने में आसान बनाते हैं personal computers में.

Virtual Device Drivers

Virtual device drivers बहुत ही अलग होते हैं most drivers से. जहाँ majority के drivers में, hardwares के हिसाओं को allow किया जाता है work करने के लिए एक particular operating system के साथ, वहीँ virtual device drivers emulate करते हैं एक piece of hardware को और essentially trick करते हैं computer को ये सोचने में की वो read कर रहा है एक piece of actual hardware को ही.

एक particularly popular use होता है इन virtual device drivers का वो भी. ISO files को बिना किसी actual disc के ही, ज्सिमें इन्ही में से एक drivers को emulate किया जाता है एक CD या DVD drive में.

ड्राइवर कैसे काम करता है?

Device Driver का मुख्य काम होता है एक translator का काम करना Operating System और एक device के बीच में. Operating System device के साथ communicate करना चाहता है मुख्य रूप से दो कारणों के लिए, जो की हैं data को send करने के लिए और Data को receive करने के लिए.

लेकिन इसमें issue ये है की एक Operating System होता है एक software और device होता है एक hardware. दोनों अलग अलग languages का इस्तमाल करते हैं और एक दुसरे की भाषा नहीं समझते हैं.

ऐसे में driver इन दोनों के बीच में एक translator का part निभाता है जिससे की ये दोनों आसानी से एक दुसरे के साथ communicate कर सकें.

सबसे पहले Operating System explain करता है Driver को की क्या send या receive करना चाहता है hardware से. अब device drivers समझ जाता है requirement को और explain करता है आगे Hardware को.

इसमें keyboard, Scanner, printer इत्यादि को peripheral devices कहा जाता है और device driver या hardware driver इन peripheral devices की मदद करते हैं OS (Operating System) के साथ connect होने के लिए.

चलिए एक उदाहरण से समझते हैं की एक Driver कैसे काम करता है :

मान लीजिये की आपको कुछ print करवाना है जिसमें की एक printer application की जरुरत होती है. सबसे पहले, ये application call करती है एक function को जो की implemented होता है OS के द्वारा. Next, Operating System एक function को call करता है जिसे की Driver के द्वारा implement किया गया होता है और फिर driver communicate करता है printer के साथ.

ये फिर required data प् जाता है और उसे send करता है application के पास Operating System के माध्यम से.

चलिए Drivers को और भी oversimplified तरीके से समझते हैं :

1. ये बिलकुल भी आवश्यक नहीं है की जो companies device को design करती है उन्हें ही drivers को लिखना भी पड़ेगा. ऐसे बहुत से cases हैं, जहाँ की एक device को design किया गया होता है एक published hardware standard के हिसाब से. इसका मतलब की driver को Microsoft भी लिख सकता है, और device designer को कोई driver लिखने की जरुरत भी नहीं होती.

2. सभी drivers directly एक device के साथ communicate नहीं करते हैं. एक given I/O request (जैसे की data को read करना एक device से) के लिए बहुत से drivers layered होते हैं एक stack में, जो की participate करते हैं उस request में.

इस stack को visualize कर सकते हैं एक conventional way में जहाँ की first participant top में होता है और last participant होता है bottom में. इसमें stack के कुछ drivers participate कर सकते हैं उस request को transform कर एक format से दुसरे में.

ये drivers directly communicate नहीं करते हैं device के साथ; वो बस manipulate करते हैं request को और pass कर देते हैं request को drivers के पास जो की stack के lower में स्तिथ होते हैं.

3. वो अकेला driver उस stack का जो की directly communicate करता है device के साथ वो होता है function driver; वहीँ जो drivers perform करते हैं auxiliary processing उन्हें filter drivers कहा जाता है.

4. कुछ filter drivers observe और record करते हैं उन information को I/O के विषय में लेकिन ये actively participate नहीं करते हैं उनमें. उदाहरण के लिए, कुछ filter drivers act करते हैं verifiers के तोर पर ये सुनिश्चित करने के लिए की stack के दुसरे drivers सही ढंग से I/O request को handle कर रहे हैं या नहीं.

Windows Drivers के प्रकार

Microsoft Windows drivers के मुख्य रूप से दो types के Drivers होते हैं :

User-mode Drivers

ये execute होता है user mode में, और ये typically प्रदान करता है interface एक Win32 application और kernel-mode drivers या दुसरे operating system components के बीच.

उदाहरण के लिए, Windows Vista में, सभी printer drivers execute होते हैं user mode.

Kernel-mode Drivers

ये execute होता है kernel mode में, जो की एक part होता है executive का. इसमें kernel-mode operating system components होता है जो की manage करता है I/O, Plug और Play memory, processes और threads, security, और बहुत कुछ.

Kernel-mode drivers typically layered होते हैं. Generally, higher-level drivers typically receive करते हैं data applications से, उस data को filter करते हैं, और फिर उसे pass करते हैं एक lower-level driver को जो की support करता है device functionality को.

कुछ kernel-mode drivers WDM drivers भी होते हैं, जो की confirm करते हैं Windows Driver Model (WDM) को. सभी WDM drivers support करते हैं Plug और Play, और power management को. WDM drivers असल में source-compatible (लेकिन binary-compatible नहीं होते हैं) across Windows 98/Me और Windows 2000 और उनके बाद के operating systems के साथ.

Operating system के जैसे ही, kernel-mode drivers को implement किया जाता है discrete, modular components जिनकी एक well-defined set of required functionalities होती है. सभी kernel-mode drivers supply करते हैं एक set of system-defined standard driver routines को.

Kernel-mode Drivers के प्रकार

Kernel Mode Drivers के basic 3 types होते हैं. जो की हैं highest-level, intermediate, और lowest-level. प्रत्येक driver एक दुसरे से बहुत ही कम differ करता है लेकिन उनकी functionality में बहुत differ करता है.

1. Highest-level Drivers

Highest-level drivers में ऐसे file system drivers (FSDs) होते हैं जो की support करते हैं file systems, जैसे की :

  • NTFS
  • File allocation table (FAT)
  • CD-ROM file system (CDFS)

Highest-level drivers हमेशा depend करते हैं support के ऊपर underlying lower-level drivers से, जैसे की intermediate-level function drivers और lowest-level hardware bus drivers.

2. Intermediate Drivers

ये drivers जैसे की एक virtual disk, mirror, या device-type-specific class driver होते हैं. Intermediate drivers depend करते हैं support पर वो भी underlying lower-level drivers से. Intermediate drivers को subdivided किया जाता है निम्नलिखित तरीके से:

3. Function Drivers

ये control करता है specific peripheral devices को एक I/O bus में.

4. Filter Drivers

ये अपने आपको insert करते हैं above या below function drivers में.

5. Software Bus Drivers

ये present करता है एक set of child devices को, जिसमें की still higher-level class, function, या filter drivers अपने को attach कर सकें.

उदाहरण के लिए, एक driver जो की control करता है एक multifunction adapter जिसमें एक on-board set of heterogeneous devices होते हैं, उन्हें एक software bus driver कहा जाता है.

6. Any system-supplied class Driver

ये export करते हैं एक system-defined class/miniclass interface को, effect में, एक intermediate driver उनके साथ एक या उससे ज्यादा linked miniclass drivers (जिन्हें की minidrivers भी कहा जाता है).
प्रत्येक linked class/minidriver pair प्रदान करता है functionality जो की equivalent होता है एक function driver या एक software bus driver के साथ.

3. Lowest-level Drivers

ये control करता है एक I/O bus जिसमें की peripheral devices connected होते हैं. Lowest-level drivers निर्भर नहीं करते हैं lower-level drivers के ऊपर.

Hardware bus drivers होते हैं system-supplied और usually control करते हैं dynamically configurable I/O buses को.

Hardware bus drivers काम करते हैं Plug और Play manager के साथ जिससे ये configure और reconfigure करते हैं system hardware resources को, सभी child devices जो की connected होते हैं I/O buses के साथ जो की वो driver control करती है.

इन hardware resources में होते हैं mappings device memory के लिए और interrupt requests (IRQs). (Hardware bus drivers subsume करते हैं कुछ functionality को जो की HAL component प्रदान करी होती है Windows NT-based operating system के launch के दौरान जो की Windows 2000 से पहले की बात है.)

4. Legacy Drivers

ये वो drivers होते हैं जो की directly control करते हैं एक physical device को. ये lowest-level drivers होते हैं.

Software Driver क्या है

कुछ drivers ऐसे होते हैं जो की associate ही नहीं होते हैं किसी भी hardware device के साथ.

उदाहरण के लिए, suppose की आपको एक tool लिखना पड़ा जो की access कर सकती हैं core operating system data structures, जिसे की access किया जा सकता है केवल उस code से जो की kernel mode में run करता है.

ये आप कर सकते हैं उस tool को split कर दो components में.

जहाँ पहला component run करता है user mode में और present करता है user interface को. वहीँ second component run करता है kernel mode में और उसके पास access होता है core operating system data के ऊपर.

जो component run करता है user mode में उसे एक application कहा जाता है, और जो component run करता है kernel mode में उसे कहा जाता है एक software driver.

एक software driver बिलकुल भी associated नहीं होता है एक hardware device के साथ.

Software drivers हमेशा run करते हैं kernel mode में.
Software Driver को लिखने का मुख्य कारण ये हैं की इससे protected data के ऊपर access प्राप्त होता है जो की केवल kernel mode में ही available होते हैं. लेकिन device drivers को हमेशा kernel-mode data और resources के ऊपर access नहीं चाहिए होता है. वहीँ कुछ device drivers run करते हैं user mode में ही.

अपने Computer के Computer Drivers को Check कैसे करें?

यदि आप आपने computer के drivers का status check करना चाहते हैं तब इसके लिए आप अपने system के Device Manager का इस्तमाल कर सकते हैं:

चलिए जानते हैं इसे कैसे किया जाये.

1. अपने keyboard में, press करें Windows logo key और R key को एक ही समय में जिससे की Run box को invoke किया जा सके.

2. Type करें devmgmt.msc और Enter press करें Device Manager को access करने के लिए.

3. यहाँ पर आप किसी भी एक particular entry को expand का check कर सकते हैं device/driver status को.

Note यहाँ पर आपको एक common issue देखने को मिल सकता है जब आपको कोई yellow exclamation mark दिखाई पड़े किसी device के ऊपर. ये indicate करता है की Windows detect किया है कुछ problem उस device में.

वहीँ इसे solve करने के लिए हमें उसके device driver को update करना होता है, जिसके लिए आप उसपर right-click कर update driver चुन सकते हैं.

Latest Drivers की हमें जरुरत क्यूँ होती है?

बहुत से समय में Operating Systems में बहुत बदलाव होते है जिससे की वो hardware के साथ deal कर रहा होता है. जब भी ऐसे चीजें होते हैं तब हमें drivers को update करना होता है, जिससे की वो translate कर सकें नयी commands को properly, और साथ में आपके devices उन्हें समझ सकें.

बहुत बार आपके devices को बहुत कुछ सीखना होता है. उदाहरण के लिए. आपके video card को नयी 3D drawing के विषय में सीखना होगा यदि आप नयी technologies का इस्तमाल करना चाहते हैं.

वहीँ आपके video card को इस काबिल बनाने के लिए उसके manufacturer को simply release करना होगा एक updated driver जो की explain करे की कैसे आपका display करें इस नयी प्रकार की drawing को. वहीँ बिना इस latest driver के आपका video card कभी भी ठीक से उस नयी technology को run नहीं कर सकता है properly.

अपने Computer के लिए सही software या Drivers को Locate कैसे करें?

यहाँ पर मैंने ऐसे ही कुछ methods के विषय में बताया है जिससे की आप drivers को locare कर download कर सकते हैं Internet से.

Hardware को पहचानें

Driver को search करने से पहले, इस बात की जानकारी रखें की आपका device का manufacturer कौन है और वो कौन से model का है. यदि आपको किसी internal device के लिए software या drivers की तलाश है अपने computer के लिए, तब वो आपको उस device के manufacturer’s website के support section में ये मिल सकता है.

ये आपको उन CD या DVD में भी मिल सकता है जो की आपको computer खरीदते वक़्त मिला होगा.

Download Location

यदि वो manufacturer जिसने की आपके hardware को बनाया है, वो अब भी business में हैं, तब उसके drivers आपको उसके web page में list हुए दिखाई पड़ सकते हैं.

वहीँ अगर वो hardware device manufacturer अभी और business नहीं करता है, या उसके drivers फिलहाल unavailable है, तब आप third-party companies के drivers का इस्तमाल कर सकते हैं जिनकी user ratings बढ़िया हो.

Computer Drivers या Device Drivers को update कैसे करें?

यदि आप अपने device drivers को update करना चाहते हैं तब इसके लिए मैंने नीचे तीन आसान उपाय बताये हैं, जिनका इस्तमाल कर सकते हैं.

Method 1: Drivers को Update करें manufacturer की website के द्वारा

आप अपने device driver को manually update कर सकते हैं उस device के manufacturer की website पर जाकर, और फिर search कर most recent correct driver को. Driver चुनते वक़्त इस बात का ख़याल रखें की वो driver compatible हो आपके exact device model और Operating System के version के साथ.

एक बार आपने उस device driver को download कर लिया अपने system में, फिर आप double-click कर सकते हैं उस downloaded file को और आपको follow करना होगा on-screen instructions को जिससे की आप driver को install कर सकते हैं.

Method 2: Drivers को Update करें Device Manager के इस्तमाल से

1. सबसे पहले Device Manager को जाना होगा अपने computer में.

2. Double-click करें एक particular entry में उस device को ढूंडने के लिए, फिर आपको device के ऊपर right-click करना होगा और फिर select करें Update driver.

3. Click करें Search automatically पर updated driver software के लिए.

4. Wait करें Windows को सभी updates को detect करने के लिए और फिर follow करें on-screen instructions को जिससे आप उस update को install कर सकते हैं.

बहुत बार Windows automatically detect नहीं कर सकता है driver updates को आपके लिए, ऐसे में आपको कुछ ऐसा उपाय करना होगा जिससे की आप device driver को update कर सकें. जैसे की Third party Softwares.

Method 3: Update करें drivers को automatically third-party software के मदद से जैसे की Driver Easy (Recommended)

यदि आपके पास time, patience और computer skills की कमी है driver को update करने के लिए manually, इसके लिए आप third party software जैसे की Driver Easy का इस्तमाल कर सकते हैं.

Driver Easy एक ऐसा software है जो की automatically recognize करता है आपके system को और उसके लिए सही drivers को खोज भी देता है. यहाँ पर आपको ये जानना जरुरी नहीं की आप कौन से system का इस्तमाल कर रहे हैं, कौन सा operating system run हो रहा है, इत्यादि. वहीँ यहाँ गलत driver install होने का भी chance नहीं होता है. ये software सभी चीज़ों का ख़याल रखता है.

1. Download और install करें Driver Easy.

2. Run करें Driver Easy और click करें Scan Now. Driver Easy फिर आपको computer को scan करता है और detect करता है कोई problem drivers या outdated drivers को.

3. फिर Click करें Update button को जिससे वो automatically download करता है आपके devices के सही driver version को.

या आप click करें Update All जो की automatically download और install करता है सभी drivers को जो की missing या out of date होते हैं आपके system में. लेकिन इस feature के लिए आपको इस software का Pro version खरीदना होगा.

डिवाइस ड्राइवर डाउनलोड

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख डिवाइस ड्राइवर क्या है (What is Device Driver in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को Computer Driver के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

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