Router क्या है और काम कैसे करता है

क्या आपको पता है राउटर क्या है (What is Router in Hindi) और यह Networking Device काम कैसे करता है. अगर आपके मन में इन सवालों के साथ के अगर कोई ओर भी सवाल हैं तो उनका जवाब भी आपको मैं आज के इस लेख में देने वाला हूँ. आप जरुर Router का नाम सुने ही होंगे क्यूंकि यह आज कल Internet के लिए यह इस्तमाल होता है. जब कभी भी आप Mobile Network को छोड़ के Internet को Access करते हैं. तब आप समझ जाना आप एक Wireless Networking Device से Internet को Access कर रहे है.

फिर भी मेरी बातों पे भरोसा नहीं है. आप एक बार पूछ लेना किसीको भी भाई तू WiFi के लिए कोई Device इस्तमाल करता है क्या. उसका जवाब जरुर आज के लेख से संभंदीत होगा. सवाल तो ये भी आता है इस Device का काम क्या है. सोचों आप एक post man हो और आपका काम है हर रोज अलग अलग घर में चिठ्ठी पहुँचाना. किंतु आप चिठ्ठी तभी भेज सकते हैं, जब आपके पास इनका Address होगा और इसके साथ ही आपको चिठ्ठी वाले के घर के पास जाने का रास्ता कोनसा है ये भी पता होगा. चिठ्ठी वाला एक राउटर क्या होता है जो data को Receiver तक पहुँचाने का काम करता है. चलिए अब इस Networking Device के बारे में विस्तार से जानते हैं.

राउटर क्या है (Router in Hindi)

Router Kya Hai Hindi

Router एक Hardware Networking Device है. इसका इस्तमाल Network में किया जाता है. जब भी कोई data जो एक Pcaket के रूप में एक Network से दुसरे Network में Travel करता है. तब Router, Packet data को Receive करता है, और Data Packet में जो भी छुपी हुई Information है, उसको Analyze करने के बाद Destination Device को Forward करता है. इस Networking Device को अलग अलग Networks को अपसा में Wire या Wirelessly जोड़ने के लिया किया जाता है. वैसे तो इसका इस्तमाल घर में भी होता है जिसको हम Wireless Router कहते हैं. जिसे आप Internet को Access करते हैं.

यह कोनसे Layer पे और कहाँ काम करता है
जैसे की आपको पता होगा CompuInternetworkOSI Model को Follow करता है. Router OSI Model के 7 Layer में से Network Layer पे काम करता है. मैंने आपको बताया Hardware और Software से यह Device बनी है. इसमें एक Internet work Operating System, CPU, Memory Storage और कुछ I/O Ports रहते हैं जैसे की आप देखे ही होंगे. यह Operating System Windows या MAC जैसे नहीं होते. Storage Memory में Routing Algorithm और Routing Table को Store किया जाता है.

Routing Algorithm और Routing Table के जरिये यह पता लगता है की जो Input Packet Receive हुआ है. उस Packet को किस Network या फिर कोनसे Device के पास भेजना है. जिसको Analyze कहते हैं. Ex से आप अच्छे से समझ जाओगे दोस्त.

EX-जैसे courier boy, एक Router है. Courier boy, courier Office से Parcel को Receive करता है. इसके बाद Parcel के उपर Parcel जिसके नाम पे आया है उसका Address रहता है. Courier boy Address को देखने बाद वो decide करता है Parcel को किस Location में और कहाँ देना है. इसके बाद ही वो Parcel को Receiver के Address पे भेजता है. (यह Process सारे Parcels पे लागु होती है. Courier boy के पास address की लिस्ट रहती है). अब इस उदहारण को राउटर के जरिए समझते हैं.

उपर दिए गए उदहारण के मुताबिक “Parcel” आपका Data packet है. जैसे courier boy Address को ढूंडता है. वैसे ही Router भी Routing Table के द्वारा Packets से  Receiver Address का पता निकाल के Shortest Path का चयन करता है. इसके बाद Receiver के पास भेज देता है. Courier boy के पास एक address की लिस्ट रहती है वैसे ही Routing Table में भी Details रहती है. चलिर अब जानते है यह Device कार्य कैसे करता है.

राउटर कैसे काम करता है (How Router Works in Hindi)

जैसे की आपको पता है Router , Packet को एक network से दुसरे Network में Forward करने का काम करता है. यह भी कह सकते हो Source से Destination Address तक packet भेजता है. इसका मुख्य काम है packet को Receive करना और Receiver को Deliver करना. आपने अपने computer से एक Facebook Message भेजा अपने दोस्त के पास, जो अभी Delhi में है. सबसे पहले message एक Packet में convert हो जाता है और पास वाले Router के पास पहुँच जाता है. अब Router, Routing Protocol से Routing Table को check करता है.

Routing table में आस पास वाले जितने भी Router हैं उन सभी का Address और path Distance रहता है. फिर इसके बाद सबसे पास वाले Router के पास Packet को Forward किया जाता है, जिसमे Receiver का IP address रहता है. packet अगले Router के पास पहुँचते ही वो भी फिर से Shortest Path को Check करता है और अगले Router के पास भेज दिया जाता है. कुछ इस तरह से Packet Receiver Computer के पास पहुँच जाता है.

एक Router बहुत सारे Network को जोड़ता भी है और अपने Routing table को Maintain भी करता है. maintain मतलब Update करता रहत है. हर एक Router अपने अपने आस पास वाले Router की जानकारी रखते हैं. Routing Protocol सारे Routers में रहता है जिसकी मदद से वो आपस में बात चित करते हैं. और इसके साथ साथ अपने connected Networks की Information को आपस में Share करते हैं, Routing table को Update करते हैं. कुछ इस तरह से यह Networking Device काम करती है.

Router  के Components

राउटर क्या है

जैसे की आपको पता है उपर इस लेख में इसकी जानकरी दी गई है. यह एक specialized Computer है. इसके भी अलग अलग parts हैं. जिनके नाम निचे दिए गए हैं.

  1. Central Processing Unit (CPU)
  2. Flash Memory
  3. Non-Volatile RAM
  4. RAM
  5. Network Interfaces
  6. Console

Central Processing Unit (CPU)

CPU जो एक ब्रेन होता है, यह Special Software को चलता है जिसका नाम है os. कुछ OS हैं जैसे Junos, Juniper Routers को RUN करते है और Cisco IOS Cisco Routers को चलाते है. यह Operating system जितने भी routers के components हैं, उन सभी को manage करता है.

Flash Memory :

हर Electronic Device के लिए Memory चाहिए जिस में operating system को store किया जाता है. Flash Memory को Computer के साथ Compare करें तो यह एक Hard disk ही है. इस Flash memory में Routing algorithm, Routing Protocol, Routing Table  Store होता है.

Non-Volatile RAM:

इसके नाम से ही आप समझ गए होंगे की यह Memory Permanent है.  इसके अंदर  Operating System का Back up और startup Version Store होता है. जब कभी Router Boot होता है तब इस Memory से ही Programs Load होते हैं.

RAM:

जब भी Router On  होता है, तब Operating System को Ram में Load किया जाता है. इसके बाद Router, Routes निर्धारित करता है. दुसरे Routers से यह Routes की जानकारी देखता है (via RIP RIP (v1 and v2), OSPF, EIGRP, IS-IS or BGP). RAM  के अंदर ARP tables, routing tables, routing metrics और दुसरे data को store किया जाता है.  ARP tables, routing tables, routing metrics इनकी मदद से Packet Forwarding Process Speed होती है.

Network Interfaces:

हमेसा से Routers में बहुत सारे Network Interface रहते हैं. Operating System में बहुत सारे Drivers होते हैं. इन Drivers की मदद से Routers को यह पता लगता है की कोनसे Port में कोनसा Network का WIRE Connected है. दुसरे Routers से Routes को सिखने की क़ाबलियत होती हैं और Packet सही route पे Transmit किया जाता है.

Console:

Router को Managing और Configuring करने का सारा काम Console में ही होता है. Configuration और troubleshooting commands console से दिए जाते हैं.

Router के कार्य (FUNCTIONS OF A ROUTER)

  • LAN को Broadcast करने से रोकता है.
  • यह default Gateway जैसे काम करता है
  • Protocol Translation में मदद करता है
  • Network के बिच में Route बनाने का काम करता है.
  • Data को sender से Receiver तक deliver करने का काम करता है
  • दो Networks को आपस में जोड़ने का काम करता है.
  • Loop free path बनाने में लगा रहता है
  • Destination तक Packet को पहुँचाने के लिए Shortest path  ढूंड निकालता है.

Routing Table

Routing Table बहुत सारे Rules से बना हुआ है, जैसे की इसका नाम ही Table है. इसीलिए यह  हमेसा से Table के रूप में रहता है. इसका उपयोग यह निर्धारण करने के लिए किया जाता है की Internet Protocol Network में Packet को किस दिसा में भेजा जाएगा. जितने भी IP enabled Devices हैं जैसे Router व Switches वो सभी Routing Table का इस्तमाल करते हैं.

Routing Table में वो सभी जानकारी रहती है, जिसे Packet को Destination तक भेजने के लिए सबसे अच्छा path(रास्ता) का चयन करने में आसानी हो सके. हर पैकेट में Source और Destination की जानकरी रहती है.  Packet Receive होने के बाद Network Device, packet की छान बिन करता है और जो Inforamtion प्राप्त होती है उसे Routing Table entry के साथ मैच करवाता है. इसके बाद यह Packet आगे किस Network Device के पास भेजा जाएगा यह निर्धारित किया जाता है.

Routing Table तालिका में निम्न लिखित जानकारी रहती हैं

  1. Destination: Packet को किस Destination को भेजना है उसका IP Address .
  2. Next hop: अगले नेटवर्क device का IP ADDRESS
  3. Interface: Packet को जिस Network में भेजा जाता है उसके Interface की जानकारी रहती है.
  4. Metric: routing Table में जितने भी Route मोजूद हैं उन सभी का Cost कितना होगा और इसे यह जानने में आसानी होती है की Packet को किस रस्ते से भेजने में कम खर्चा आएगा.
  5. Routes: Routers के साथ जितने भी Attached Network या दुसरे Devices हैं उन सभी की जानकारी और Routes की जानकारी रहती है.

Routing tables को  manually या dynamically maintain कर सकते हैं .static Network Devices के table को जब तक Administrator नहीं बदलता तब तक नहीं बदलता है. Dynamic routing में Devices अपना खुदका Routing Table बनाते हैं और Maintain भी करते हैं. इसके लिए devices Routing Protocol का इस्तमाल करते हैं. एक दुसरे से Information Exchange भी करते हैं.

Types of Routers

आपको market में अलग अलग तरह के Router देखने को मिल जाएंगे. इस्तमाल के मुताबिक उन्हें अलग अलग किया गया है. चलिए विस्तार से इनके बारे में जानते हैं. .

Broadband Routers

Broadband Router कई प्रकार के काम कर सकते हैं. इनका इस्तमाल Computers को आपस में जोड़ने के लिए और Internet से जोड़ने के लिए किया जाता है.

आगर Voice Over IP Technology के द्वारा आप अपने फ़ोन को Internet से जोड़ना चाहते हैं. तो आप समझ जाना वहां इस VOIP connection के लिए आपको Broadband Router की उपयोग किया गया है. यह एक Special Type के Modem होते हैं जिनमे Ethernet और फ़ोन Jacks भी होते हैं.

Wireless Router

Wireless Router आजकल हर कोई इनके बारे में जानता है. घर, Office, College में इनका इस्तमाल ज्यादा होता है. क्या पता आप अभी इस Wireless Router से ही आप Internet Access कर रहें हो सायद. यह wireless Router wireless signal का area बनाता है और इस खेत्र में जितने भी Computers, Tablet, Mobile फ़ोन हैं वो सभी Internet का इस्तमाल कर सकते हैं.

security को ध्यान में रखते हुए इनमे Password System रहता है. सुरक्षा के लिए Password और IP Address का इस्तमाल किया जाता है. आप देखे ही होंगे जब आप WiFi का इस्तमाल करते हैं. तब आप एक WiFi से connect करने से पहले आपको password डालने की आवश्यकता होती है. यही इसका Security Feature है.

कुछ अन्य प्रकार के Routers

Edge Router

इस प्रकार के Router को ISP (Internet Service Provider) के किनारे रखा जाता है. बाहरी Protocols जैसे BGP (Boarder Gateway Protocol) को दुसरे ISP के BGP के साथ Configure करते हैं.

Subscriber Edge Router

Subscriber Edge Router end user (Enterprise) Organization के अंतर्गत आते हैं. इसे EXTERNAL BGP को प्रदाता के AS के रूप में प्रसारित करने के लिए Configure किया गया है

Inter Provider Border Router

इस तरह के Routers को ISPs को अपसा में जोड़ने के लिया जाता है. जैसे Airtel को Reliance के साथ और Vodafone को Jio के साथ. यह BGP SESSION को Maintain करता है.

Core Router

LAN Network के Backbone की तरह जो Router काम करता है, उसे Core Router कहते हैं. यह अलग अलग Distributed Routers को आपस में जोड़ने के लिए है. मतलब अगर एक Company है जिसके बहुत सारे Routers होंगे जो अलग अलग Location में होंगे. इन सभी Routers आपस में जोड़ने के लिए Core Router का इस्तमाल किया जाता है. इसका नाम भी इसी वजह से Core है.

मेरी अंतिम राय इस लेख पे

हमेसा से मेरी कोसिस रहती है की आपको सही और सठिक और पूर्ण Information आपको मिले. आप आज जाने राउटर क्या है (What is Router in Hindi) और काम कैसे करता है . अभी तो यह Computers के अंदर पहले से मोजूद है. भाबिस्यत में Routers की speed और Routing Protocol को ज्यदा से ज्यदा मजबूती पे ध्यान रखा जाएगा.

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16 COMMENTS

  1. sir mai daily post kar raha hu par mai post google me rank nahi ho rahi
    seo bhi karta hu
    plz check my blog and give suggetions

  2. Sir bahut hi helfull jankari aapne di he aapne. sir aap se kuchh puchhana chahta hun,kuchh dino se meri website par traffic kam hua he uska kya karan ho saktav hai. Webmaster tool me crowl error ki vajah se to nahin hua he. Please reply sir

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      • अरे भाई।हमेशा आप सवाल के जवाब के बदले link क्यू देते है??????????????

        • Hello chandan ji, yahan par hum aapse details mein baat nahi kar sakte, balki forum mein aapke sawal ka behtar jawab diya ja sakta hai, iske sath aapke sawal se baki logon ko bhi faida ho sakta hai.

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