ड्रोन कैमरा क्या है और कैसे बनाते हैं?

अभी के समय में ये technological term “ड्रोन कैमरा” आप सभी ने शायद सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं की आखिर सही माईने में ये Drone क्या है? ये कैसे काम करता है?

यदि आपको इन सभी सवालों के जवाब नहीं पता है तब घबराने की कोई बात नहीं है क्यूंकि आज हम इसी अत्याधुनिक gadget के विषय में चर्चा करने वाले हैं. सुनने में तो ये जितना अजीब लगता है उतना ही दिखने में भी लगता है.

सही माईने में यह एक robot ही है जिसे की इंसानों द्वारा control किया जा सकता है. लेकिन ये एक flying robot (उडती रोबोट) होता है. इसे इंसानों ने ही अपने कार्यों को संपादन करने के लिए तैयार किया है.

यह drones वैसे तो बहुत से कार्य कर सकते हैं लेकिन इन्हें मुख्य रूप से उस कार्य के लिए बनाया गया है जिसे की इंसानों द्वारा स्वयं करने में जान जाने का खतरा होता है. वैसे इसके सभी कार्यों के बारे में हम आगे जानने वाले हैं. इसलिए बिना कुछ skip किये article को पूरा पढ़ें. इससे आपको इस latest technological machine के बारे में detailed में पता चल सके.

तो फिर आपको और इंतजार न करते हे चलिए शुरू करते हैं और ड्रोन क्या होता है और कैसे काम करता है के बारे में जानते हैं.

ड्रोन क्या है (What is Drone in Hindi)

Drone Kya Hai Hindi
ड्रोन क्या चीज है

ड्रोन का मतलब क्या होता है? Drones को UAV या Unmanned aerial vehicles भी कहा जाता है. असल में ये miniature robots ही होते हैं जो की उड़ने में सक्षम होते हैं. वहीँ इन्हें control किया जाता है एक remote control system की मदद से.

Army या Military लोगों के लिए, ये UAVs (Unmanned Aerial Vehicles) या RPAS (Remotely Piloted Aerial Systems) होते हैं. वहीँ इन्हें commonly कहा जाता है “drones”.

Drones को ऐसे situations में इस्तमाल किया जाता है जो की इन्सानी पहुँच से परे हो या यूँ कहे तो risky और difficult हो.

ये 24 घंटों की निगरानी कर सकते हैं वो फाई पुरे सप्ताह भर के लिए. प्रत्येक drone लम्बे समय तक निगरानी कर आपको सभी real-time imagery भेज सकता है. इसलिए इसे “eye of the sky” या “आसमान की आंख “ भी कहा जाता है.

Drone technology दिनप्रतिदिन constantly evolve हो रहा है नए नए innovation की मदद से. Unmanned aerial vehicle technology में सभी चीज़ें शामिल हैं जैसे की drone की aerodynamics, materials जिसका इस्तमाल किया जाता है इसे बनाने के लिए, circuit boards, chipset और software, जिन्हें की drone का मस्तिस्क भी कहा जाता है.

Quadcopter क्या है

एक बहुत ही common और popular flying drone designs होती है ये quadcopter. यह एक प्रकार का drone होता है जिसे की lift और propel करने में चार rotors का इस्तमाल किया जाता है.

वैसे quadcopter का concept नया नहीं है, क्यूंकि इन्हें पहले experiment किया गया है सन 1920 में, लेकिन उस समय में सही technology के अभाव से इसकी effectiveness को भारी नुकशान सहना पड़ा.

लेकिन electronic technology के advancement से जैसे की sensors, batteries, cameras और GPS systems, ये quadcopters को अब बहुत ज्यादा इस्तमाल में लाया जा रहा है.

ड्रोन कैसे उड़ता है

Drone Kaise Udta Hai
ड्रोन कैसे उड़ता है

ड्रोन के चार propellers fixed होते हैं और vertically orientated होते हैं. प्रत्येक propeller में एक variable और independent speed होता है जो की इसे allow करता है एक full range of movements तय करने के लिए. अलग अलग drones के different propeller combinations होते हैं जो की उन्हें अलग अलग drone movements प्राप्त करने में सहायता करते हैं.

ये उन conventional helicopters के तरह नहीं होते हैं जो की controlled होते हैं propellers blades के साथ और जो की dynamically pitch करते हैं rotor hub के around में.

जिन components की जुरत blade pitch कराने के लिए होती है वो बहुत ही ज्यादा कीमती होते हैं इसलिए इन quadcopters का अब ज्यादा इस्तमाल होने लगा है.

ड्रोन कैसे बनाते हैं

Drone Kaise Banate Hai
ड्रोन कैसे बनाया जाता है

1. Chassis – ये drone का skeleton होता है जिससे सभी components fixed होते हैं. इन chassis design को design करते वक़्त उनकी strength (ये तब जब कोई additional weight जैसे की camera को attach किया जाता है) और additional weight को नज़र में रखा जाता है, क्यूंकि अन्यथा लम्बे propellers और stronger motors की जरुरत पड़ सकती है उन्हें lift करने के लिए.

2. Propellers – ये अक्सर effect डालता है quadcopter की load पर की ये कितनी load उठा सकता है, कितनी speed से उड़ सकता है और कितनी speed से चारों तरफ manoeuvre कर सकता है.

इनकी लम्बाई को modify किया जा सकता है; लम्बे propellers आसानी से ज्यादा वजन उठा सकते हैं वो भी lower rpm में लेकिन इन्हें थोडा ज्यादा समय लगता है speed up या speed down करने के लिए.

वहीँ छोटे propellers अपनी speed को आसानी से बदल सकते हैं और इसलिए ये ज्यादा manoeuvrable होते हैं, लेकिन इन्हें ज्यादा rotational speed की जरुरत होती है वही समान power को पाने के लिए जितनी की longer blades में होती है.

इससे motor पर excess strain पड़ता है और जिसकारण से उनकी lifespan कम हो जाती है.
हम ये कह सकते हैं की एक ज्यादा aggressive pitch जरुर से quicker movement प्रदान कर सकती है लेकिन ये hovering efficiency को बहुत हद तक कम कर देती है.

3. Motors – प्रत्येक propeller में 1 motor लगा होता है, drone motors की rating “Kv” units पर दी जाती है जिसका मतलब है की number of revolutions per minute ये achieve करता है जब एक volt की voltage को supply किया जाये motor को बिना कोई load के.

एक faster motor spin जरुर से ज्यादा flight power प्रदान कर सकता है, लेकिन इसे उतनी ही ज्यादा power की जरुरत पड़ती है battery से, जिसकारण flight time में कमी दिखाई पड़ सकती है.

4. Electronic Speed Controller (ESC) – ये प्रत्येक motor को एक controlled current प्रदान करता है जिससे की सही spin speed और direction पैदा किया जा सके.

5. Flight Controller – ये उस onboard computer को कहा जाता है जो की आने वाली incoming signals को interpret करती है जिसे की pilot द्वारा भेजा गया होता है और फिर ये भेजती है corresponding inputs ESC को, जिससे quadcopter को control किया जाता है.

6. Radio Receiver – ये receive करता है control signals जिसे की pilot के द्वारा भेजा गया होता है.

7. Battery – इसमें generally lithium polymer batteries का इस्तमाल किया जाता है क्यूंकि इनकी high power density और recharge हो पाने की ability होती है.

इसके साथ बहुत से sensors को भी इस्तमाल किया जा सकता है जैसे की accelerometers, gyroscopes, GPS और barometers positional measurements के लिए. वहीँ Cameras को अक्सर mount किया जाता है navigation और aerial photography के लिए.

ड्रोन कैसे काम करता है

एक typical unmanned aircraft बहुत ही light composite materials से बनी हुई होती है जिससे की weight को कम किया जा सके और साथ में control को बढाया जा सके.

ये composite material इन drones को वो ताकत प्रदान करता है जिससे ये military के कार्यों में बहुत ही ऊँची उड़न भर सकें.

Drones बहुत से अलग अलग technology से लेश होते हैं जैसे की infrared cameras, GPS और laser (सभी प्रकार में ये होते हैं चाहे वो consumer, commercial या military UAV क्यूँ न हो).

Drones को control किया जाता है remote ground control systems (GSC) के मदद से और जिसे की एक ground cockpit भी कहा जाता है.

असल में देखा जाये तो एक unmanned aerial vehicle system के दो हिस्से होते हैं, drone खुद और उसकी control system.

Drone के अग्र भाग में ही सभी sensors और navigational systems स्तिथ होते हैं. वहीँ बाकि के body में सभी drone technology systems स्तिथ होते हैं क्यूंकि इनमें इंसानों को रखने के लिए कोई जगह नहीं होती है.

जिन engineering materials का इस्तमाल इन्हें बनाने के लिए इस्तमाल होता है वो highly complex composites होते हैं जिन्हें की ख़ास रूप से design किया गया होता है पैदा हो रहे vibration को absorb करने के लिए, इससे जो भी noise पैदा होता है उसे कम किया जा सकता है. ये materials बहुत ही light weight होते हैं.

ड्रोन के प्रकार

Drones के वैसे तो बहुत सारे प्रकार के लेकिन इन्हें मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है.

  • Rotary Drone
  • Fixed Wing Drone

Rotary Drone

इन rotory drones में भी अलग अलग प्रकार हैं.

1. Single Rotor :- इसमें केवल एक single rotor स्तिथ होता है. वहीँ पीछे में एक tail rotor होता है जो की इसे control और stability प्रदान करता है.

2. Tricopter : – इसमें तीन अलग प्रकार के powerful motors होते हैं, तीन controllers होते हैं, चार gyros और एक servo motor होता है.

3. Quadcopter : – इसमें चार rotor blades का इस्तमाल किया जाता है. इसमें brushless type DC motors का इस्तमाल होता है. इसमें दो motors clockwise घूमते हैं तो वहीँ दो motors anti-clockwise घूमते हैं. Lithium Polymer Batteries का इस्तमाल होता है.

4. Hexacopter : – इनमें 6 rotor blades का इस्तमाल किया जाता है. जिसमें 3 motors clockwise घूमते हैं तो वहीँ 3 motors anti-clockwise घूमते हैं. इनकी landing सबसे safe होती है.

5. Octacopter : – इसमें 8 motors के साथ 8 functional propellers का इस्तमाल होता है. इसकी naturally ही high flying capability होती है, वहीँ इसकी stabilty सबसे बेहतर होती है.

Fixed Wing Drone

ये पूरी तरह से एक अलग ही प्रकार की drone होती है. इनकी design भी multi-rotor designs से काफी रूप से अलग होती है. इसमें आप एक traditional places के तरह से wings देख सकते हैं. वहीँ ये ज्यादा stable नहीं होते हैं हवा में और साथ में इनकी movement पर gravitational force का ज्यादा असर पड़ता दिखयी पड़ता है. वहीँ ये quadcopters की तुलना में ज्यादा weight नहीं उठा सकते हैं.

VTOL Drones क्या है?

VTOL drones आसानी से ही take off, fly, hover और land कर सकते हैं vertically. VTOL का full form होता है “Vertical Take-Off and Landing”.

Drone – UAV Technology क्या है?

वैसे तो Drone में कई advanced technology का इस्तमाल किया जाता है. जिसके विषय में शायद आप में बहुत लोग कुछ न जानते हों. इसलिए चलिए इनके विषय में थोड़ी बहुत जानकारी प्राप्त करते हैं.

Radar Positioning और Return Home technology

बहुत से latest drones में dual Global Navigational Satellite Systems (GNSS) जैसे की GPS और GLONASS मेह्जुद होते हैं.

वैसे Drones दोनों GNSS और non-satellite modes में उड़ सकते हैं.

Highly accurate drone navigation का होना बहुत ही जरुरी होता है उडान भरते वक़्त, क्यूंकि इस जरुरत बहुत से applications में होती है जैसे की creating 3D maps, surveying landscape और SAR (Search & Rescue) missions में.

अब चलिए जानते हैं की ये काम कैसे करता है

जब drone को switch on किया जाता है, तब ये search और detect करता है GNSS satellites को. ये High-end GNSS systems इस्तमाल करते हैं Satellite Constellation technology का. Basically, ये satellite constellation एक group होता है satellites का जो की एक साथ काम कर रहे होते हैं और जो coordinated coverage और synchronized होते हैं जिससे की वो overlap होकर सही coverage प्रदान कर सकें

Pass या coverage वो period होता है जब एक satellite visible होता है local horizon के ऊपर.

वहीँ Drone में स्तिथ radar technology नीचे बताये गए signals को remote controller display तक भेजती हैं ;

  • signal की बहुत सारे drone GNSS satellites को detect किया गया है और drone अब ready हैं उड़ने के लिए
  • सही position और location को display करना अपनी वो भी pilot के साथ
  • साथ में home point को record करना. ये ‘Return To Home’ safety feature के लिए होता है

Return to Home Drone Technology के प्रकार क्या हैं?

ज्यादातर latest drone में मुख्य रूप से 3 प्रकार के Return to Home drone technology का पालन किया जाता है ;

1.  Pilot के द्वारा initiate किया गया return to home जिसमें remote control या app में button को press किया जाता है.

2.  Low battery level के होने से जहाँ की UAV automatically ही अपने home point location पर उड़ के चला आएगा.

3.  अगर drone और remote controller के बीच Loss of transmission हो जाये तब भी drone अपने home point location पर उड़ के चला आएगा.

Obstacle Detection और Collision Avoidance Technology

बहुत से drones में अब collision avoidance systems को install किया जा रहा है. ये drone vision systems obstacle detection sensors का इस्तमाल करती हैं surroundings को scan करने के लिए, वहीँ software algorithms और SLAM technology के इस्तमाल से images को 3D maps में convert किया जा सकता है जिससे की flight controller को आने वाले objects के बारे में पता चल जाता है जिससे वो accidents होने से बच सकता है.

ये systems नीचे दिए गए sensors का इस्तमाल करता है जिससे obstacles को sense किया जा सके और उनसे बचा जाये;

  • Vision Sensor
  • Ultrasonic
  • Infrared
  • Lidar
  • Time of Flight (ToF)
  • Monocular Vision

ये drones में ऐसे feature हैं जिससे ये sense और actively attempt कर सकते हैं obstacles से बचने के लिए जिससे वो home को आसानी से return कर सकते हैं.

वैसे चलिए अब ये जानते हैं की ये obstacle avoidance technology कैसे काम करता है जब lighting sufficient हो;

1. जब कोई obstacle के बारे में पता चलता है तब drone खुदबखुद slow हो जाते हैं.

2. फिर ये रुक जाते है और hover करने लगते हैं, फिर backward fly करते हैं और ऊपर उठने लगते हैं फिर ये तब तक ऊपर जाते रहते हैं जब तक की उन्हें लगे की कोई obstacle नहीं है सामने.

3. फिर RTH process शुरू हो जाता है और drone अपने home location को वापस चला आता है.

Gyro Stabilization, IMU और Flight Controllers

Gyro stabilization technology वो component होती है जो की drone को उसकी smooth flight capabilities प्रदान करती है.

इन gyroscope को तुरंत ही कार्य करना होता है वो भी उन forces के विपरीत जो की drone के against काम कर रहे होते हैं.

ये gyroscope सभी essential navigational information प्रदान करता है central flight controller को.
IMU का full form होता है inertial measurement unit (IMU). ये कार्य करता है acceleration के current rate को detect कर और इसके लिए ये एक या उससे ज्यादा accelerometers का इस्तमाल करता है.

ये IMU detect करता है कोई भी बदलाव इसके rotational attributes में जैसे की pitch, roll और yaw, इसके लिए ये एक या उससे ज्यादा gyroscopes का इस्तमाल करता है.

कुछ IMU में एक magnetometer भी लगा हुआ होता है जो की इसकी मदद करता है orientation drift के विपरीत callibrate होने के लिए.

ये Gyroscope एक component होता है IMU का और IMU एक essential component होता है drones flight controller का. ये flight controller वो central brain होता है drone का.

Drone Motor Direction और Propeller Design

यहाँ पर motors और propellers वो drone technology होते हैं, जो की drone को हवा में move करते हैं और उसे किसी भी जगह में hover करने में मदद करते हैं.

ये data receive करते हैं flight controller और electronic speed controllers (ESC) से जो की drone motor को सही direction प्रदान करते हैं hover और fly करने के लिए.

Onscreen Real-Time Flight Parameters

प्राय सभी drones में एक Ground Station Controller (GSC) होता है या एक smartphone app जो की आपको allow करता है current flight telemetry को track करने के लिए.

No Fly Zone Drone Technology

Flight Safety को बढ़ाने के लिए और उन्हें restricted areas से दूर रखने के लिए, बहुत से नए drones में एक “No Fly Zone” feature install किया जा रहा है.

इन no-fly zones को दो categories में बांटा गया है: A और B.

Manufacturers आसानी से update और change कर सकते हैं इस no-fly zone drone technology को firmware updates के साथ.

GPS Ready To Fly Mode Drone Technology

जब compass को calibrate कर दिया जाता है, तब drone को GPS Satellites की location का तलाश रहता है. और जब 6 या उससे ज्यादा मिल जाते हैं, तब ये drone को allow करती है उड़ने के लिए “Ready To Fly” Mode.

Internal Compass और Failsafe Function

ये drone और remote control system को allow करती हैं सही flight location को जानने के लिए. Compass की Calibration करने की जरुरत होती है एक home point set करने के लिए.

ये home point वो location होता है जहाँ की drone return आने वाली होती है जब कोई loss of signal होता है drone और remote control system के बीच. इसे ही “fail-safe function” कहा जाता है.

Firmware और Flight Assistant Port

ये flight control system communicate करते हैं एक PC Assistant से वो भी एक Micro-USB cable के माध्यम से. ये allow करता है drone के configuration में और साथ में drone firmware को upgrade करने के लिए.

Drone की एक आसान सी परिभाषा है की यह एक उडती हुई computer होती है एक camera और कुछ sensors के साथ. Computers के तरह ही drones में भी firmware software होते हैं, य commands send करते हैं aircraft और remote controller के physical components को.

Drone manufacturers नए firmware upgrades release करते हैं bugs को fix करने के लिए और साथ में ये नए features को भी add करते हैं aircraft, remote control unit और software को अगर इनकी जरुरत drone को उड़ाने में हो तब.

LED Flight Indicators

इन्हें आप drone के front और rear हिस्से में देख सकते हैं. Generally, drone LEDs green, yellow या red colour के होते हैं.

जहाँ front LEDs इस बात को indicate करने के लिए है की कहाँ पर drone का अग्र भाग स्तिथ है. वहीँ rear LEDs flight indicators का इस्तमाल drone के अलग अलग status को indicate करने के लिए होता है जैसे की कब power on है, कब firmware upgrade हो रहा है और कब fly हो रहा है.

सभी drones के साथ एक user manual होता है, जो की प्रत्येक flashing LED light का मतलब बताता है.

High-Performance Camera

अभी के latest drones में ऐसे cameras लगे हुए हैं जो की HD Photos और Videos shoot कर सकते हैं, कुछ में तो 4k video recording करने की भी सुविधा है.

Gimbals और Tilt Control

Gimbal technology एक बहुत ही महत्वपूर्ण technology है जब बात quality aerial photography की होती है. इसके इस्तमाल से quality aerial photos, film और 3D imagery को आसानी से capture किया जा सकता है.

ये gimbal किसी भी प्रकार का vibration को camera तक पहुचने से रोकता है. साथ में ये gimble आपको camera को tilt करने में भी मदद करता है जिससे की उड़ते वक़्त भी बेहतरीन photos खिंची जा सकती है.
Practically सभी latest drones में पहले से ही integrated gimbals और cameras होते हैं. इससे photography की परिभाषा ही बदल जाती है.

Drone को आप कैसे उड़ा सकते हैं?

एक drone को manually ही control किया जाता है एक hand-held radio control transmitter के द्वारा जो की manually control करती है propellers को.

Controller में मेह्जुद Sticks आपको allow करते हैं अलग अलग directions में movement करने के लिए और trim buttons allow करते हैं trim को adjust होने के लिए जिससे drone को balance किया जा सकता है.
Screens का भी इस्तमाल किया जा सकता है live video की footage को receive करने के लिए on-board camera से और वहीँ sensor data को display करने के लिए.

इसके अलावा, on-board sensors बहुत से helpful settings भी प्रदान करता है जैसे की ;

Auto altitude जहाँ की drone एक fixed altitude में move करता है ;

GPS hold, जहाँ की drone एक fixed GPS position में स्थिर होता है.

Drones को autonomously भी उड़ाया जा सकता है, आजकल के modern flight controllers ऐसे software का इस्तमाल करते हैं जो की GPS waypoints को पहले से ही mark कर देते हैं की कैसे एक drone उड़ने वाला है, कहाँ land करने वाला है और उसकी destination point कहाँ पर स्तिथ है इत्यादि.

ड्रोन कैसे उड़ता है

एक बहुत ही महत्वपूर्ण feature है drones की उनकी flight time. ऊपर लिखे सवाल का एक आसान सा जवाब ये है की बेहतर quality के drones जहाँ 30 minutes तक ऊपर उड़ सकते हैं वहीँ सस्ते drones केवल 5 से 10 minutes तक ही का उडान भरते हैं.

वैसे एक drone कितनी देर तक ऊपर उड़ सकती है, ये बात के पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे की : –

1. Battery Life कितनी है

Drones के sizes और types के आधार पर Batteries बहुत से प्रकार के आते हैं. ये तो natural सी ही बात है की बेहतर quality की battery ज्यादा backup प्रदान कर सकती है वहीँ ये याद रखने वली बात है की समय के साथ साथ batteries धीरे धीरे ख़राब होने भी लगती है यदि उसे ठीक से maintain नहीं किया गया तब.
Lithium Batteries ज्यादा देर तक backup देने में सक्षम होती हैं.

2. Drone का Weight

आपका drone कितना बड़ा है और इसमें कितने motor और propellers लगे हुए हैं, साथ में इसका वजन कितना है, इन सभी बातों पर भी उड़ना निर्भर करता है. क्यूंकि इसमें batteries को ज्यादा काम करना पड़ता है पुरे यान को हवा में र्रखने के लिए.
Drones जो की light weight materials से बने हुए होते हैं वो ज्यादा देर तक उड़ सकते हैं.

3. Add-Ons का होना

Drone का वजन केवल अपने वजन तक ही शीमित नहीं होता है बल्कि इसमें attached सभी gadgets पर भी निर्भर करता है. ऐसा इसलिए क्यूंकि drones को खली तरीके से कम ही भेजा जाता है बल्कि इसके साथ camera, sensor, recorder इत्यादी को भी attach किया जाता है.

जितना ज्यादा वजनदार इसकी add-ons होंगे, उतनी ही कम देर तक ये उड़ सकती है.

Drone को ज्यादा समय तक हवा में कैसे रखें?

अब तक आप drones की basic principle को समझ चुके हैं, साथ में ये भी जान चुके है की ये कैसे काम करता है. अब चलिये ये जानते हैं की कैसे हम इसकी flight time को बढ़ाएंगे.

1.  अगर आपका drone एक lithium-polymer battery धारण किया हुआ है, तब इसे ठन्डे वातावरण में कम ही इस्तमाल करें क्यूंकि ठण्ड से इस battery के efficiency पर negative असर पड़ता है और ये जल्द ही discharge होने लगता है.

2.  वहीँ ज्यादा गरम वाले इलाके में भी इसे उड़ना नहीं चाहिए क्यूंकि वहां इसे उड़ाने से drone के motor को ज्यादा काम करना होता है drone को lift करने में. जिससे की battery charge जल्द ही खत्म हो जाएगी. इसलिए battery को पहले cool down होने के लिए छोड़ दें फिर उसे दुबारा charge करें.

3.  वहीँ ज्यादा हवा चलने वाले स्थान में भी इन्हें उड़ाना नहीं चाहिए क्यूंकि इसमें drone को stabilize होने के लिए ज्यादा energy की जरुरत होती है और साथ में ये दुसरे buidings और पेड़ों से टकरा जाने का भी डर होता है.

4.  Drones के लिए पानी बिलकुल भी ठीक नहीं होता है. इसलिए drones को humid climate में कभी भी न उड़ायें. इससे drones की flight time कम हो सकती है.

5.  इन्हें फालतू के add ons से दूर रखें और केवल वही add on ही लगायें जिनकी आपको जरुरत हो.

6.  अगर आप guards का इस्तमाल कर रहे हैं तब ये उन्हें accident होने से रक्षा करेगा लेकिन ये उनकी weight को बढ़ा देता है. इसलिए जैसे जैसे आप इन्हें उड़ाने में experienced हो जाओ तब इन guards को जरुर से हटा देना न भूलें.

7.  इन्हें बहुत ही कम समय high speeds में उड़ायें क्यूंकि ऐसा करने से इनकी battery जल्दी से drain होती है. वहीँ आप यदि इसे कुछ समय तक इस्तमाल नहीं करना चाहते हैं तब इसे full charge करके ही store करें वो भी एक dry और ventilated area में room temperature में.

यदि आप इन tips का पालन करें तब आप अपने drone की flight time को बढ़ा सकते हैं, साथ में इसे damage होने से भी रक्षा कर सकते हैं.

Drones के Applications क्या हैं?

उड़ते हुए drones के बहुत से applications होते हैं जैसे की : –

  • अनाज के खेतों में Automatic Pollination करना
  • बहुत से Search और rescue operations में अपना कार्य करना
  • Traffic monitoring करने के लिए
  • Hazardous Sites को explore करने में
  • Military surveillance करने के लिए
  • मौसम के mapping करने के लिए
  • Areal Photography करने के लिए
  • यहाँ तक की Drone-delivery services प्रदान करने के लिए
  • Sport – drone racing करने के लिए

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख ड्रोन क्या है (What is Drone in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को ड्रोन कैमरा के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं. यदि आपको यह post ड्रोन कैसे बनाते हैं हिंदी में पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Google+ और Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

3 COMMENTS

  1. ड्रोन्स को मुझको काफी अच्छे लगते हैं और मैंने एक ड्रोन लेने की भी सोच रहा हूँ क्यों की fiverr पर आज कल काफी ड्रोन्स वीडियोस का गिग चल रहा है तो मैंने भी एक ड्रोन चाहूंगा और आपका यह आर्टिकल काफी अच्छा है like a small Drone Wiki.
    with Regards

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