3D Printer क्या है और उपयोग कैसे होता है?

Printer क्या होता है शायद आप सभी जानते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं की 3D Printer क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं? यदि आपने भी बाकि लोगों के तरह ही इसके विषय में कुछ नहीं जानते हैं और सबकुछ जानना चाहते हैं तब आपको यह article जरुर से पूरा पढना चाहिए.

जहाँ एक normal printer केवल 2d में ही print करने में सक्षम होता है वहीँ एक 3D Printer इससे advanced होता है और ये एक real object के तरह ही चीज़ों को three dimensional print कर सकता है. इससे आप जैसे imagine करेंगे वैसे वस्तु की design कर सकते हैं. ये सहजता और सुलभता थ्री डी प्रिंटर आपको मुहया करवाती है.

यदि आपको 2D या 3D के विषय में पता नहीं है तब ये होते हैं 2 dimensional और 3 dimensional. मतलब की किसी वस्तु को अगर एक plane surface में रखा जाये तब उसमें इसके स्तिथि को x axis, y axis और z axis में देखा जा सकता है. इससे उस वस्तु की गहराई को देख सकते हैं, 3d वस्तु पूरी तरह से real objects के तरह दृश्यमान होती है.

जहाँ 2d models की आप केवल सामने ही देख सकते हैं वहीँ 3d models की आप आगे पीछे चारों तरफ से देख सकते हैं. जैसे की हम चीज़ों को अपने real life में देखते हैं.

वैसे 3D प्रिंटिंग मशीन क्या है और ये काम कैसे करता से सम्बंधित सभी जानकारी को प्राप्त करने के लिए इस article को अंत तक जरुर पढ़ें. वहीँ इसमें इसके कार्य करने की पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में भी समझाया गया है. उम्मीद है ये article 3डी प्रिंटर क्या है आपको पसदं आये. तो बिना देरी किये चलिए आगे बढ़ते हैं.

3D प्रिंटिंग क्या है (What is 3D Printing in Hindi)

3D Printing Kya Hai Hindi
3 डी प्रिंटिंग

3D printing या additive manufacturing एक ऐसा process होता है जिसमें एक digital file से three dimensional solid objects को बनाया जाता है.

3D printed object को बनाने के लिए additive processes का इस्तमाल किया जाता है. इस additive process में एक object को create करने के लिए material को successive layers में एक के ऊपर एक रखा जाता है जब तक की वो object create न हो जाये. इसमें प्रत्येक layers को आप देख सकते हैं एक thinly sliced horizontal cross-section के तोर पर उस eventual object का जो की आखिर में आप बनाना चाहते हैं.

3D printing पूरी तरह से opposite होता है subtractive manufacturing जहाँ की एक object को धीरे धीरे छोटे छोटे टुकड़ों में cut किया जाता है एक milling machine के इस्तमाल से.

3D printing आपको enable करते हैं बहुत ही complex (functional) shapes को तैयार करने में जो की traditional manufacturing methods से कर पाना बहुत ही मुस्किल बात होता है. वहीँ इसके लिए बहुत ही कम चीज़ों की जरुरत होती है.

3D प्रिंटर का इतिहास

यदि आप manufacturinf के इतिहास को ही खोलकर देख लें तब subtractive methods को सबसे पहले इस्तमाल में लाया गया है. पुरे machining के साम्राज्य में (जिसमें exact shapes को high precision के साथ तैयार किया जाता है) subtractive methods को ज्यादा महत्व दिया गया है, जिसमें filing और turning करना milling और grinding के द्वारा मुख्य हैं.

पुरे manufacturing spectrum में Additive manufacturing के applications को सबसे आखिरी स्थान प्रदान किया गया है.

उदाहरण के लिए, rapid prototyping एक earliest additive variants था और इसका mission था की कैसे lead time और cost को कम कर सकें जब नए parts और devices के prototypes को develop किया जा रहा हो, इसे करने के लिए पहले subtractive toolroom methods (जो की typically slow और expensive होते थे) का उपयोग किया जाता था.

लेकिन जैसे जैसे techonology में advancement होने लगी, additive methods को ज्यादा इस्तमाल में लाया जाने लगा manufacturing में. एक समय जिस जगह में केवल subtractive methods का ही उपयोग किया जाता था वहीँ अब additive methods का इस्तमाल कर profit कमाया जा रहा है.

वहीँ यदि हम नयी additive technologies की real integration की बात करें commercial production में तब subtractive methods का इस्तमाल एक complementing तोर पर किया जाना चाहिए subtractive methods के साथ न की उन्हें पुरे तरीके से मिटा देना चाहिए.

Commercial Manufacturing के भविष्य के विषय में अगर बात किया जाये तब manufacturing firms को flexible, ever-improving users की सभी available technologies की जरुरत है यदि उन्हें competitive रहना है तब.

3D Printing कैसे काम करता है?

3D Printing की शुरुवात होती है आपके computer से जब आप एक 3D Model को अपने system में create करते हैं. इसमें ये digital design होती है एक CAD (Computer Aided Design) file.

एक 3D model को या तो create किया जाता है ground up से 3D modeling software के द्वारा जो की based होता है एक 3D Scanner के data generated से. वहीँ एक 3D scanner के मदद से आप एक object का एक digital copy बना सकते हैं.

3D Scanning

यह एक ऐसा process होता है जिसमें की एक real-world object या environment को analyze किया जाता है data collect करने के लिए उनके shape और appearance के विषय में. इन्ही collected data से फिर digital 3D models create किया जाता है.

3D Modeling और 3D Modelling Software

3D Computer Graphics में 3D Modelling उस process को कहा जाता है जिसके द्वारा किसी object के surface की mathematical representation बनायीं जाती है 3 dimensions में वो भी specialized softwares के द्वारा. इसमें जो product बनकर तैयार होता है उसे 3D Model कहा जाता है और जो व्यक्ति इन 3D Models पर काम करते हैं उन्हें 3D Artists कहा जाता है.

3D Modelling Softwares एक class होता है 3D Computer Graphics Software का जिसका इस्तमाल 3D Model बनाने के लिए किया जाता है. इस class के individual programs को modeling applications या modelers कहा जाता है.

3D modeling software को हमेशा user industry के जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. जैसे की Aerospace, Transportation, furniture designs, fabrics इत्यादि.

अब जब की हमारे पास एक 3D model मेह्जुद है, अब next step है है की इसे prepare करना जिससे की इसे 3D printable बनाया जा सके.

Slicing: 3D Model से 3D Printer

आपको एक 3D Model को slice करना होगा उसे 3D printable ready बनाने के लिए. Slicing का मतलब होता है एक 3D model को divide करना hundreds और thousands of horizontal layers में. इसे करने के लिए slicing software का इस्तमाल किया जाता है.

कभी कभी ये possible होता है एक 3D file को slice करना एक 3D modelling software के भीतर ही या 3D printer में ही. ये भी मुमकिन है की आपको एक certain slicing tool का इस्तमाल करना पड़े एक certain 3D printer के लिए.

जब आपकी 3D model sliced हो जाये, तब आप ready हो जाते हैं उसे आपके 3D printer में feed करने के लिए. इसे किया जाता है via USB, SD या Wi-Fi. ये निर्भर करता है की आप किस brand की 3D printer का इस्तमाल कर रहे हैं. जब आप एक file को upload करते हैं एक 3D printer में, तब वो object ready हो जाता है 3D printed होने के लिए layer by layer.

3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के प्रकार

3D Print करने के लिए बहुत से तरीकें होते हैं. ये सभी technologies additive होते हैं, ये differ भी करते तो mainly उन तरीकों से की कैसे layers को build किया जाता है एक object को create करने के लिए.

कुछ methods में melting और softening material का इस्तमाल किया जाता है layers को extrude करने के लिए. वहीँ दुसरे एक photo-reactive resin को cure करने के लिए एक UV laser (या कोई दूसरा similar light source) का इस्तमाल करते हैं layer by layer.

इस चीज़ को और ज्यादा precise करने के लिए: सन 2010 से, American Society for Testing and Materials (ASTM) group “ASTM F42 – Additive Manufacturing”, ने develop किया है एक set of standards जो की classify करते हैं Additive Manufacturing processes को 7 categories में.

Standard Terminology for Additive Manufacturing Technologies के तहत 7 processes का इस्तमाल किया जाता है.

1. Vat Photopolymerisation
1.1 Stereolithography (SLA)
1.2 Digital Light Processing (DLP)
1.3 Continuous Liquid Interface Production (CLIP)

2. Material Jetting

3. Binder Jetting

4. Material Extrusion
4.1 Fused Deposition Modeling (FDM)
4.2 Fused Filament Fabrication (FFF)

5. Powder Bed Fusion
5.1 Selective Laser Sintering (SLS)
5.2 Direct Metal Laser Sintering (DMLS)

6. Sheet Lamination

7. Directed Energy Deposition

यहाँ आगे हम इन सभी सात 3D Printing Processes के विषय में जानेंगे.

Vat Photopolymerisation

एक 3D printer based होता है Vat Photopolymerisation method के ऊपर जिसमें एक container filled होता है photopolymer resin से और इसे की फिर hardened किया जाता है एक UV light source के द्वारा.

Stereolithography (SLA)
इसमें जो सबसे commonly इस्तमाल की जाने वाली technology होती है वो है Stereolithography (SLA).

इस technology में एक vat of liquid ultraviolet curable photopolymer resin और एक ultraviolet laser का इस्तमाल किया जाता है, object के layers को बनाने के लिए वो भी एक समय में एक.

प्रत्येक लेयर के लिए, laser beam trace करता है एक cross-section उस part pattern का वो भी liquid resin के surface पर. Ultraviolet laser light के Exposure में आने से वो cures और solidify करता है pattern को, जो की traced होते हैं resin पे और फिर उसे join करता है नीचे के layer के साथ.

After the pattern has been traced, the SLA’s elevator platform descends by a distance equal to the thickness of a single layer, typically 0.05 mm to 0.15 mm (0.002″ to 0.006″).

फिर एक resin-filled blade sweep करती है उस part के cross section के across, जो की फिर re-coating करती है fresh material से. इस नयी liquid surface पे, subsequent layer pattern को trace किया जाता है, जिसमें की इसे previous layer के साथ join किया जाता है. अब ये three-dimensional object पूरी तरह से पूर्ण हो जाता है और इस project के अंत में बन कर तैयार हो जाता है.

Stereolithography में supporting structures की जरुरत होती है जो की elevator platform के उस part के साथ attach होते हैं जिन्हें उन्हें serve करना है और उस object को hold करने के लिए क्यूंकि ये float करता है उस basin में जो की liquid resin से पूर्ण होता है. उन्हें manually remove करना होता है जब object finally finish हो जाता है.

इस technique को invent Charles Hull ने सन 1986 में किया था, वो उस समय में 3D Systems नामक company को भी found किये थे.

Digital Light Processing (DLP)

DLP ये Digital Light Processing एक ऐसा method है printing का जो की इस्तमाल करता है light और photosensitive polymers का. जहाँ ये बहुत ही ज्यादा similar है stereolithography के तरह, वहीँ इनकी जो key difference होती है वो होती है इनकी light-source. DLP utilize करता है traditional light-sources जैसे की arc lamps.

DLP के ज्यादातर forms में, प्रत्येक layer उस desired structure का, उसे project किया जाता है vat में liquid resin काम जिसे की फिर solidify किया जाता है layer by layer, जिसमें buildplate move करता है up या down. जैसे जैसे यह process प्रत्येक layer को successively करता है, जिससे की ये सबसे जल्द होने वाला process होता है 3D printing के ज्यादातर forms में.

Envision Tec Ultra, MiiCraft High Resolution 3D printer, और Lunavast XG2 उदाहरण है DLP printers के.

Continuous Liquid Interface Production (CLIP)

सबसे नयी और fastest process जो की Vat Photopolymerisation का इस्तमाल करती है उसे CLIP, जिसका Full form है Continuous Liquid Interface Production. इसे invent किया था एक company ने जिसका नाम है Carbon.

Carbon ने तीन industrial 3D printers को launch किया था :

1. Carbon M1
2. Carbon M2 3D Printer
3. Carbon L1

Digital Light Synthesis

CLIP process का heart होता है Digital Light Synthesis technology. इस technology में, light एक custom high performance LED light engine से project करती है एक sequence की UV images, जिसमें वो expose करती है एक cross-section, 3D printed part की जिससे UV curable resin partially cure होता है एक precisely controlled way में.

Oxygen को pass किया जाता है oxygen permeable window से जिससे की एक thin liquid interface create होता है uncured resin का window और printed part के बीच जिसे की dead zone कहा जाता है.

ये dead zone बहुत ही पतली होती है करीब ten of microns. इस dead zone के भीतर में , oxygen prohibit करती है light को curing करने से उस resin को जो की window के सबसे नजदीक रहता है, जिसकारण ये allow करता है continuous flow liquid का printed part के नीचे से. Dead zone के ठीक ऊपर UV projected light upwards cause करती है एक cascade जैसे की part की curing होना.

केवल printing करना Carbon के hardware से allow नहीं करती है end use properties को real world applications में. एक बार light ने shape कर दिया part को, एक second programmable curing process achieve करती है उस desired mechanical properties को केवल 3d printed part को bake कर वो भी एक thermal bath या oven में.

Programmed thermal curing set करती है mechanical properties जिसके लिए वो trigger करती है एक secondary chemical reaction जो की cause करती है material को strengthen होने में और अंत में desired final properties achieve कर.

Parts जो की printed होते हैं Digital Light Synthesis™ के साथ वो ज्यादातर injection-molded parts होते हैं. Digital Light Synthesis™ produce करती है consistent और predictable mechanical properties, ऐसे parts create कर जो की अन्दर से solid होते हैं.

Material Jetting

इस process में, material को apply किया जाता है droplets में एक small diameter nozzle के द्वारा, जो की similar होता है एक common inkjet paper printer के working के तरह, लेकिन इसे apply किया जाता है layer-by-layer, जिससे की एक platform build किया जा सकें, जिससे एक 3D object बनाया जा सके और फिर उसे hardened किया जाये UV light के मदद से.

Binder Jetting

Binder jetting में दो materials का इस्तमाल किया जाता है : powder base material और एक liquid binder.

Build chamber में, powder को पहले spread किया जाता है equal layers में और फिर binder को apply किया जाता है jet nozzles के द्वारा जो की “glue” कर देता है powder particles को एक programmed 3D object के shape में.

अब finished object को एक साथ glue किया जाता है binder remains के द्वारा उस container में, powder base material के इस्तमाल से. एक बार print ख़त्म हो जाये, फिर remaining powder को clean किया जाता है और उसे इस्तमाल किया जाता है 3D printing में next object में.

इस technology को सबसे पहले develop किया गया था Massachusetts Institute of Technology में सन 1993 और 1995 में. Z Corporation ने इसकी exclusive license को प्राप्त कर लिया.

Material Extrusion

ये सबसे commonly use किया जाने वाला technology इस process में इसका नाम है Fused Deposition Modeling (FDM).

Fused Deposition Modeling (FDM)

ये FDM technology work करता है एक plastic filament या metal wire के इस्तमाल से जिसे की unwound किया जाता है एक coil से और material supply किया जाता है एक extrusion nozzle को जो की flow को on या off करती है.

इसमें nozzle को heat किया जाता है material को melt करने के लिए और जिसे की दोनों horizontal और vertical directions में move किया जा सके एक numerically controlled mechanism के द्वारा, जो की directly controlled किया जाता है एक computer-aided manufacturing (CAM) software package के द्वारा.

इसमें object को produce किया जाता है melted material को extrude का form layers में जैसे की material hardens हो जाये immediately, जैसे की वो nozzle से extruse हो.

इस technology का सबसे ज्यादा इस्तमाल two plastic 3D printer filament types में होता है :

ABS (Acrylonitrile Butadiene Styrene) और PLA (Polylactic acid).
वैसे और भी बहुत से materials available हैं जिनकी properties wood fill से लेकर flexible और यहाँ तक की conductive materials भी शामिल हैं.

FDM को invent Scott Crump ने late 80’s में किया था. उन्होंने इसे technology को patent बनाने के बाद एक company की शुरुवात की जिसका नाम था Stratasys सन 1988 में. ये term Fused Deposition Modeling और उसका abbreviation FDM दोनों की trademarked हैं Stratasys Inc के द्वारा.

Fused Filament Fabrication (FFF)

इसका exactly equivalent term, Fused Filament Fabrication (FFF), को नामित किया था RepRap project के members ने, जो की इसे एक ऐसे phrase प्रदान करना चाहते थे जो की बाद में legally unconstrained हो इस्तमाल करने में. यानि इसे उसे इस्तमाल करने में कोई दिक्कत नहीं आये.

वैसे तो बहुत से अलग अलग प्रकार के FFF 3D Printer configurations होते हैं. वहीँ सबसे popular arrangements जो होती है वो हैं :

  • Cartesian-XY-Head
  • Cartesian-XZ-Head
  • Delta
  • Core XY

Powder Bed Fusion

इसमें जो सबसे commonly used technology होती है वो है Selective Laser Sintering (SLS).

Selective Laser Sintering (SLS)
SLS बहुत ही high power laser का इस्तमाल करती है छोटे particles के plastic, ceramic और glass powders को एक साथ fuse करने के लिए एक mass में जिसकी एक desired three-dimensional shape होती है.

इसमें laser selectively fuse करता है powdered material को, जिसके लिए वो Scan करता है cross-sections (या layers) जो की generate होता है 3D modeling program के द्वारा powder bed के surface में.

एक बार प्रत्येक cross-section को scan कर लिया जाये, तब powder bed को lower किया जाता है एक layer thickness की. फिर एक नयी layer की material को apply किया जाता है top में और इस process को तब तक repeat किया जाता है जब तक की object complete न हो जाये.

Direct Metal Laser Sintering (DMLS)

DMLS basically समान होता है SLS के जैसे, लेकिन ये इस्तमाल करता है metal, plastic, ceramic या glass के स्थान पर.

सभी untouched powder उसी तरह रहते हैं और बन जाते हैं एक support structure उस object के लिए. इसलिए कोई भी support structure की जरुरत नहीं होती है इसमें, जो की इसे advantage प्रदान करता है SLS और SLA के ऊपर.

सभी unused powder को इस्तमाल किया जा सकता है next print में. SLS को develop और patent किया गया Dr. Carl Deckard के द्वारा जो की University of Texas के थे, ये उन्होंने mid-1980s में खोज की थी, वो भी DARPA के sponsorship के अधीन.

Sheet Lamination

Sheet lamination की process में होता ये है की sheets के material को एक साथ bound किया जाता है external force के मदद से. Sheets कुछ भी हो सकते हैं चाहे वो metal, paper या फिर एक form हो polymer का.

Metal sheets को एक साथ weld किया जाता है ultrasonic welding के साथ layers में और फिर CNC को mill किया जाता है एक proper shape में.

Paper sheets को भी इस्तमाल किया जा सकता है, लेकिन वो एक दुसरे के साथ चिपक जाते हैं adhesive glue के कारण और उन्हें बाद में cut किया जाता है shape में precise blades के द्वारा. इस field में एक leading company है Mcor Technologies.

Directed Energy Deposition

यह process का ज्यादातर इस्तमाल high-tech metal industry में होता है और साथ में rapid manufacturing applications में भी. इसमें 3D printing apparatus को अक्सर attach किया जाता है एक multi-axis robotic arm के साथ और जिसमें की एक nozzle होता है जो की deposit करता है metal powder या wire एक surface के ऊपर और एक energy source (laser, electron beam या plasma arc) जो उसे melt करता है, साथ ही अंत में एक solid object बनकर तैयार होता है.

3D Printer और Printing में किन Materials का इस्तमाल किया जाता है?

मुख्य रूप से Six types की materials का इस्तमाल किया जाता है additive manufacturing करने के लिए जो की हैं :

polymers, metals, concrete, ceramics, paper और कुछ edibles (e.g. chocolate).

Materials को अक्सर produce किया जाता है wire feedstock a.k.a. 3D printer filament, powder form या liquid resin में.

सभी सातों previously described 3D printing techniques में इन्ही materials का इस्तमाल किया जाता है. वैसे तो polymers को ज्यादा commonly इस्तमाल किया जाता है और कुछ additive techniques अपने आपको कुछ certain materials के इस्तमाल पर ज्यादा जोर देते हैं.

कैसे सही 3D Printing process का चुनाव करें?

सही optimal 3D printing process का चुनाव करना एक particular application के लिए कठिन हो सकता है. अक्सर एक से ज्यादा process होते ही हैं जो की suitable होते हैं प्रत्येक ही process अलग अलग benefits प्रदान करता है, जैसे की greater dimensional accuracy, superior material properties और बेहतर surface finish.

इसी कारण के लिए, मैंने एक decision making tools बनाया है और generalized guidelines जो की आपकी मदद करेगा सही 3D printing process का चुनाव करने में.

Generally बात करें तब, असल में तीन मुख्य चीज़ें होती हैं जिन्हें की आपको सबसे पहले consider करना चाहिए :

  • जरुरत की material properties: strength, hardness, impact strength etc.
  • Functional और visual design requirements: smooth surface, strength, heat resistance etc.
  • 3D printing process की capabilities: accuracy, available print volume, layer height etc.

3D Printing की Industry क्या है? कैसे काम करती है?

पूरी दुनियाभर में 3D printing industry की expected growth हुई लगभग $3.07B revenue सन 2013 से लेकर $12.8B तक हुई सन 2018 में. वहीँ सूत्रों के अनुसार ये $21B का आंकड़ा भी पार करने वाला है सन 2020 तक.

जैसे जैसे ये evolve हो रहा है, 3D printing technology प्राय सभी major industries को आगे चलकर transform करने वाला है, साथ में ये इस बात को change करने वाला है की कैसे हम live, work, और play करने वाले हैं भविष्य में.

ये 3D printing industry बहुत से forms के technologies और materials को अपने साथ encompass करता है. जहाँ लोग 3D printing के विषय में सोचते हैं तब वो Desktop 3D Printer के विषय में vizualize करते हैं. ये तो बहुत छोटे से चीज़ के विषय में मैंने बताया.

3D printing को divide किया जाता है metal, fabrics, bio और दुसरे industries में. इसीलिए ये महत्वपूर्ण है की इसे एक cluster के रूप में देखा जाये diverse industries का जिनकी अलग अलग applications होती हैं.

यदि हम ये जानने की कोशिश करें की कौन से industries में कितने प्रतिशत की 3D printing का इस्तमाल किया जाता है, तब इसके लिए मैंने नीचे कुछ आंकड़े रखें हैं इसे बेहतर रूप से समझने के लिए : -:

  • Consumer Goods (17%)
  • Industrial Goods (17%)
  • High Tech (13%)
  • Services (9%)
  • Healthcare sectors (7%)

3D printing अब हमारे day-to-day business operations के साथ ज्यादा उलझ रहे हैं. बहुत से companies के CEO 3D printing को एक benefits के रूप में देख रहे हैं. अभी के समय में ज्यादातर companies primarily focus कर रहे हैं research, development और prototyping में. सभी की इनके potential के विषय में मालूम है.

3D प्रिंटिंग के फायदे

अब चलिए 3D printing के important benefits के विषय में जानते हैं.

Geometric Complexity वो भी no Extra Cost

3D printing allow करती है आसान fabrication वो भी complex shapes की, ज्यादातर चीज़ें कोई दुसरे manufacturing method से तैयार नहीं की जा सकती है.

इस Technology के additive nature होने के कारण इनकी geometric complexity की कीमत higher price नहीं होती है. ऐसे complex चीज़ों के parts और organic geometry optimized की performance की कीमत बस 3D print के जितने ही होती है. जो की traditional manufacturing की कीमत से भी बहुत कम होता है.

बहुत कम Start-up Costs

पहले के formative manufacturing (जैसे की Injection Molding और Metal Casting) इनमें प्रत्येक part में एक unique mold की जरुरत होती है. ये custom tools की कीमत बहुत ही ज्यादा होती है. इनकी कीमत को कम करने के लिए समान parts की हजारों items को manufacture किया जाता था.

चूँकि 3D printing में कोई specialized tooling की जरुरत है नहीं है, इसलिए इसमें start-up cost न के बराबर होता है. 3D printed part की कीमत निर्भर करता है केवल इस्तमाल हुए materials के amount के ऊपर, जितना समय machine को लगा इसे print करने में और post-processing में, अगर लगे तो final output पाने में.

Customization करना हरेक Part का

क्या आपने कभी ये सोचा है की क्यूँ हमारे कपड़ों के standardized sizes होते हैं? इसका कारण मैंने पहले ही बता दिया है की, traditional manufacturing में consumers को identical (समान) प्रकार के products को बेचना आसान होता है और सस्ता भी.

3D printing allow करता है easy customization. चूँकि इसकी start-up costs ही बहुत कम होती है, इसमें बस digital 3D model को बदलना होता है एक नया custom part create करने के लिए. तो result क्या होता है?

इसकिये बड़ी ही आसानी से user के specific जरूरतों के अनुसार प्रत्येक items को customized किया जा सकता है, जिसके कारण manufacturing costs के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

Low-cost prototyping का होना वो भी बहुत जल्द

3D Printing का एक बहुत ही बड़ा use है की इससे आसानी से prototyping किया जा सकता है – दोनों form और function के लिए. ये सभी चीज़ें बहुत ही कम समय में किया जा सकता है और इसमें दुसरे processes को कोई हानी नहीं पहुँचती है. साथ ही कोई दूसरा manufacturing process ऐसा करने में सक्षम नहीं है.

Parts जो की printed होते हैं एक desktop 3D printer में उन्हें usually रातभर में तैयार किया जा सकता है और वहीँ बड़े मात्रा के order को भी 2-5 दिनों में तैयार किया जा सकता है.

Prototyping तैयार करने की speed से design cycle (design, test, improve, re-design) में भी काफी improvement दिखाई पड़ती है. ऐसे Products जिन्हें develop होने में पहले 8+ months का समय लगता था वहीँ अब उन्हें develop करने के लिए केवल 8-10 weeks ही लगते हैं.

Large Range का होना Speciality Materials के लिए

सबसे ज्यादा और common 3D printing materials जो अभी के समय में इस्तमाल किया जाता है वो है plastics. Metal 3D printing का भी उपयोग बहुत से industrial applications में होता है.

3D printing pallet में speciality materials होती है जिनकी properties को specific applications के हिसाब से बदला जा सकता है. 3D printed parts जिन्हें हम आजकल इस्तमाल कर रहे हैं वो high heat resistance, high strength या stiffness और साथ में biocompatible भी होते हैं.

Composites भी बहुत ही common हैं 3D printing में. इसमें इस्तमाल होने वाले materials में metal, ceramic, wood or carbon particles, या reinforced carbon fibres के साथ मिलाया जाता है. Results में हमें ऐसे parts मिलते हैं जिनकी unique properties होते हैं जो की suitable होते हैं specific applications के लिए.

3D Printings के Limitations क्या हैं?

जहाँ 3D Printings के इतने advantages हैं वहीँ इसके कुछ limitations भी मेह्जुद हैं. तो चलिए इनके limitations के विषय में जानते हैं.

Lower strength और anisotropic material properties का होना

इन 3D printed parts के physical properties उतने बढ़िया नहीं होते हैं जितने के bulk material के होते हैं. चूँकि इन्हें बनाया गया होता है layer-by-layer, इसलिए ये weaker और ज्यादा brittle होते हैं एक direction में वो भी approximately 10% से 50%.

इसीकारण के लिए, plastic 3D printed parts का इस्तमाल ज्यादातर non-critical functional applications में होता है.

कम cost-competitive वो भी higher volumes में भी

3D printing कभी भी compete नहीं कर सकती है traditional manufacturing processes के साथ जब बात आती है large production runs की.

3D printing में custom tool या mold के न होने से start-up costs low होता है, इसलिए prototypes और एक छोटी मात्रा की identical parts (करीब 10 तक ) आसानी से manufactured किया जा सकता है economically. वहीँ जब बात बड़े quantities की आती है तब ये technology वहां पर fail हो जाता cost के मामले में.

Limited accuracy और tolerances का होना

एक 3D Printed Parts की accuracy निर्भर करती है process और calibration उस machine की. Typically, parts जो की एक desktop FDM 3D printer में print किये जाते हैं उनकी accuracy बहुत कम होती है और tolerances भी बहुत कम.

उदाहरण के लिए अगर आप एक hole की design बनायेंगे जिसकी diameter है 10mm तब इसकी true diameter printing के बाद होगी 9.5 mm से 10.5 mm के बीच.

Post-processing और support removal

Printed parts को बहुत ही कम जगहों में तुरंत ही इस्तमाल में लाया जाता है. क्यूंकि वो उस समय तैयार नहीं होते हैं बल्कि उन्हें एक या उससे ज्यादा post-processsing steps से गुजरना होता है तैयार होने के लिए.

उदाहरण के लिए जब कोई item 3D printer से print किया जाता है तब जैसे की उन्हें printer से अलग किया जाता है तब उसमें कुछ marks और blemishes होते हैं surface में जो की दुसरे device के contact में होता है. इन areas को additional operations (sanding, smoothing, painting) की जरुरत होती है एक high quallity surface finish प्राप्त करने के लिए.

3D प्रिंटिंग का मुख्य उपयोग क्या है

3D प्रिंटर का उपयोग क्या है
3D प्रिंटर

अब चलिए 3D printing के अलग अलग applications के विषय में जानते हैं.

Aerospace

Aerospace और Space engineers इस्तमाल करते हैं 3D printing का high-performance parts manufacture करने के लिए. इनकी ability है की ये create कर सकते हैं topology optimized structures जिसमें high strength-to-weight ratio होती है और ऐसी possibility जिससे की multiple components को एक single part में consolidate किया जा सके और जो की बहुत ही appealing होती है.

Automotive

ये automotive industry को भी बहुत ज्यादा फायेदा हुआ है 3D Printings से क्यूंकि इससे वो अपने customization को आसानी से कर सकते हैं और वो भी बहुत ही कम समय में.

उदाहरण के लिय Volkswagen traditionally इस्तमाल करता है CNC machining को custom jigs और fixtures create करने के लिए. CNC की typically longer production times और higher cost होती है. वहीँ ये समान jigs और fixtures को 3D printed किया जा सकता है overnight और test भी किया जा सकता है assembly line में वहीँ दुसरे दिन ही. the next day.

Robotics

Robotics & automation के दुनिया में, custom one-off parts की हमेशा जरुरत होती है नयी robotic mechanisms को develop करने के लिए. 3D printing बहुत ही जल्द evolve हुई है एक main manufacturing technology के हिसाब से इस industry में, क्यूंकि इनकी speed, great design freedom और ease of customization के वजह से.

इसकी बड़ी range की material options वो भी unique properties के साथ, allow करती है unique structures को create करने में, जैसे की “soft” robots.

Industrial tooling

नयी 3D printing materials के development में जो की high heat resistance और stiffness प्रदान करती है, जिन्हें की combine किया जाता है उनकी ability से जिससे की वो custom parts quickly create कर सकें वो भी बहुत low cost में, ये 3D printing को बढ़ावा देती है उन्हें multiple applications में इस्तमाल करने के लिए industrial tooling में.

Healthcare

आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है की US में hearing aids को manufacture किया जाता है exclusively 3D printing के मदद से. वहीँ जो companies नयी technology को जल्दी adopt नहीं करते हैं उन्हें बहुत competition का सामना करना पड़ता है बाद में.

Healthcare और prosthetics field को काफी benefit मिला है जब उन्होंने adopt किया 3D printing को. Custom shapes, जैसे की hearing aids, को अब और maunal labour से बनाने की कोई भी जरुरत नहीं है. इन्हें आसानी से एक digital file से ही तुरंत बनाया जा सकता है. इससे इन्हें बहुत ही कम कीमत में और जल्दी बड़ी मात्रा में तैयार किया जा सकता है.

Product design

3D printing के मदद से, product designers आसानी से अपने products को customize कर सकते हैं वो भी बिना कोई extra costs के. वो आसानी से create कर सकते हैं high-quality functional prototypes वो बी नयी product concept के लिए. वहीँ इससे design cycle में भी काफी तेजी आती है.

Entertainment

3D printing अब एक बहुत ही favorite tool बन गया है movie makers के लिए, क्यूंकि इसमें वो ability है जिससे की believable props बनाया जा सकता है. इसकी high design flexibillity के होने से ये मदद करती हैं entertainment professionals को उनके सोचके हिसाब से चीज़ों को बनाने में. इसे बहुत ही सहज ढंग से और जल्द बनाया जा सकता है, इसके अलावा इसकी कीमत भी बहुत कम होती है.

Education

3D printing technology की बहुत ज्यादा potential है educational environments में. इसकी मदद से, course subjects को जीवित किया जा सकता है उनके scaled replicas बनाकर. ये students को equip करती है practical (और बहुत ज्यादा valuable) real-life experience से.

Makers

उन makers के लिए जो की constantly explore करते रहते हैं नए ideas को, 3D printing उनके लिए एक perfect tool है. इसकी एक key benefit ये है की इसकी ability जिससे की unlimited spare parts और नए designs बनाया जा सकता है बिना कोई external vendors के ऊपर निर्भर हुए.

वो आसानी से अपने designs को develop और customize कर सकते हैं जिससे की उन्हें ज्यादा समय मिलता है नए और बेहतर concepts सोचने के लिए और सही रूप प्रदान करने में.

3D Printing का Future क्या है?

जानकारों का मानना है की यह additive manufacturing की technological development commerce के nature को ही बदल कर रख देगी क्यूंकि इसमें end users ही बिना किसी के ऊपर निर्भर हुए ही खुद बहुत कुछ manufacture कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें दूसरों लोगों और corporations से कुछ खरीदना नहीं होगा.

3D printers जो की अभी capable है output पैदा करने में colour की और multiple materials में, या आगे चलकर और भी improve होने वाला है, जिसमें यहाँ तक की functional (electronic) products को भी output में पाया जा सकता है.

साथ ही 3D Printing का effect energy use, waste reduction, customization, product availability, medicine, art, construction और sciences में भी पड़ने वाला है, 3D printing आगे चलकर manufacturing world का रुख ही बदल देगी और ये जरुर होने वाला है.

3D प्रिंटिंग हिंदी में

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख 3D प्रिंटिंग क्या है (What is 3D Printing in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को ३द प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच comments लिख सकते हैं.

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